भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद, यूक्रेन ने बताया रूस की साजिश और राजनीतिक साजिश का हिस्सा

भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद, यूक्रेन ने बताया रूस की साजिश और राजनीतिक साजिश का हिस्सा

प्रेषित समय :16:54:16 PM / Thu, Mar 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली। भारत में छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। यूक्रेन ने इस पूरे मामले को “संभवतः सुनियोजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित” करार देते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है। यूक्रेन का कहना है कि इस कार्रवाई के पीछे रूस द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी की भूमिका संदिग्ध है और यह दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।

यह मामला तब सामने आया जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक विशेष अभियान के तहत छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता के हवाई अड्डों से गिरफ्तार किया। इन सभी को दिल्ली की एक अदालत ने 27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है। एजेंसी का आरोप है कि ये सभी लोग पर्यटक वीजा पर भारत आए थे, लेकिन उन्होंने निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए मिजोरम और उसके बाद म्यांमार में अवैध गतिविधियों में हिस्सा लिया।

यूक्रेन के दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स से यह संकेत मिलता है कि इस मामले की शुरुआत रूसी पक्ष द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर हुई। ऐसे में कई ऐसे तत्व सामने आ रहे हैं जो इस पूरे घटनाक्रम को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” और “सुनियोजित” साबित कर सकते हैं। यूक्रेन ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस तरह के किसी भी आरोप को खारिज करता है जिसमें उसके राज्य की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता की बात कही जाती है।

यूक्रेनी पक्ष ने जोर देकर कहा कि उनका देश खुद लंबे समय से आतंकवाद और हिंसा का सामना कर रहा है, इसलिए वह किसी भी रूप में आतंकवाद का समर्थन नहीं कर सकता। बयान में कहा गया कि यूक्रेन का भारत की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी गतिविधि में कोई हित नहीं है, बल्कि वह भारत के साथ सहयोग और विश्वास को मजबूत करना चाहता है।

इस पूरे मामले में यूक्रेन ने नरेंद्र मोदी की अगस्त 2024 में कीव यात्रा के दौरान जारी संयुक्त बयान का भी उल्लेख किया। उस बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की थी और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मिलकर आतंकवाद से लड़ने की प्रतिबद्धता जताई थी। यूक्रेन ने कहा कि इसी साझा रुख के आधार पर किसी भी आरोप की जांच पारदर्शिता, प्रमाण और निष्पक्षता के साथ होनी चाहिए।

यूक्रेन ने यह भी कहा कि वह इस मामले में भारत के साथ पूर्ण सहयोग के लिए तैयार है। उसने दोनों देशों के बीच मौजूद आपसी कानूनी सहायता संधि का हवाला देते हुए कहा कि इसके तहत व्यापक स्तर पर जानकारी और सहयोग का आदान-प्रदान किया जा सकता है। यूक्रेन ने उम्मीद जताई कि भारत की एजेंसियां इस मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करेंगी और गिरफ्तार नागरिकों के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाएगा।

दूसरी ओर, एनआईए ने अदालत में दायर अपने बयान में आरोप लगाया है कि ये सभी विदेशी नागरिक अलग-अलग तारीखों में भारत आए और फिर गुवाहाटी के रास्ते मिजोरम पहुंचे। वहां से उन्होंने बिना आवश्यक अनुमति जैसे कि प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (RAP) या संरक्षित क्षेत्र परमिट (PAP) के म्यांमार में प्रवेश किया। एजेंसी के अनुसार, इन लोगों का उद्देश्य म्यांमार के कुछ जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन तकनीक, ड्रोन संचालन और जामिंग तकनीक का प्रशिक्षण देना था।

एनआईए का दावा है कि ये समूह ऐसे संगठनों से जुड़े हो सकते हैं जो भारत में सक्रिय आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देते हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लक्ष्य म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई करना था, लेकिन इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता था।

यूक्रेन ने इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की गहन और निष्पक्ष जांच जरूरी है। उसने आरोप लगाया कि रूस एक “आक्रामक राज्य” के रूप में लगातार प्रयास करता है कि वह मित्र देशों के बीच अविश्वास पैदा करे। यूक्रेन के अनुसार, इस मामले का इस्तेमाल भारत और यूक्रेन के बीच संबंधों को कमजोर करने के लिए किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी या सुरक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे जटिल भू-राजनीतिक पहलू भी हो सकते हैं। भारत, रूस और यूक्रेन के बीच संतुलन बनाए रखने की स्थिति में है, ऐसे में इस तरह के मामलों का असर कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में एनआईए की जांच और अदालत की कार्यवाही से स्थिति और स्पष्ट होगी। यूक्रेन की ओर से सहयोग की पेशकश और भारत की जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच संतुलन बनाना इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगा।

इस घटनाक्रम ने न केवल भारत-यूक्रेन संबंधों पर ध्यान खींचा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुफिया सूचनाओं की भूमिका और उनके उपयोग को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या यूक्रेन द्वारा लगाए गए “साजिश” के आरोपों में कोई ठोस आधार सामने आता है या नहीं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-