भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी में आयोजित एक महत्वपूर्ण विमर्श में देश की राजनीति, बजट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे समसामयिक विषयों पर गहन चर्चा की गई, जिसमें कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार साझा किए. भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा द्वारा मध्यप्रदेश प्रशासन अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय एवं राज्य बजट 2026-27 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया गया.
कार्यक्रम में भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल चुनाव जीतने के लिए शॉर्ट टर्म नीतियों को अपनाया जा रहा है, जो दीर्घकालिक दृष्टि से जनहित में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल और नेता ऐसी योजनाएं और घोषणाएं करते हैं जो चुनावी लाभ तो देती हैं, लेकिन उनका प्रभाव बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता. उन्होंने इस प्रवृत्ति को चिंतनीय बताते हुए कहा कि इस पर राजनीतिक दलों, नेताओं और समाज के सभी वर्गों को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
ओ.पी. रावत ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश में तेजी से ऐसी डिग्रियां दी जा रही हैं जो नौकरी की गारंटी का दावा करती हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है. उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से छात्र डिग्री प्राप्त करने के बाद नौकरी का दावा करने लगते हैं, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है. उन्होंने सरकार और निजी शैक्षणिक संस्थानों से इस दिशा में सुधार की आवश्यकता बताई.
विमर्श की अध्यक्षता कर रहे रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और आईआईपीए के चेयरमैन के.के. सेठी ने विषय प्रवर्तन करते हुए बजट के विभिन्न आयामों पर चर्चा की. वहीं वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ सरमन नगेले ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े बजट प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सीमा को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किया है और विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को वर्ष 2047 तक टैक्स हॉलीडे देने का प्रावधान किया गया है.
सरमन नगेले ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में बिना एआई स्किल के सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार पाना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने इसे कंप्यूटर शिक्षा के शुरुआती दौर से जोड़ते हुए कहा कि जैसे पहले टाइपिंग और बेसिक कंप्यूटर कोर्स जरूरी हुआ करते थे, वैसे ही अब एआई स्किल अनिवार्य होती जा रही है.
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर वैश्विक चर्चाएं हुई हैं और सरकारें इस दिशा में नई रणनीति बनाने पर विचार कर रही हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा एआई के क्षेत्र में रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन के लिए बजट में अभी पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं, लेकिन भविष्य में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है.
विमर्श के दौरान यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार जल्द ही आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों के माध्यम से एआई के बेसिक कोर्स शुरू करने की योजना बना रही है, जिससे युवाओं को नई तकनीक के अनुरूप तैयार किया जा सके और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें.
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी सरकार को टेक्नोलॉजी, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्रों में अधिक निवेश करने की सलाह दी. साथ ही उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों, अधोसंरचना, स्टार्टअप, एमएसएमई और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बजट प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
इस दौरान फ्री योजनाओं के कारण राज्यों की आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा की गई और संतुलित बजट नीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया. कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव, पूर्व डीजीपी, शिक्षाविदों और कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए और समसामयिक मुद्दों पर सार्थक संवाद किया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

