ग्रहों के कष्ट से मुक्ति का सरल उपाय भगवान शिव की पूजा से दूर होते हैं सभी दोष

ग्रहों के कष्ट से मुक्ति का सरल उपाय भगवान शिव की पूजा से दूर होते हैं सभी दोष

प्रेषित समय :21:13:02 PM / Thu, Apr 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में भगवान शिव को अत्यंत करुणामय और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माना गया है. मान्यता है कि कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति से उत्पन्न कष्टों को दूर करने के लिए शिव पूजा सबसे प्रभावी उपायों में से एक है. विशेष रूप से चंद्र, मंगल, शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों के दोषों में भगवान शिव की आराधना से राहत मिलती है.

ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थिति में हो और मानसिक कष्ट, चिंता या अस्थिरता दे रहा हो, तो नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से लाभ मिलता है. इसी प्रकार जिन लोगों का मंगल कमजोर होता है, उन्हें भी शिव पूजा और इस मंत्र का जाप करने से सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं.

यदि कुंडली में बृहस्पति सप्तमेश हो या उसकी महादशा अथवा अंतर्दशा चल रही हो, तो व्यक्ति को शिव सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए और रुद्राभिषेक कराना अत्यंत लाभकारी माना गया है. इससे वैवाहिक जीवन, ज्ञान और सामाजिक प्रतिष्ठा में सुधार होता है.

शनि से जुड़े दोष जैसे साढ़ेसाती, ढैया या शनि की अशुभ दशा होने पर भगवान शिव की विधिवत पूजा करने की सलाह दी जाती है. शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने से शनि के कष्ट कम होते हैं. साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी विशेष फलदायी माना गया है.

राहु की दशा में व्यक्ति को मानसिक तनाव, भ्रम और अस्थिरता का सामना करना पड़ता है. ऐसे में शिव पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक से राहत मिल सकती है. वहीं केतु के अशुभ प्रभाव में गणेश जी के साथ शिव की आराधना करना शुभ माना गया है.

धार्मिक ग्रंथ Bhavishya Purana के अनुसार भगवान शिव को कई प्रकार के पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं, जैसे कनेर, धतूरा, शमी, कमल, चमेली, नागकेसर, बेला, पलाश और बेलपत्र आदि. ये सभी पुष्प शिव को प्रिय माने जाते हैं और इन्हें अर्पित करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. वहीं केतकी, केवड़ा, सेमल, अनार और कुछ अन्य पुष्प भगवान शिव को नहीं चढ़ाने चाहिए.

सोमवार और प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. प्रदोष काल, जो संध्या और रात्रि के बीच का समय होता है, उसमें किया गया पूजन अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस समय भगवान शिव की आराधना करने से संतान, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

इसके अलावा कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवलिंग का दूध से अभिषेक और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तथा अष्टमी को घी और मधु से स्नान कराने का भी विशेष महत्व है. धूप में घी युक्त गुग्गुल जलाकर पूजा करने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग दान करना, गौ सेवा करना, एकांत स्थान में शिव पूजा करना और मंदिरों में भजन-कीर्तन करना भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के प्रभावी उपाय माने गए हैं.

ज्योतिषीय दृष्टि से यदि किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों का प्रकोप अधिक हो, तो भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप के माध्यम से न केवल इन कष्टों को कम किया जा सकता है, बल्कि जीवन में शांति, संतुलन और सफलता भी प्राप्त की जा सकती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-