कबाड़ से कमाई का कमाल, पश्चिम मध्य रेलवे ने 361 करोड़ कमा कर बनाया रिकॉर्ड

कबाड़ से कमाई का कमाल, पश्चिम मध्य रेलवे ने 361 करोड़ कमा कर बनाया रिकॉर्ड

प्रेषित समय :21:19:16 PM / Fri, Apr 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक अनोखा और चौंकाने वाला रिकॉर्ड कायम किया है। आमतौर पर बेकार समझे जाने वाले कबाड़ को आय के बड़े स्रोत में बदलते हुए रेलवे ने 361 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। यह उपलब्धि न केवल रेलवे के संसाधन प्रबंधन की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही रणनीति से अनुपयोगी वस्तुओं को भी आर्थिक मजबूती का आधार बनाया जा सकता है।

रेलवे के महाप्रबंधक प्रमोद कुमार खत्री ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने बीते वर्ष कबाड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। पुराने और अनुपयोगी रेल सामग्री, जैसे स्क्रैप मेटल, जर्जर कोच, बेकार मशीनरी और अन्य निष्प्रयोज्य उपकरणों को व्यवस्थित तरीके से चिन्हित कर उनकी नीलामी की गई। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाते हुए रेलवे ने अधिकतम मूल्य प्राप्त करने की दिशा में काम किया।

खत्री ने बताया कि यह कमाई किसी एक बार की प्रक्रिया का परिणाम नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष चलाए गए विशेष अभियान का नतीजा है। रेलवे के विभिन्न डिवीजनों को निर्देश दिए गए थे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पड़े कबाड़ की पहचान करें और उसे जल्द से जल्द निपटान की प्रक्रिया में लाएं। इस अभियान के तहत बड़ी मात्रा में पुराने लोहे, उपकरणों और अनुपयोगी संसाधनों को हटाया गया, जिससे न केवल राजस्व में वृद्धि हुई बल्कि रेलवे परिसरों में जगह भी खाली हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से रेलवे को दोहरा लाभ हुआ है। एक ओर जहां अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ, वहीं दूसरी ओर स्टेशनों, यार्ड और वर्कशॉप में साफ-सफाई और सुव्यवस्था भी बेहतर हुई है। लंबे समय से जमा कबाड़ हटने से परिचालन में भी सुविधा बढ़ी है और दुर्घटनाओं की आशंका में कमी आई है।

पश्चिम मध्य रेलवे का यह मॉडल अन्य रेलवे जोनों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। यदि इसी तरह देशभर में कबाड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए, तो रेलवे को हर साल बड़ी मात्रा में अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि स्क्रैप का पुनर्चक्रण औद्योगिक उपयोग में लाया जा सकता है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में इस प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाया जाएगा। ई-ऑक्शन और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए कबाड़ निपटान को और पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की योजना है।

पश्चिम मध्य रेलवे की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि संसाधनों का सही उपयोग और प्रभावी प्रबंधन किसी भी संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है। कबाड़ से करोड़ों की कमाई कर रेलवे ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो, तो बेकार चीजें भी बड़े फायदे का सौदा बन सकती हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-