बाल मन की अभिव्यक्ति: 4 कविताएं

बाल मन की अभिव्यक्ति: 4 कविताएं

प्रेषित समय :19:55:43 PM / Sat, Apr 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बच्चों का मन बेहद कोमल, सृजनशील और भावनाओं से भरा होता है. उनकी सोच में सादगी के साथ-साथ एक नई दुनिया बसती है, जहाँ प्रकृति की सुंदरता, अपने गांव का अपनापन, समाज के प्रति जागरूकता और अपने सपनों को पूरा करने की चाह साफ झलकती है.

इस कविता-संग्रह में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विद्यार्थियों की रचनाएँ शामिल हैं, जो उनकी मासूम कल्पनाओं, संवेदनशील विचारों और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं. कहीं तितली की रंगीन दुनिया है, कहीं गांव की सादगी और शांति, तो कहीं समाज में लड़कियों की स्थिति पर मजबूत आवाज.

ये कविताएँ न केवल बच्चों की रचनात्मकता को उजागर करती हैं, बल्कि हमें यह भी याद दिलाती हैं कि छोटे-छोटे सपनों में ही एक बड़े और बेहतर भविष्य की नींव छिपी होती है.

तितली रानी

हिमानी बिष्ट
कक्षा 8
सुराग, उत्तराखंड

तितली रानी प्यारी रानी,
फूलों पर बैठी रहती,
रंग-बिरंगी होती तितली,
कितनी सुंदर होती तुम,
मैं भी तितली जैसी होती,
फूलों पर फिर बैठी रहती,
जिस फूल पर बैठे तितली,
उस फूल की माली तितली,
देख तितली मन खिल जाए,
हर बगिया में हरियाली छाए..

हमारा गांव

चांदनी
कक्षा - 9th
बगदानू, उत्तराखंड

कितना प्यारा गांव हमारा,
यहाँ के लोग कितने प्यारे,
मन के कितने अच्छे सारे,
खेतों में फसल लहलहाए,
और हरे भरे पेड़ ये सारे,
पहाड़ कितने सुंदर हमारे,
नदी, झरने कलकल करते सारे,
कितना सुख यहाँ हमें है मिलता,
शुद्ध हवा और मीठे जल सारे,
सच में गांव हमारा कितना प्यारा
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तुम गलत नहीं हो

शिवानी पाठक
उम्र - 16 साल
उतरौडा, उत्तराखंड

इस दुनिया में तुम अभी भी उलझे हो क्या?
पुराने विचारों से अभी भी तुम जुड़े हो क्या?
यह सारी बातें मुझसे तो तुम दूर ही रखो,
लड़की हो न तुम, फिर तो तुम ही गलत हो,
इसी सोच में अभी तक जकड़े हो क्या?
मत भूलो लड़की भी घर की रोशनी है,
उसमें भी हिम्मत और संजीविनी है,
दूसरों के लिए अपने सपनों को तोड़ कर,
हर दर्द को सहन कर, मुस्कुराती है,
फिर भी दुनिया उसे नजरअंदाज करती है,
नाजुक नहीं, किसी पैरों के नीचे दबी नहीं,
लड़कियों, तुम किसी की नफरत नहीं हो,
फिर तुम क्या, एक दिन यही दुनिया बोलेगी,
कि लड़की तुम कभी गलत नहीं हो..
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जिदंगी संवारना चाहती हूँ

प्रिया
कक्षा - 4
सुराग, उत्तराखंड

हाँ मैं भी तो खूब पढ़ना चाहती हूँ,
समाज में आगे बढ़ना चाहती हूं,
कुप्रथाओं से जंग लड़ना चाहती हूँ,
ख्वाब को हकीकत बनाना चाहती हूँ,
हाँ, मैं भी तो कुछ करना चाहती,
अपनी जिंदगी को संवारना चाहती हूँ,
जीवन में कुछ नया करना चाहती हूं,
मैं भी पढ़ना लिखना चाहती हूँ..