हाईकोर्ट ने महिला सहकर्मी को घूरने वाले आरोपी को दी क्लीन चिट, इसलिए नहीं चलेगा मुकदमा

हाईकोर्ट ने महिला सहकर्मी को घूरने वाले आरोपी को दी क्लीन चिट, इसलिए नहीं चलेगा मुकदमा

प्रेषित समय :18:58:43 PM / Sat, Apr 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी महिला सहकर्मी के शरीर की ओर घूरना नैतिक दृष्टि से अनुचित और असभ्य व्यवहार हो सकता है, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 354सी के तहत ताक-झांक का आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता. न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकल पीठ ने इस फैसले में कानून की सीमाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि कानून को अपनी सुविधा के अनुसार खींचा नहीं जा सकता.

मामला एक इंश्योरेंस कंपनी के एग्जीक्यूटिव से जुड़ा है. कंपनी की एक महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि मीटिंग के दौरान आरोपी उनके चेहरे की बजाय उनके शरीर, खासकर सीने की ओर घूरता था और कुछ अप्रिय टिप्पणियां भी करता था. महिला ने इन आरोपों के आधार पर आईपीसी की धारा 354सी के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी. हालांकि, कोर्ट ने जांच के बाद पाया कि आरोपों में इतनी गंभीरता नहीं है कि आपराधिक मुकदमा चलाया जा सके.

फैसले ने सबको चौंकाया

न्यायमूर्ति बोरकर ने अपने फैसले में कहा, भले ही आरोप सही माने जाएं कि आरोपी ने मीटिंग के दौरान महिला के सीने को घूरा था, फिर भी यह ताक-झांक की परिभाषा में नहीं आता. धारा 354सी विशेष रूप से उन स्थितियों के लिए है जहां कोई व्यक्ति किसी महिला के निजी अंगों को देखता है जबकि वे खुले हों, या महिला शौचालय जैसे निजी स्थान पर हो, या कोई यौन संबंधी निजी क्रिया कर रही हो जो सामान्यत: सार्वजनिक नहीं होती. कार्यालय जैसे पेशेवर माहौल में घूरना इस श्रेणी में नहीं आता.'

कंपनी ने आरोपी को कर दिया था बरी

कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति ने पहले ही आरोपी को आरोपों से बरी कर दिया था. ऐसे में एफआईआर को जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-