ईरान ने सख्त शर्तें रखीं, अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता पर गहराया गंभीर कूटनीतिक संकट

ईरान ने सख्त शर्तें रखीं, अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता पर गहराया गंभीर कूटनीतिक संकट

प्रेषित समय :22:21:17 PM / Fri, Apr 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Iran और United States के बीच प्रस्तावित वार्ता पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं. तेहरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत शुरू करने से पहले उसकी कुछ अहम शर्तें पूरी करनी होंगी, जिससे कूटनीतिक प्रयासों की राह और मुश्किल होती दिख रही है.

ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक लेबनान में संघर्ष विराम लागू नहीं होता और ईरान की जमी हुई संपत्तियां रिलीज नहीं की जातीं, तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि ये दोनों मुद्दे पहले से सहमत एजेंडे का हिस्सा हैं और इन पर प्रगति के बिना वार्ता शुरू नहीं हो सकती.

इस बीच क्षेत्र में हालात और जटिल हो गए हैं. Lebanon में संघर्षविराम को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं. ईरान का कहना है कि संघर्षविराम में इजराइल की सैन्य कार्रवाई भी शामिल होनी चाहिए, जबकि Israel और अमेरिका का मानना है कि यह रोक हिज़्बुल्लाह जैसे संगठनों पर लागू नहीं होती. इस असहमति ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है और संघर्षविराम के टूटने का खतरा बढ़ गया है.

इसी बीच अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए Islamabad पहुंचने की तैयारी में है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि अमेरिका सकारात्मक बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते ईरान ईमानदारी से वार्ता में शामिल हो.

JD Vance ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईरान बातचीत में गंभीरता नहीं दिखाता, तो अमेरिका का रुख सख्त हो सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए ‘ओपन हैंड’ की नीति अपनाए हुए है, लेकिन किसी भी तरह की चालबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इस वार्ता में अमेरिकी टीम के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner भी शामिल हो सकते हैं, जो इस कूटनीतिक प्रयास को महत्वपूर्ण बना देता है. वहीं ईरान की ओर से भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच एक अस्थायी संघर्षविराम लागू है, जो दो सप्ताह के लिए तय किया गया था. इस दौरान दोनों पक्षों ने तनाव कम करने की कोशिश की, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी नाजुक बनी हुई है.

 ईरान द्वारा रखी गई शर्तों ने अमेरिका-ईरान वार्ता को एक अनिश्चित मोड़ पर ला खड़ा किया है. जहां एक तरफ कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर शर्तों और मतभेदों के कारण बातचीत की राह में बड़ी बाधाएं खड़ी हो गई हैं. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या दोनों पक्ष इन मुद्दों पर सहमति बनाकर आगे बढ़ पाते हैं या फिर यह वार्ता भी अधर में लटक जाती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-