वेस्ट एशिया संकट का असर हैदराबाद में आम की कीमतों में भारी गिरावट के संकेत, निर्यात घटने से बढ़ेगी सप्लाई

वेस्ट एशिया संकट का असर हैदराबाद में आम की कीमतों में भारी गिरावट के संकेत, निर्यात घटने से बढ़ेगी सप्लाई

प्रेषित समय :21:44:46 PM / Wed, Apr 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हैदराबाद . आर्थिक और कृषि बाजार से जुड़ी खबर सामने आ रही है, जहां आने वाले दिनों में आम की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके पीछे प्रमुख कारण वेस्ट एशिया में जारी तनाव और संकट को माना जा रहा है, जिसने भारत से होने वाले आम के निर्यात को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। व्यापारियों और निर्यातकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घटने और अनिश्चितता बढ़ने के कारण बड़ी मात्रा में आम अब घरेलू बाजार की ओर रुख कर रहा है, जिससे कीमतों में कमी आना लगभग तय माना जा रहा है।

हर साल भारत, खासकर तेलंगाना और आसपास के राज्यों से बड़ी मात्रा में आम का निर्यात किया जाता है। इसमें संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहती है। आंकड़ों के अनुसार, भारत से औसतन करीब 30 हजार मीट्रिक टन आम का निर्यात होता है, जिसमें से 10 हजार मीट्रिक टन से अधिक हिस्सा केवल यूएई को भेजा जाता है। लेकिन इस साल वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण वहां मांग में भारी गिरावट आई है।

निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा हालात में न केवल मांग कम हुई है, बल्कि निर्यात की लागत भी काफी बढ़ गई है। परिवहन और फ्रेट चार्ज में इजाफा होने से अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भी आम भेजना महंगा हो गया है। यही वजह है कि कुल निर्यात में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। इस स्थिति ने व्यापारियों को इंतजार की मुद्रा में ला दिया है और वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

इस बीच, घरेलू बाजार में आम की आवक बढ़ने लगी है, जिससे कीमतों पर दबाव बनना शुरू हो गया है। हैदराबाद के बाजारों में फिलहाल बेनीशान किस्म के आम 150 से 200 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहे हैं, जबकि रसाल आम 100 से 150 रुपये प्रति किलो के दाम पर उपलब्ध हैं। हालांकि, जैसे-जैसे निर्यात और घटेगा और सप्लाई बढ़ेगी, कीमतों में और गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है।

व्यापारियों की चिंता यह भी है कि जो प्रीमियम क्वालिटी के आम अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार किए जाते हैं, क्या वे घरेलू बाजार में उसी कीमत पर बिक पाएंगे या नहीं। यदि ऐसा नहीं होता है, तो किसानों और निर्यातकों दोनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासकर वे किसान जो बेहतर गुणवत्ता के उत्पादन के लिए अधिक लागत लगाते हैं, उनके लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

हैदराबाद को तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के विभिन्न जिलों से आम की आपूर्ति होती है, जिससे यहां बाजार में कई किस्मों के आम उपलब्ध रहते हैं। इस साल उत्पादन भी अच्छा माना जा रहा है, ऐसे में निर्यात में गिरावट का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ना तय है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेस्ट एशिया का संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल आम के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिकी हुई हैं, क्योंकि उसी के आधार पर आगे की कीमतों और व्यापार की दिशा तय होगी।

मौजूदा परिस्थितियां उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी हो सकती हैं क्योंकि उन्हें कम कीमत पर आम मिलने की संभावना है, लेकिन किसानों और निर्यातकों के लिए यह समय चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले कुछ हफ्तों में बाजार की स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी, जब यह तय होगा कि निर्यात में गिरावट कितनी लंबी चलती है और उसका असर कीमतों पर कितना गहरा पड़ता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-