जबलपुर. भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों, विशेषकर ट्रैक मेंटेनर्स, कीमैन और पेट्रोलमैन के लिए प्राइवेसी और व्यक्तिगत अधिकारों के मोर्चे पर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. रेलवे बोर्ड ने एक कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए स्पष्ट आदेश जारी किया है कि अब किसी भी रेल कर्मचारी की लोकेशन ट्रैक करने के लिए उनके निजी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कतई नहीं किया जाएगा. बोर्ड ने कड़े लहजे में निर्देश दिए हैं कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत जीवन और उनकी गोपनीयता में तकनीक के माध्यम से की जा रही इस तांक-झांक को तत्काल प्रभाव से रोका जाए. यह निर्णय उन लाखों ग्राउंड स्टाफ के लिए संजीवनी बनकर आया है, जो दिन-रात पटरियों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं और पिछले लंबे समय से अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंतित थे.
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से भारतीय रेल के विभिन्न मंडलों में फील्ड स्टाफ पर अधिकारियों द्वारा यह अनुचित दबाव बनाया जा रहा था कि वे अपनी ड्यूटी के दौरान अपने निजी मोबाइल फोन में थर्ड पार्टी या निजी ट्रैकिंग एप इंस्टॉल करें. इस व्यवस्था के कारण कर्मचारियों के भीतर भारी असंतोष और आक्रोश पनप रहा था. कर्मचारियों का तर्क बेहद स्पष्ट और वाजिब था कि निजी फोन में उनकी व्यक्तिगत जानकारी, परिवार की तस्वीरें, वित्तीय डेटा और निजी चैट्स सुरक्षित होती हैं. किसी भी बाहरी ऐप के जरिए उनकी हर गतिविधि और स्थान पर लगातार नजर रखना न केवल मानवाधिकारों का हनन है, बल्कि उनकी प्राइवेसी का भी सीधा उल्लंघन है. इसी विरोध और यूनियन की मांगों को संज्ञान में लेते हुए रेलवे बोर्ड ने बीते दिनों एक आधिकारिक आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है.
रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में यह साफ कर दिया है कि गश्त की निगरानी और ड्यूटी की रिपोर्टिंग के लिए रेलवे प्रशासन को स्वयं के आधिकारिक जीपीएस डिवाइस उपलब्ध कराने चाहिए. किसी भी कर्मचारी को उसके निजी फोन पर ट्रैकिंग एप चलाने के लिए मजबूर करना एक गलत प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे देश भर के सभी रेल मंडलों में तुरंत बंद किया जाना चाहिए. बोर्ड का मानना है कि रेलवे द्वारा प्रदान किए गए आधिकारिक उपकरणों का उपयोग करने से न केवल कर्मचारियों की गोपनीयता बरकरार रहेगी, बल्कि इससे प्राप्त होने वाला डेटा भी अधिक सुरक्षित, सटीक और विश्वसनीय होगा. निजी फोन के इस्तेमाल से डेटा लीक होने का खतरा भी बना रहता था, जिसे अब इस आदेश के माध्यम से समाप्त कर दिया गया है.
वेस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज यूनियन सहित विभिन्न रेल संगठनों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है. कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों और उनके सम्मान की जीत है. अब फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को अधिकारियों के उस मानसिक दबाव से मुक्ति मिलेगी, जिसमें उन्हें हर समय अपने फोन की लोकेशन ऑन रखने और ट्रैकिंग ऐप के जरिए निगरानी में रहने को विवश किया जाता था. इस आदेश के लागू होने के बाद अब रेलवे प्रशासन को अनिवार्य रूप से सरकारी जीपीएस उपकरण मुहैया कराने होंगे, जिससे न केवल कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी बल्कि कर्मचारियों का कार्य के प्रति मनोबल भी बढ़ेगा. जबलपुर सहित पूरे देश के रेल गलियारों में बोर्ड के इस कदम की सराहना की जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

