अरुणाचल का मायोडिया पास बना बर्फीला स्वर्ग, पर्यटकों की बढ़ती भीड़ से पर्यटन को मिली नई रफ्तार

अरुणाचल का मायोडिया पास बना बर्फीला स्वर्ग, पर्यटकों की बढ़ती भीड़ से पर्यटन को मिली नई रफ्तार

प्रेषित समय :21:22:37 PM / Sun, Mar 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

पूर्वोत्तर भारत का खूबसूरत राज्य अरुणाचल प्रदेश इन दिनों अपने अनछुए पर्यटन स्थलों के कारण तेजी से सुर्खियों में है, और इसी कड़ी में मायोडिया पास एक प्रमुख आकर्षण बनकर उभरा है. लगभग 2,655 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वतीय दर्रा सर्दियों के मौसम में बर्फ की सफेद चादर से ढककर एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है, जो देशभर के यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.

लोअर दिबांग वैली जिले में स्थित यह स्थान खासतौर पर दिसंबर से फरवरी के बीच बर्फबारी के कारण चर्चा में रहता है. जनवरी और फरवरी में यहां भारी हिमपात होता है, जिससे पूरा इलाका किसी यूरोपीय बर्फीले परिदृश्य जैसा नजर आता है. यही कारण है कि अब पर्यटक विदेशों में बर्फ देखने जाने के बजाय इस ऑफबीट डेस्टिनेशन की ओर रुख कर रहे हैं.

मायोडिया पास, रोइंग से करीब 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो इस क्षेत्र का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र भी है. यहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे प्रमुख विकल्प है. पर्यटक अक्सर डिब्रूगढ़ के नजदीकी हवाई अड्डे का उपयोग करते हैं, जो लगभग 190 किलोमीटर दूर स्थित है. बेहतर होती सड़क कनेक्टिविटी, खासकर नेशनल हाईवे 313 के जरिए, इस क्षेत्र को पहले की तुलना में अधिक सुलभ बना रही है.

मायोडिया पास की सबसे बड़ी खासियत इसकी मौसमी विविधता है. जहां सर्दियों में यह बर्फ से ढका रहता है, वहीं गर्मियों में यही क्षेत्र हरियाली से भर जाता है और हिमालय की तलहटी के शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है. मानसून के दौरान हालांकि भारी बारिश और भूस्खलन के कारण यहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे इस समय पर्यटकों की संख्या कम हो जाती है.

पर्यटकों के लिए मायोडिया पास केवल बर्फ देखने का स्थान नहीं है, बल्कि यहां कई तरह के अनुभव भी उपलब्ध हैं. बर्फ में खेलना, फोटोग्राफी करना और पहाड़ी क्षेत्रों में घूमना यहां आने वाले लोगों की पसंदीदा गतिविधियां हैं. इसके अलावा आसपास का क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है, जहां दिबांग वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी जैसे संरक्षित क्षेत्र वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित करते हैं.

यह इलाका सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध है. यहां रहने वाली मिश्मी और आदि जनजातियां अपनी अनूठी परंपराओं और जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं. पर्यटक इन जनजातियों के साथ बातचीत कर स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझ सकते हैं, जो यात्रा को और भी खास बना देता है.

मायोडिया पास की बढ़ती लोकप्रियता का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होमस्टे, गेस्ट हाउस, ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यापारियों को फायदा हो रहा है. स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग भी इसे एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं और यहां सुविधाओं के विस्तार पर जोर दे रहे हैं.

हालांकि इस बढ़ती लोकप्रियता के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. बर्फबारी के दौरान सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे यात्रा जोखिम भरी हो सकती है. स्थानीय प्रशासन समय-समय पर एडवाइजरी जारी करता है, जिसमें केवल अनुभवी ड्राइवरों को ही इस मार्ग पर यात्रा करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा पर्यटकों को उचित सर्दी के कपड़े, जरूरी उपकरण और यात्रा की पूर्व योजना बनाकर आने की सलाह दी जाती है.

इस क्षेत्र में आने के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) की आवश्यकता भी हो सकती है, जो पूर्वोत्तर के संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश के लिए जरूरी होता है. सीमित आवास सुविधाओं के कारण पर्यटकों को अक्सर रोइंग या आसपास के शहरों में रुकने की योजना बनानी पड़ती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि मायोडिया पास भविष्य में भारत के प्रमुख स्नो टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में उभर सकता है. जिस तरह से यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है और सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया जा रहा है, वह इस दिशा में सकारात्मक संकेत देता है.

मायोडिया पास आज उस नए भारत की तस्वीर पेश कर रहा है, जहां लोग पारंपरिक पर्यटन स्थलों से हटकर नए और अनछुए स्थानों की तलाश कर रहे हैं. प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़, सांस्कृतिक विविधता और एडवेंचर के अवसर इसे एक संपूर्ण पर्यटन पैकेज बनाते हैं.

आने वाले समय में यदि यहां बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर संतुलित तरीके से काम किया जाता है, तो यह स्थान न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है. फिलहाल मायोडिया पास उन यात्रियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है, जो प्रकृति के बीच सुकून और रोमांच दोनों की तलाश में हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-