लैपटॉप और कंप्यूटर की कीमतों में लगी आग अब आम खरीदारों और छात्रों की जेब पर पड़ेगा भारी बोझ

लैपटॉप और कंप्यूटर की कीमतों में लगी आग अब आम खरीदारों और छात्रों की जेब पर पड़ेगा भारी बोझ

प्रेषित समय :21:30:46 PM / Wed, Mar 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. देश के तकनीकी बाजार से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है जहां लैपटॉप और पर्सनल कंप्यूटर की कीमतों में अचानक आई भारी तेजी ने आम उपभोक्ताओं और छात्रों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान और प्रमुख कलपुर्जों की किल्लत के चलते कंप्यूटर हार्डवेयर की कीमतों में 10 से 12 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया है और विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो महज शुरुआत है. बाजार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ हफ्तों में कीमतों में 10 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हो सकती है जिससे नया सिस्टम खरीदना अब एक लग्जरी बनता जा रहा है. विशेष रूप से डीडीआर रैम (DDR RAM) की कीमतों में ढाई से तीन गुना तक की वृद्धि और इंटेल के एंट्री-लेवल प्रोसेसर की भारी कमी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है. जो लैपटॉप कुछ समय पहले तक 30 से 35 हजार रुपये की सुलभ श्रेणी में उपलब्ध थे, उनकी कीमतें अब 45 हजार रुपये के आंकड़े को पार कर गई हैं.

इस मूल्य वृद्धि के पीछे कई वैश्विक और तकनीकी कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं. मार्केट रिसर्च फर्म आईडीसी और काउंटरपॉइंट के विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक मांग में जबरदस्त उछाल आया है जिसके कारण मेमोरी चिप्स बनाने वाली कंपनियों ने अपनी सप्लाई का बड़ा हिस्सा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर मोड़ दिया है. इस बदलाव की वजह से सामान्य उपयोग में आने वाले डी-रैम (DRAM) और नंद (NAND) फ्लैश मेमोरी के दाम आसमान छूने लगे हैं. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक महंगाई ने भी निर्माण लागत को काफी बढ़ा दिया है. केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी इस महंगाई का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है. होरमुज़ जलडमरूमध्य में जारी सैन्य और रणनीतिक तनाव के कारण ईंधन और पेट्रोकेमिकल की आपूर्ति बाधित हुई है जिससे सेमीकंडक्टर निर्माण की प्रक्रिया अप्रत्यक्ष रूप से महंगी हो गई है और लॉजिस्टिक्स यानी माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है.

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में भारत में पीसी शिपमेंट ने 1.5 करोड़ यूनिट्स के साथ ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन इस साल कीमतों में आई इस बेतहाशा वृद्धि के कारण बिक्री में 8 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है. खुदरा विक्रेताओं और मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन का कहना है कि बीते नवंबर महीने से हर महीने कीमतों में इजाफा हो रहा है और असेंबल किए गए कंप्यूटरों की कीमतें तो अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई छोटी कंपनियां और स्टार्टअप्स भविष्य में और दाम बढ़ने के डर से अभी से थोक में खरीदारी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का यह भी अनुमान है कि साल 2027 की दूसरी छमाही से पहले कीमतों में किसी बड़े सुधार या कमी की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है. ऐसे में आम जनता और छात्रों के लिए डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन शिक्षा की राह अब और भी खर्चीली होने वाली है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-