अनिल मिश्र/देव, औरंगाबाद
बिहार के औरंगाबाद जिले स्थित ऐतिहासिक देव सूर्य नगरी में महान लोक आस्था के पर्व चैती छठ के अवसर पर इस वर्ष श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. प्रशासनिक आंकड़ों और स्थानीय अनुमानों के अनुसार, इस बार करीब सात लाख से अधिक श्रद्धालु देव पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र श्रद्धा, भक्ति और आस्था के रंग में डूब गया. चारों ओर केवल छठ व्रती और उनके परिजन ही दिखाई दे रहे थे और पूरा वातावरण ‘जय छठी मैया’ और भगवान भास्कर के जयघोष से गूंज उठा.
देव स्थित प्राचीन देव सूर्य मंदिर और उसके समीप स्थित पवित्र सूर्यकुंड के आसपास श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ थी कि पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी. श्रद्धालु घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए ताकि वे पवित्र सरोवर में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सकें. अस्ताचलगामी और उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला.
इस दौरान औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस अधीक्षक अंबरीष राहुल ने भी स्वयं घाट पर पहुंचकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया. उन्होंने श्रद्धालुओं से शांतिपूर्ण ढंग से पूजा करने की अपील भी की. भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी. चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल, दंडाधिकारी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके.
देव सूर्य नगरी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है. यह स्थान त्रेतायुगीन आस्था से जुड़ा हुआ है और यहां स्थित सूर्य मंदिर की वास्तुकला अद्वितीय है, जिसका मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान सूर्य की आराधना करने और सूर्यकुंड में स्नान कर अर्घ्य देने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. विशेष रूप से चर्म रोगों से मुक्ति, संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि की कामना लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां पहुंचते हैं.
चार दिवसीय इस कठिन व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसके बाद खरना, फिर अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य और अंत में उदयाचलगामी सूर्य को दूसरा अर्घ्य देकर इसका समापन किया जाता है. इस दौरान व्रती 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं, जो उनकी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है. इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से इस अनुष्ठान को संपन्न किया और खुद को धन्य महसूस किया.
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने व्यापक इंतजाम किए थे. जगह-जगह चिकित्सा शिविर, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी शौचालय और विश्राम स्थल बनाए गए थे ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. इसके अलावा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान लागू किया गया था और कई मार्गों पर वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित किया गया था.
भीड़ के मद्देनजर प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में 36 घंटों का हाई अलर्ट जारी किया था. सुरक्षा के दृष्टिकोण से ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई और कंट्रोल रूम से लगातार स्थिति पर नजर रखी गई. प्रशासन की मुस्तैदी और स्थानीय लोगों के सहयोग के चलते पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली.
पर्व के समापन के बाद अब श्रद्धालु अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं. चार दिनों तक देव सूर्य नगरी में जो उत्सव का माहौल बना रहा, वह अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है. हालांकि इस बार की भीड़ और भक्ति का दृश्य लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार जितनी भीड़ उमड़ी, वैसी पहले कभी देखने को नहीं मिली थी.
चैती छठ का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूत करता है. देव सूर्य नगरी में उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता के इस दौर में भी लोगों की आस्था और परंपराओं के प्रति विश्वास अटूट बना हुआ है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

