ओपनएआई ने लॉन्च किया सीमित एक्सेस वाला साइबर सुरक्षा एआई मॉडल हैकर्स और डिफेंडर्स के बीच बढ़ेगी टेक्नोलॉजी रेस

ओपनएआई ने लॉन्च किया सीमित एक्सेस वाला साइबर सुरक्षा एआई मॉडल हैकर्स और डिफेंडर्स के बीच बढ़ेगी टेक्नोलॉजी रेस

प्रेषित समय :21:53:47 PM / Wed, Apr 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक बड़ा और अहम कदम उठाते हुए OpenAI ने अपने नए साइबर सुरक्षा मॉडल को सीमित पहुंच के साथ जारी करने की घोषणा की है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस अत्याधुनिक एआई सिस्टम को केवल चुनिंदा और सत्यापित पार्टनर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके और साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जा सके। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एआई तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ साइबर हमलों और डिजिटल खतरों की आशंका भी तेजी से बढ़ रही है।

ओपनएआई का यह कदम सीधे तौर पर उसके प्रतिस्पर्धी Anthropic के हालिया फैसले के बाद सामने आया है, जिसने भी अपने नए एआई मॉडल को सीमित उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित रखा है। एंथ्रोपिक के मॉडल ने हजारों सॉफ्टवेयर कमजोरियों का पता लगाया था, जिससे यह साफ हो गया कि एआई अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बेहद शक्तिशाली भूमिका निभा सकता है। हालांकि, यही क्षमता इसे खतरनाक भी बना सकती है, अगर इसका इस्तेमाल गलत हाथों में चला जाए।

ओपनएआई ने अपने इस नए मॉडल का नाम GPT-5.4-Cyber रखा है, जिसे खास तौर पर साइबर डिफेंडर्स के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार यह मॉडल “साइबर-पर्मिसिव” तरीके से प्रशिक्षित किया गया है, जिससे सुरक्षा विशेषज्ञ बिना किसी रुकावट के अपने सिस्टम की कमजोरियों को पहचान सकें और उन्हें समय रहते ठीक कर सकें। यह मॉडल कंपनी के Trusted Access for Cyber (TAC) प्रोग्राम के तहत उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें हजारों सत्यापित व्यक्तिगत विशेषज्ञ और सैकड़ों सुरक्षा टीमें शामिल हैं।

ओपनएआई ने अपने बयान में कहा कि उसका उद्देश्य इन टूल्स को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इनका गलत इस्तेमाल न हो। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि साइबर सुरक्षा के इस नए दौर में केवल कुछ चुनिंदा संस्थाओं को ही सुरक्षा का अधिकार देना व्यावहारिक नहीं है, बल्कि ज्यादा से ज्यादा भरोसेमंद उपयोगकर्ताओं को सक्षम बनाना जरूरी है।

दूसरी ओर, एंथ्रोपिक का नया मॉडल Claude Mythos भी काफी चर्चा में है। इस मॉडल ने कई ऐसे सॉफ्टवेयर बग्स और कमजोरियों को उजागर किया है जो वर्षों से छिपे हुए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कुछ खामियां दशकों पुरानी थीं, जो अब जाकर सामने आई हैं। इस खुलासे ने टेक इंडस्ट्री और फाइनेंशियल सेक्टर दोनों में चिंता बढ़ा दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में अमेरिका के बड़े बैंकों के प्रमुखों ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के साथ बैठक कर इस तकनीक के संभावित खतरों पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के एआई टूल्स का गलत इस्तेमाल हुआ तो यह वैश्विक वित्तीय प्रणाली और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

सिलिकॉन वैली में पिछले कुछ महीनों से जनरेटिव एआई की बढ़ती क्षमताओं को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। ये मॉडल न केवल कोड लिख सकते हैं बल्कि उसकी जांच भी कर सकते हैं, जिससे वे सॉफ्टवेयर में छिपी कमजोरियों को आसानी से खोज सकते हैं। हालांकि, डेवलपर्स लगातार ऐसे सुरक्षा उपाय भी जोड़ रहे हैं ताकि ये सिस्टम किसी भी दुर्भावनापूर्ण गतिविधि में सहायता न करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के इस तेजी से विकसित होते क्षेत्र में अब एक नई “टेक्नोलॉजी रेस” शुरू हो चुकी है, जहां एक तरफ सुरक्षा विशेषज्ञ इन टूल्स का इस्तेमाल सिस्टम को मजबूत करने के लिए करेंगे, वहीं दूसरी ओर हैकर्स भी इन्हीं तकनीकों का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में कंपनियों द्वारा सीमित एक्सेस की रणनीति अपनाना एक संतुलित कदम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, ओपनएआई का यह नया साइबर सुरक्षा मॉडल एआई तकनीक के उपयोग और नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तरह के सीमित एक्सेस मॉडल्स साइबर सुरक्षा को कितना मजबूत बना पाते हैं और क्या वे संभावित खतरों को समय रहते रोकने में सफल होते हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-