माउंट एवरेस्ट पर 165 करोड़ का सनसनीखेज इंश्योरेंस घोटाला, ट्रैकर्स को बीमार बनाकर वसूले जाते थे करोड़ों

माउंट एवरेस्ट पर 165 करोड़ का सनसनीखेज इंश्योरेंस घोटाला, ट्रैकर्स को बीमार बनाकर वसूले जाते थे करोड़ों

प्रेषित समय :21:15:28 PM / Thu, Apr 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

काठमांडू। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest से जुड़ा एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। नेपाल पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि एक संगठित गिरोह विदेशी ट्रैकर्स और पर्वतारोहियों को जानबूझकर बीमार बनाकर करोड़ों रुपये का फर्जी इंश्योरेंस क्लेम वसूल रहा था। इस पूरे मामले में करीब 20 मिलियन डॉलर यानी लगभग 165 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें ट्रैकिंग गाइड, हेलीकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पतालों की मिलीभगत सामने आई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह बेहद सुनियोजित और खतरनाक तरीके से काम करता था। ट्रैकिंग के दौरान गाइड पर्यटकों के खाने में जानबूझकर बेकिंग सोडा जैसी चीजें मिला देते थे, जिससे पर्यटकों की तबीयत बिगड़ने लगती थी। उन्हें उल्टी, जी मिचलाना और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती थीं। ऊंचाई पर होने के कारण ये लक्षण सामान्य ‘एल्टीट्यूड सिकनेस’ जैसे लगते थे, जो कि एक गंभीर और जानलेवा स्थिति मानी जाती है। ऐसे में डर के कारण पर्यटक तुरंत रेस्क्यू के लिए तैयार हो जाते थे।

जैसे ही पर्यटक बीमार पड़ता, उसे तत्काल इमरजेंसी हेलीकॉप्टर से नीचे लाने का दबाव बनाया जाता था। इस प्रक्रिया में गिरोह से जुड़े हेलीकॉप्टर ऑपरेटर भारी-भरकम बिल बनाते थे। कई मामलों में यह खर्च लाखों से करोड़ों रुपये तक पहुंच जाता था, जिसे बाद में इंश्योरेंस कंपनियों से क्लेम के रूप में वसूला जाता था। इस तरह एक सुनियोजित तरीके से पर्यटकों की जान को खतरे में डालकर आर्थिक लाभ कमाया जा रहा था।

घोटाले का दूसरा चरण तब शुरू होता था जब बीमार पर्यटकों को अस्पताल या क्लीनिक ले जाया जाता था। जांच में सामने आया है कि कई अस्पताल और मेडिकल सेंटर भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे। वहां मरीजों की स्थिति को जानबूझकर गंभीर बताया जाता था और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार की जाती थीं। इन रिपोर्टों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों से इलाज और रेस्क्यू के नाम पर भारी रकम वसूली जाती थी। इस पूरे नेटवर्क ने मिलकर एक ऐसा सिस्टम तैयार कर लिया था, जिसमें हर स्तर पर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था।

नेपाल पुलिस ने इस मामले की महीनों तक गहन जांच की, जिसके बाद राजधानी Kathmandu में कड़ा एक्शन लिया गया। काठमांडू जिला अदालत में कुल 32 लोगों के खिलाफ संगठित अपराध और धोखाधड़ी के आरोप दर्ज किए गए हैं। इनमें ट्रैकिंग एजेंसियों के मालिक, हेलीकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पतालों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। मार्च की शुरुआत में 9 आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जबकि 23 अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। इससे पहले जनवरी में तीन बड़ी रेस्क्यू एजेंसियों के 6 अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

अभियोजन पक्ष ने इस मामले को गंभीर आर्थिक अपराध बताते हुए आरोपियों से 1.51 अरब नेपाली रुपये यानी लगभग 95 करोड़ रुपये के जुर्माने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करने का मामला भी है। इस तरह की घटनाएं न केवल पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि पूरे देश की छवि को भी प्रभावित करती हैं।

इस घोटाले के सामने आने के बाद नेपाल के पर्यटन उद्योग पर गहरा असर पड़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने नेपाल जाने वाले ट्रैकर्स का बीमा करने से इनकार करना शुरू कर दिया है। ‘ट्रैवलर्स असिस्ट’ जैसी बड़ी कंपनियों ने साफ कर दिया है कि जब तक सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक वे इस क्षेत्र में बीमा सेवाएं नहीं देंगी। इससे एवरेस्ट और अन्य ट्रैकिंग रूट्स पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना नेपाल के लिए एक बड़ी चेतावनी है। एवरेस्ट पर चढ़ाई करना हर पर्वतारोही का सपना होता है, लेकिन इस तरह के घोटाले उस सपने को डर में बदल सकते हैं। अब पर्यटक यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि जिस गाइड पर वे अपनी जान की जिम्मेदारी सौंपते हैं, वही उनके साथ धोखा कर सकता है।

नेपाल सरकार और पर्यटन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ट्रैकिंग और रेस्क्यू सिस्टम में पारदर्शिता लाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 माउंट एवरेस्ट से जुड़ा यह घोटाला केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि भरोसे के साथ किया गया विश्वासघात है। इसने वैश्विक स्तर पर यह संदेश दिया है कि पर्यटन उद्योग में पारदर्शिता और सुरक्षा कितनी जरूरी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नेपाल इस संकट से कैसे उबरता है और अपने पर्यटन क्षेत्र में विश्वास को फिर से कैसे बहाल करता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-