25 साल पहले 10 रुपए के लिए रेलवे की नौकरी से बर्खास्त बुकिंग क्लर्क को हाईकोर्ट से मिला न्याय, विजिलेंस कार्रवाई को बताया अवैध

25 साल पहले 10 रुपए के लिए रेलवे की नौकरी से बर्खास्त बुकिंग क्लर्क को हाईकोर्ट से मिला न्याय, विजिलेंस कार्रवाई को बताया अवैध

प्रेषित समय :10:21:10 AM / Mon, Apr 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. रेलवे के बुकिंग क्लर्क को सिर्फ 10 रुपए अधिक लेने के आरोप में विजिलेंस टीम ने पकड़कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की. रेल प्रशासन ने उक्त बुकिंग क्लर्क को नौकरी से बर्खास्त कर दिया. अब 25 साल बाद रेलकर्मी को न्याय मिला है. हाईकोर्ट ने विजिलेंस की कार्रवाई को अवैध बताते हुए बुकिंग क्लर्क को दोषमुक्त कर दिया है.

यह पूरा मामला जनवरी 2001 का है. बुकिंग क्लर्क नारायण नायर ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पहले केंद्रीय प्रशासनिक प्रधिकरण (केट) और फिर जबलपुर हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी और आखिरकार 25 साल बाद गत शनिवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विजिलेंस की कार्रवाई की गलत पाया. मामले पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए विजिलेंस विभाग की पूरी कार्रवाई को अवैध और नियमों के खिलाफ ठहरा दिया. जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच के इस फैसले पर 25 साल बाद नारायण नायर की बहाली का रास्ता साफ हुआ है.

श्रीधाम स्टेशन पर ड्यूटी पर थे, 31 रुपए वापस करने थे, 21 रुपए लौटाए

4 जनवरी 2002 को रेलवे में पदस्थ बुकिंग क्लर्क नारायण नायर की श्रीधाम स्टेशन पर टिकट काउंटर में ड्यूटी लगी थी. इसी दौरान विजिलेंस की टीम आ गई. जांच के दौरान एक शख्स सामने आया, जिसका कहना था कि नारायण नायर को 31 रुपए वापस करने थे, पर उन्होंने 21 रुपए लौटाए. विजिलेंस टीम का कहना था कि नारायण नायर के पास 450 रुपए अतिरिक्त थे, जिस पर उनका कहना था कि यह रुपए पत्नी की दवा लाने के लिए रखे थे. इसके अलावा 778 रुपए अतिरिक्त थे, जो कि बाद में सिर्फ 7 रुपए पाए गए.

पहले सस्पेंड किया, फिर बर्खास्त

विजिलेंस टीम ने नारायण नायर पर चार केस के तहत कार्रवाई करते हुए जांच शुरु कर दी. जांच के दौरान नारायण नायर को दोषी पाते हुए पहले निलंबित कर दिया गया, उसके बाद 15 मार्च 2002 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. नारायण नायर ने विजिलेंस की कार्रवाई के विरोध में वरिष्ठ अधिकारी, मंडल रेलवे प्रबंधक (डीआरएम) के समक्ष अपील की, कोई आरोप भी सिद्ध नहीं हुआ,इसके बाद भी उन्हें वहां से राहत नहीं मिली, तो वर्ष 2002 में ही केंद्रीय प्रशासनिक प्रधिकरण (कैट) में केस दायर किया.

विजिलेंस की जांच में मिली गंभीर खामियां

केंद्रीय प्रशासनिक प्रधिकरण (कैट) ने मामले पर सुनवाई करते हुए 16 जुलाई 2004 को नारायण नायर को राहत देते हुए उनकी सेवा से हुई बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया. केट के आदेश को रेलवे ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए 2005 में अपील दायर की थी. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान टीटी नारायण नायर की ओर से अधिवक्ता आकाश चौधरी ने दलीलें रखी. लगातार कई सालों तक चले इस केस में आखिरकार अप्रैल 2026 में फैसला आया, जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच सुनवाई के बाद दिए फैसले में विजिलेंस की जांच में गंभीर खामियां पाईं.

कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी द्वारा अभियोजन की भूमिका निभाने को गलत बताया और याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया जो कि अवैध माना गया है. बुकिंग क्लर्क नारायण नायर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कैट के फैसले को सही ठहराते हुए रेलवे की अपील खारिज कर दी है. इस फैसले के बाद टीटी नारायण नायर की बहाली का रास्ता साफ हो गया है. उन्हें पिछले 25 सालों के अन्य लाभ भी मिल सकते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-