महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी का तीखा हमला, माताओं बहनों से मांगी माफी, विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी का तीखा हमला, माताओं बहनों से मांगी माफी, विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

प्रेषित समय :22:32:48 PM / Sat, Apr 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति में बड़ा घमासान देखने को मिला है. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित करते हुए बिल के लोकसभा में पारित न हो पाने पर गहरा दुख जताया और देश की महिलाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी. अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के कारण देश की नारी शक्ति को उनका अधिकार नहीं मिल सका.

अपने भाषण की शुरुआत करते हुए Narendra Modi ने कहा कि वह देश की माताओं, बहनों और बेटियों से सीधे संवाद करने आए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को आरक्षण देने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते यह बिल पास नहीं हो सका. उन्होंने इस स्थिति के लिए खेद व्यक्त करते हुए कहा कि वह देश की महिलाओं से माफी मांगते हैं.

प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ पार्टियां देशहित से ऊपर पार्टी हित को रखती हैं. उन्होंने Indian National Congress, Dravida Munnetra Kazhagam, Trinamool Congress और Samajwadi Party का नाम लेते हुए कहा कि इन दलों की राजनीति के कारण महिलाओं को उनका हक नहीं मिल पाया. उनके अनुसार, जब पार्टी का हित देश के हित से बड़ा हो जाता है, तो ऐसे ही परिणाम सामने आते हैं.

संसद में बिल गिरने के बाद विपक्षी दलों के जश्न पर भी Narendra Modi ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जब करोड़ों महिलाएं इस बिल के पारित होने की उम्मीद लगाए बैठी थीं, तब कुछ दलों के नेताओं द्वारा तालियां बजाना और डेस्क थपथपाना महिलाओं के सम्मान के खिलाफ था. उन्होंने इसे महिलाओं के आत्मसम्मान पर चोट बताया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी की महिलाएं जागरूक हैं और वे सब कुछ देख और समझ रही हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो दल महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ खड़े हैं, उन्हें जनता के सामने जवाब देना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं इस तरह के व्यवहार को कभी नहीं भूलेंगी.

अपने संबोधन में Narendra Modi ने महिला आरक्षण बिल को एक ‘महायज्ञ’ बताया और कहा कि यह देश की आधी आबादी को उनका अधिकार देने का प्रयास था. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस महायज्ञ को बाधित किया और महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया.

प्रधानमंत्री ने परिवारवाद की राजनीति पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल महिलाओं के सशक्त होने से डरते हैं. उनके अनुसार, यदि महिलाएं आगे बढ़ेंगी तो परिवार आधारित राजनीति कमजोर पड़ जाएगी, यही कारण है कि ये दल महिलाओं को अवसर नहीं देना चाहते.

उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर महिलाएं पहले ही अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं और अब वे संसद और विधानसभाओं में भी अपनी भागीदारी चाहती हैं. ऐसे में उन्हें रोकना देश के विकास को रोकने जैसा है.

प्रधानमंत्री के इस संबोधन के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है. जहां एक ओर सरकार इसे महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष के रुख को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है.