कन्नूर. केरल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इस बीच कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच अंदरखाने गुप्त समझौता हुआ है। कांग्रेस के इस आरोप ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना दिया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने बातचीत के दौरान कहा कि राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों में दोनों दलों के बीच आपसी तालमेल स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि जहां भारतीय जनता पार्टी मजबूत मानी जाती है, वहां वह जानबूझकर कमजोर प्रत्याशी उतार रही है ताकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को लाभ मिल सके। इसी प्रकार, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में ऐसे प्रत्याशी उतार रही है जिससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचे।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि आम जनता के बीच भी इस तरह की चर्चा हो रही है। लोगों को यह महसूस हो रहा है कि दोनों दल चुनाव में एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य की जनता इस कथित समझौते को समझ रही है और चुनाव में इसका जवाब देगी।
वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि कांग्रेस और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा इस मुद्दे को जनता के बीच प्रमुखता से उठाएंगे और लोगों को सच्चाई से अवगत कराएंगे। उन्होंने सबरीमाला से जुड़े कथित स्वर्ण चोरी के मामले को भी चुनाव का बड़ा मुद्दा बताया। उनके अनुसार यह घटना पूरे राज्य के लोगों की आस्था से जुड़ी है और इससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में राज्य सरकार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका संदिग्ध रही है और आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि आरोप पत्र दाखिल करने में देरी और लापरवाही के कारण आरोपियों को कानूनी प्रावधानों के तहत जमानत मिल गई, जो गंभीर चिंता का विषय है। कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार उठाकर जनता के सामने रखेगी।
वहीं, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने भी इन आरोपों को दोहराते हुए कहा कि राज्य में एक अघोषित राजनीतिक गठजोड़ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा भारी बहुमत से सत्ता में आएगा।
सनी जोसेफ ने अपने निर्वाचन क्षेत्र पेरावूर को लेकर भी विश्वास जताया और कहा कि वह चौथी बार विजय प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि मुकाबला भले ही कड़ा हो, लेकिन जनता का समर्थन उनके साथ है और परिणाम उनके पक्ष में आएंगे।
उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता के.के. शैलजा को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें एक सुरक्षित क्षेत्र से हटाकर पेरावूर भेजा गया है, जिससे पार्टी के अंदरूनी हालात का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी असंतोष हो सकता है।
कांग्रेस नेताओं ने राज्य के विकास को लेकर भी वर्तमान सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना विकास को लेकर जो योजनाएं चलाई जा रही हैं, वे कोई नई नहीं हैं, बल्कि इनकी शुरुआत पूर्ववर्ती सरकार के समय हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार कर्ज और विकास के आंकड़ों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है और यह आवश्यक है कि यह जांच की जाए कि विकास के नाम पर लिए गए धन का उपयोग सही दिशा में हुआ है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस को शासन करने का अवसर मिलता है, तो वह पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाएगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के आरोप चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं, जिनका उद्देश्य मतदाताओं को प्रभावित करना होता है। हालांकि, इन आरोपों का वास्तविक असर चुनाव परिणामों में किस प्रकार दिखाई देगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
फिलहाल केरल में चुनावी माहौल पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है और सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आएगी, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप और भी तेज होने की संभावना है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का चुनाव केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक गठजोड़, आस्था से जुड़े विषय और शासन की नीतियां भी मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करेंगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य की जनता किसे अपना समर्थन देती है और सत्ता की बागडोर किसके हाथों में जाती है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

