नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उसके चलते उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच देश में किसी भी प्रकार के लॉकडाउन की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक की. इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ संदेश दिया कि देश को “टीम इंडिया” की भावना के साथ मिलकर काम करना होगा और अफवाहों से बचते हुए हालात का मजबूती से सामना करना होगा.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करीब दो घंटे चली इस बैठक में उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल नहीं किया गया, जहां फिलहाल चुनावी प्रक्रिया चल रही है और आचार संहिता लागू है. बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बीच देश में ईंधन, गैस और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना था.
प्रधानमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि देश में लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह अफवाह हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जिस तरह केंद्र और राज्यों ने मिलकर “टीम इंडिया” के रूप में काम किया था, उसी तरह इस बार भी समन्वय और सहयोग के जरिए हर चुनौती का सामना किया जा सकता है.
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखें और किसी भी तरह की जमाखोरी तथा मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि आम जनता तक जरूरी वस्तुएं समय पर और उचित कीमत पर पहुंचना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
प्रधानमंत्री ने यह भी जोर दिया कि राज्य स्तर और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय किए जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके. उन्होंने प्रशासनिक सतर्कता बनाए रखने और हर स्तर पर निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए.
ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की आपूर्ति पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि नागरिकों को किसी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार हर स्तर पर तैयार है.
कृषि क्षेत्र को लेकर भी प्रधानमंत्री ने विशेष चिंता व्यक्त की और राज्यों से कहा कि आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों के भंडारण और वितरण की अग्रिम योजना बनाई जाए. उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए और इसके लिए समय रहते कदम उठाना जरूरी है.
प्रधानमंत्री ने सीमावर्ती और तटीय राज्यों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि शिपिंग, समुद्री गतिविधियों और जरूरी सामानों की आपूर्ति से जुड़े संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करनी होगी, ताकि किसी भी बाधा को समय रहते दूर किया जा सके.
बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh सहित कई वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हुए. इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने स्तर पर तैयारियों और योजनाओं की जानकारी साझा की.
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से अफवाहों और गलत सूचनाओं के प्रसार पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रामक खबरें जनता में डर और भ्रम पैदा करती हैं, इसलिए जरूरी है कि सही और विश्वसनीय जानकारी समय पर लोगों तक पहुंचाई जाए. उन्होंने साइबर धोखाधड़ी और फर्जी एजेंटों से भी सतर्क रहने की सलाह दी.
बैठक के दौरान यह भी संकेत मिला कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर एक समन्वित रणनीति पर काम कर रही है, जिससे वैश्विक परिस्थितियों का देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर कम से कम असर पड़े. सरकार की प्राथमिकताओं में आर्थिक स्थिरता बनाए रखना, उद्योगों को सुचारू रूप से चलाना और नागरिकों के हितों की रक्षा करना शामिल है.
इससे पहले भी केंद्र सरकार ने ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का निर्णय लिया था, जिसका कई राज्यों के नेताओं ने स्वागत किया. वहीं कुछ विपक्षी दलों ने इसे चुनावी कदम बताते हुए आलोचना भी की.
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों में ईंधन संकट की स्थिति बन रही है. ऐसे में भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठा रही है.
कुल मिलाकर, इस बैठक के जरिए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश में स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी प्रकार के लॉकडाउन की जरूरत नहीं है. “टीम इंडिया” की भावना के साथ केंद्र और राज्य मिलकर इस चुनौती का सामना करेंगे और देश को किसी भी बड़े संकट से सुरक्षित रखेंगे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

