रवीन्द्र शुक्ला
नई दिल्ली. नोएडा स्थित सेक्टर 27 के जैन मंदिर में भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य एवं गरिमामयी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस विशेष अवसर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया. कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान महावीर के चरणों में दीप प्रज्वलन और वंदना के साथ हुआ, जिसके पश्चात काव्य सरिता की ऐसी धारा बही कि देर रात तक श्रोता अपनी सीटों से बंधे रहे. इस कवि सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें वीर रस, हास्य, श्रृंगार और जैन दर्शन का अनूठा संगम देखने को मिला.
मंच पर काव्य जगत के कई दिग्गज हस्ताक्षर मौजूद थे, जिनमें मुक्तक के महारथी और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि दिनेश रघुवंशी ने अपनी सुमधुर पंक्तियों से प्रेम और मानवीय संवेदनाओं को जीवंत कर दिया. वहीं 'लपेटे में नेताजी' फेम और ओज के सशक्त हस्ताक्षर गौरव चौहान ने अपनी चिर-परिचित शैली में वीरता और राष्ट्रवाद की कविताओं से पांडाल में जोश भर दिया. जैन दर्शन की गहरी समझ रखने वाले जबलपुर के कवि सजल जैन ने आध्यात्मिक रचनाओं के माध्यम से महावीर के सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा. हास्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके इंदौर से दिल्ली आए कवि चेतन ने अपनी गुदगुदाने वाली रचनाओं से माहौल को खुशनुमा बना दिया और लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया.
नारी शक्ति और सुमधुर कंठ की प्रतीक कवयित्री श्रीमती अंजना जैन ने अपनी सार्थक और रसमय कविताओं से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए. मूलतः सागर की रहने वाली और ग्वालियर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अब नोएडा के सेक्टर 50 को अपनी कर्मस्थली बनाने वाली अंजना जैन ने अपनी रचनाओं में पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को बखूबी पिरोया. कार्यक्रम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण नन्हीं बाल कवयित्री सान्वी जैन रहीं, जिन्होंने अपनी मासूमियत भरी प्रभावशाली प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया. मंच का कुशल संचालन विख्यात राष्ट्रीय मंच संचालक और कवि डॉ. कमलेश बसंत ने किया. उन्होंने न केवल कार्यक्रम को अपनी संचालन कला से एक सूत्र में बांधे रखा, बल्कि अपने स्वयं के काव्य पाठ से भी उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया. इस आयोजन ने न केवल भगवान महावीर के संदेशों को जन-जन तक पहुँचाया बल्कि साहित्य और संस्कृति के माध्यम से समाज में समरसता का संदेश भी दिया.
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