भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी आज एक बड़े आंदोलन का केंद्र बन गई, जहां शिक्षा विभाग के एक नए आदेश ने हजारों शिक्षकों के भविष्य पर तलवार लटका दी है. टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के नए नियमों के खिलाफ प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव किया. प्रदर्शनकारी शिक्षकों का गुस्सा इतना तीव्र था कि उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जब तक यह "काला आदेश" वापस नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन थमेगा नहीं. शिक्षकों का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ लेकर ऐसे नियम थोप रही है, जिससे दशकों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों की नौकरी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है.
विवाद की मुख्य जड़ डीपीआई भोपाल द्वारा जारी वह हालिया आदेश है, जिसमें कहा गया है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से अधिक का समय शेष है, उन्हें आगामी दो वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा. इस आदेश में सबसे डराने वाला प्रावधान यह है कि यदि कोई शिक्षक निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है. इसी शर्त ने प्रदेश के शैक्षणिक गलियारों में खलबली मचा दी है. शिक्षकों का तर्क है कि आरटीई कानून 2009 में आया और टीईटी 2011 से अनिवार्य हुई, जबकि प्रदेश में हजारों शिक्षक इससे पहले से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पुराने शिक्षकों पर नए नियम लागू करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है.
इस आंदोलन की गूंज सिर्फ भोपाल तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के जिला मुख्यालयों और कलेक्ट्रेट कार्यालयों में शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे. अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले करीब 12 शिक्षक संगठन एक मंच पर आ गए हैं, जिनका दावा है कि इस आदेश से प्रदेश के लगभग 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, जिनमें से 70 हजार शिक्षक तो सीधे तौर पर नौकरी जाने के खतरे की जद में हैं. शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय ऐसी कोई शर्त नहीं थी, इसलिए अब उन्हें इस अग्निपरीक्षा में झोंकना सरासर गलत है.
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार इस आदेश को तत्काल निरस्त करे और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखे. आंदोलनकारी संगठनों ने अब इस लड़ाई को और तेज करने का मन बना लिया है. आगामी 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की तैयारी की गई है, जिसमें स्थानीय विधायकों, मंत्रियों और सांसदों को घेरकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा. शिक्षकों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल टीईटी ही नहीं, बल्कि डिजिटल अटेंडेंस और सेवा वृद्धि जैसे मुद्दों पर भी अब पीछे हटने वाले नहीं हैं. सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच खिंची यह खींचतान अब एक बड़े सियासी और प्रशासनिक संकट का रूप लेती जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

