मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज में तलाक को लेकर बनी पारंपरिक सोच को चुनौती दी है। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी के तलाक को दुख नहीं बल्कि सम्मान और नई शुरुआत के रूप में मनाते हुए उसे ढोल-नगाड़ों और फूलों के साथ घर वापस लाया। इस अनोखे कदम ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रिश्तों से ज्यादा जरूरी इंसान की खुशियां और आत्मसम्मान होता है।
जानकारी के मुताबिक, प्रणीता शर्मा नाम की महिला ने वर्षों तक एक असफल और तनावपूर्ण विवाह में रहने के बाद आखिरकार कानूनी रूप से अलग होने का फैसला लिया। 4 अप्रैल को फैमिली कोर्ट से तलाक मिलने के बाद उनके घर लौटने का दृश्य किसी त्योहार से कम नहीं था। कोर्ट के बाहर ही परिवार के लोग ढोल बजाकर नाचे, मिठाइयां बांटी गईं और प्रणीता का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।
इस दौरान परिवार के सदस्यों ने काले रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी, जिस पर “I Love My Daughter” लिखा हुआ था। यह न सिर्फ बेटी के प्रति उनके समर्थन का प्रतीक था, बल्कि समाज के लिए भी एक मजबूत संदेश था कि बेटी की खुशियों से बढ़कर कुछ नहीं। उनके पिता ज्ञानेंद्र शर्मा, जो एक सेवानिवृत्त जज हैं, ने खुद बेटी का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी पहली जिम्मेदारी अपनी बेटी को खुश रखना है।
परिवार के अनुसार, प्रणीता की शादी दिसंबर 2018 में एक आर्मी मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि उन्हें मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से परेशान किया गया। यहां तक कि बेटे के जन्म के बाद भी हालात नहीं सुधरे। कई सालों तक रिश्ते को बचाने की कोशिश करने के बाद प्रणीता ने आखिरकार अपने आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तलाक लेने का फैसला किया।
प्रणीता शर्मा वर्तमान में शास्त्री नगर स्थित एक ज्यूडिशियल एकेडमी में फाइनेंस डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्टग्रेजुएशन किया है। परिवार का कहना है कि इस कठिन दौर में उनकी शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उन्हें मजबूत बनाए रखा। साथ ही, माता-पिता का पूरा समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।
ज्ञानेंद्र शर्मा ने स्पष्ट कहा कि जिस सम्मान के साथ उन्होंने अपनी बेटी की शादी की थी, उसी सम्मान के साथ उसे वापस घर लाना उनका कर्तव्य है। उन्होंने समाज में प्रचलित उस सोच की भी आलोचना की, जिसमें माना जाता है कि शादी के बाद बेटी का मायका केवल आपात स्थिति में ही होता है। उन्होंने कहा कि बेटियां कोई बोझ नहीं हैं, बल्कि परिवार का समान हिस्सा हैं और उनकी खुशी सर्वोपरि होनी चाहिए।
इस मौके पर प्रणीता ने भी अन्य महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं किसी भी तरह के उत्पीड़न का सामना कर रही हैं, उन्हें चुप नहीं रहना चाहिए बल्कि आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने शिक्षा और आत्मनिर्भरता को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए कहा कि यही चीजें महिलाओं को सही फैसले लेने की ताकत देती हैं।
मेरठ के इस परिवार की पहल ने यह दिखा दिया है कि समाज धीरे-धीरे बदल रहा है। जहां पहले तलाक को असफलता और शर्म से जोड़ा जाता था, वहीं अब इसे आत्मसम्मान और नई शुरुआत के रूप में भी देखा जाने लगा है। इस घटना ने यह साबित किया है कि जब परिवार साथ खड़ा होता है, तो कोई भी मुश्किल आसान हो सकती है।
यह अनोखा जश्न सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक नई सोच का प्रतीक बन गया है। यह संदेश देता है कि रिश्तों की मजबूरी से ज्यादा जरूरी इंसान की गरिमा और खुशहाल जीवन है, और हर बेटी को अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार होना चाहिए।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

