केरल विधानसभा चुनाव 2026: ओपिनियन पोल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कांटे की टक्कर, सत्ता की चाबी किसके पास?

केरल विधानसभा चुनाव 2026: ओपिनियन पोल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कांटे की टक्कर, सत्ता की चाबी किसके पास?

प्रेषित समय :22:20:28 PM / Mon, Apr 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

केरल विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बज चुकी है और 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक पहले आए ओपिनियन पोल के नतीजों ने राज्य के राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुँचा दिया है. CNN-News18 पर 6 अप्रैल को जारी 'वोट वाइब' के ताजा सर्वे के अनुसार, राज्य की सत्ता पर काबिज वामपंथी गठबंधन (LDF) और विपक्षी कांग्रेस नीत गठबंधन (UDF) के बीच 'नेक-टू-नेक' यानी बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है. सर्वे के आंकड़े इशारा कर रहे हैं कि केरल की जनता इस बार किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत देने के बजाय एक बेहद कड़े मुकाबले की ओर बढ़ रही है, जहां जीत का अंतर महज 1 प्रतिशत के वोट शेयर पर टिका हुआ है.

140 सदस्यीय केरल विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 है. ओपिनियन पोल के अनुमानों के मुताबिक,

 विपक्षी यूडीएफ (UDF) को 64 से 74 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF) को 63 से 73 सीटें मिल सकती हैं. 

वहीं, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को 1 से 5 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. 

वोट शेयर के मामले में भी स्थिति लगभग बराबरी की है; यूडीएफ को 39.7 प्रतिशत और एलडीएफ को 38.7 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है.

 केवल 1 सीट और 1 प्रतिशत वोट की यह मामूली बढ़त दर्शाती है कि केरल में 'सत्ता विरोधी लहर' और 'वापसी की उम्मीद' के बीच की लड़ाई कितनी पेचीदा हो गई है.

मुख्यमंत्री पद की पसंद के मामले में वर्तमान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अभी भी 31.3 प्रतिशत लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं,

लेकिन यूडीएफ के वी.डी. सतीशन 29.5 प्रतिशत के साथ उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं. 

सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर जनता की राय बंटी हुई है. जहाँ 40 प्रतिशत लोग सरकार के प्रदर्शन को 'अच्छा' मान रहे हैं, वहीं 43 प्रतिशत लोगों ने इसे 'खराब' श्रेणी में रखा है, जो पिनाराई विजयन सरकार के लिए चिंता का विषय हो सकता है. सर्वे में यह भी सामने आया है कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद के कई चेहरों का होना पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुँचा सकता है, जिसे लेकर 36.2 प्रतिशत मतदाताओं ने अपनी राय व्यक्त की है.

इस बार के चुनाव में जनता के लिए पांच बड़े मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण बनकर उभरे हैं. 

महंगाई 17 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा मुद्दा है, जबकि बेरोजगारी 16.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है, जो विशेषकर युवाओं के लिए बड़ी चिंता का विषय है. इनके अलावा भ्रष्टाचार, नशाखोरी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी जनता में नाराजगी देखी जा रही है.

 एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि लगभग 49.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि राज्य में पिछले चुनावों की तुलना में धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ा है. अब देखना यह होगा कि 9 अप्रैल को होने वाले मतदान में केरल की जनता 'ऊंट को किस करवट' बैठाती है और सत्ता की चाबी किसे सौंपती है.

ओपिनियन पोल के मुख्य आंकड़े:

कुल सीटें: 140 (बहुमत के लिए 71 जरूरी)

UDF (अनुमानित सीटें): 64-74 (वोट शेयर: 39.7%)

LDF (अनुमानित सीटें): 63-73 (वोट शेयर: 38.7%)

NDA (अनुमानित सीटें): 01-05

मुख्य मुद्दे: महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और नशाखोरी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-