तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार Pawan Kalyan की बहुप्रतीक्षित फिल्म Ustaad Bhagat Singh आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, लेकिन लंबे इंतजार और भारी उम्मीदों के बावजूद यह फिल्म दर्शकों और समीक्षकों को खास प्रभावित करने में नाकाम रही है. करीब पांच साल के इंतजार, बड़े बजट और लोकप्रिय स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म की कहानी और प्रस्तुति कमजोर कड़ी साबित हुई है.
फिल्म का निर्देशन Harish Shankar ने किया है, जिन्होंने पहले पवन कल्याण के साथ Gabbar Singh जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दी थी. इसी वजह से इस जोड़ी से एक बार फिर बड़े धमाके की उम्मीद की जा रही थी. हालांकि, “उस्ताद भगत सिंह” उस स्तर को छूने में असफल रही.
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी कमजोर और बिखरी हुई कहानी बताई जा रही है. जहां एक ओर फिल्म अपने हीरो को बड़े पैमाने पर पेश करने में पूरी ताकत झोंकती नजर आती है, वहीं दूसरी ओर कहानी और भावनात्मक जुड़ाव लगभग गायब सा लगता है. कई दृश्यों में ऐसा महसूस होता है कि फिल्म दर्शकों को प्रभावित करने के बजाय उपदेश देने में अधिक व्यस्त है.
Pawan Kalyan ने अपने स्टारडम के अनुरूप स्क्रीन प्रेजेंस जरूर दिखाई है, लेकिन एक मजबूत स्क्रिप्ट के अभाव में उनका प्रभाव सीमित रह जाता है. उनके फैंस के लिए कुछ एंट्री सीन और डायलॉग्स जरूर तालियां बटोर सकते हैं, लेकिन आम दर्शकों के लिए फिल्म में वह पकड़ नहीं बन पाती, जो अंत तक बांधे रखे.
फिल्म का ट्रीटमेंट भी काफी हद तक पुराना और पारंपरिक लगता है. 2026 के दौर में जहां दर्शक नई और ताजगी भरी कहानियों की उम्मीद करते हैं, वहां यह फिल्म पुराने फॉर्मूले पर चलती नजर आती है. एक्शन, डायलॉगबाजी और हीरोइज्म पर अत्यधिक जोर फिल्म को एकतरफा बना देता है.
तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म का प्रोडक्शन वैल्यू अच्छा है और कुछ एक्शन सीक्वेंस प्रभावशाली भी हैं. संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मूड को सपोर्ट करते हैं, लेकिन वे भी कहानी की कमी को पूरी तरह छिपा नहीं पाते.
फिल्म के निर्माण में हुई देरी का असर भी साफ नजर आता है. 2020 में अनाउंस होने के बाद कई कारणों से यह फिल्म लंबे समय तक अटकी रही, जिससे दर्शकों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ती गईं. लेकिन रिलीज के बाद फिल्म उन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई.
समीक्षकों का मानना है कि फिल्म अपने मुख्य उद्देश्य से भटक गई है. जहां इसे एक मजबूत और प्रभावशाली कहानी के साथ आना चाहिए था, वहीं यह स्टार पावर और पुराने मसाला तत्वों पर ज्यादा निर्भर हो गई. यही कारण है कि फिल्म दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने में असफल रही.
कुल मिलाकर, “उस्ताद भगत सिंह” एक ऐसी फिल्म बनकर सामने आई है, जिसमें बड़ा स्टार, बड़ा बजट और बड़ा प्रचार तो है, लेकिन एक सशक्त कहानी की कमी साफ महसूस होती है. पवन कल्याण के फैंस के लिए यह फिल्म एक बार देखने लायक हो सकती है, लेकिन आम दर्शकों के लिए यह अनुभव उम्मीद से कमतर साबित होता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

