जबलपुर. मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की पहली प्रदेश कार्यकारिणी सूची जारी कर दी गई है. यह सूची अलका लाम्बा की सहमति के बाद घोषित की गई है, जिसमें प्रदेश भर की सक्रिय महिला नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. इस घोषणा को संगठन विस्तार और आगामी चुनावों की तैयारी के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
नई कार्यकारिणी में जबलपुर को भी प्रमुख स्थान दिया गया है. शहर की सक्रिय महिला नेत्री प्रियंका सोनी को संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति न केवल उनके संगठनात्मक योगदान को मान्यता देती है, बल्कि जबलपुर में महिला कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता को भी दर्शाती है. इसके साथ ही ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, रीवा, सतना, कटनी, सिंगरौली, उज्जैन, मंदसौर और सागर जैसे जिलों की महिला नेताओं को भी कार्यकारिणी में शामिल कर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है.
कार्यकारिणी में वरिष्ठ पदों पर अनुभवी चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है. उपाध्यक्ष पद के लिए ज्योति सिंह, मनीषा रावत, शांति भालेश्वर और यासमीन शेरानी को नियुक्त किया गया है. वहीं महासचिव पद पर आरती सिंह, गीता सिंह परिहार, हेमलता सिंह, रजनी वर्मा, सौम्या रंधेलिया और मधु शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन सभी पदाधिकारियों को संगठन में समन्वय स्थापित करने और भविष्य की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है.
संगठनात्मक विस्तार के तहत सचिव स्तर पर भी कई नए और ऊर्जावान चेहरों को मौका दिया गया है. कुमुदनी सिंह, कृष्णा सिंह परिहार, रचना कुशवाह, माधवी नरवरिया, प्राची शुक्ला और लक्ष्मी सिंह परिहार जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं. इन नियुक्तियों से यह स्पष्ट होता है कि संगठन युवा नेतृत्व को आगे लाने और जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है.
राजनीतिक दृष्टि से इस नई कार्यकारिणी का गठन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किए गए हैं. संगठन ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाएं, स्थानीय मुद्दों को उठाएं और महिला मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करें.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संगठनात्मक बदलाव महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा हैं. इससे न केवल पार्टी की जमीनी मजबूती बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश की राजनीति में महिला कांग्रेस की भूमिका भी अधिक प्रभावी हो सकती है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई टीम किस तरह संगठन को मजबूत करती है और चुनावी मैदान में क्या असर डालती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

