NRI प्रॉपर्टी खरीदना होगा आसान 1 अक्टूबर से TAN की बाध्यता खत्म प्रक्रिया बनेगी सरल और तेज

NRI प्रॉपर्टी खरीदना होगा आसान 1 अक्टूबर से TAN की बाध्यता खत्म प्रक्रिया बनेगी सरल और तेज

प्रेषित समय :21:56:50 PM / Sat, Apr 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

 नई  दिल्ली .भारत में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा और राहत भरा बदलाव सामने आया है, जिसके तहत अब एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होने जा रही है। केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से ऐसे मामलों में टैक्स डिडक्शन एंड कलेक्शन अकाउंट नंबर यानी TAN लेना अनिवार्य नहीं होगा। इस फैसले से देश में रहने वाले खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक केवल एक ट्रांजैक्शन के लिए भी जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।

अब तक लागू नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति भारत में रहने वाले दूसरे व्यक्ति से प्रॉपर्टी खरीदता था तो उसे TAN की आवश्यकता नहीं होती थी, लेकिन यदि वही प्रॉपर्टी किसी एनआरआई से खरीदी जाती थी तो खरीदार के लिए TDS काटने के लिए TAN लेना जरूरी होता था। इस प्रक्रिया में अलग से आवेदन करना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों दोनों की खपत होती थी। इसे आमतौर पर जटिल और गैर-जरूरी औपचारिकता के रूप में देखा जाता था, खासकर उन खरीदारों के लिए जो केवल एक बार प्रॉपर्टी खरीद रहे होते थे।

नए नियम के तहत अब व्यक्तिगत खरीदारों और हिंदू अविभाजित परिवारों को TAN लेने से छूट दे दी गई है। वे अब अपने PAN के माध्यम से ही टैक्स जमा कर सकेंगे, जैसा कि सामान्य प्रॉपर्टी लेन-देन में किया जाता है। इस बदलाव से पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और उपयोगकर्ता के अनुकूल बन जाएगी, जिससे रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता और सुगमता दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि TDS खत्म कर दिया गया है। प्रॉपर्टी खरीदते समय खरीदार को पहले की तरह ही टैक्स काटना और उसे समय पर सरकार के खाते में जमा करना होगा। टैक्स की दरें भी पहले जैसी ही रहेंगी। यदि संपत्ति पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होता है तो लगभग 12.5 प्रतिशत टैक्स लागू होगा, जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा।

सरकार का कहना है कि इस बदलाव से लेन-देन की पारदर्शिता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। खरीदार और विक्रेता दोनों के PAN के माध्यम से पूरे ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रखा जाएगा और यह जानकारी संबंधित टैक्स फॉर्म्स और वार्षिक सूचना विवरण में उपलब्ध रहेगी। इससे निगरानी और अनुपालन की प्रक्रिया पहले की तरह मजबूत बनी रहेगी।

हालांकि इस फैसले से खरीदारों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन एनआरआई विक्रेताओं के लिए कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत TDS पूरे ट्रांजैक्शन मूल्य पर काटा जाता है, न कि केवल लाभ पर। इसका मतलब यह है कि विक्रेता की एक बड़ी राशि कुछ समय के लिए फंस सकती है, जब तक कि वह टैक्स रिफंड के रूप में वापस नहीं मिल जाती। यह स्थिति उनके कैश फ्लो पर असर डाल सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो तत्काल फंड की जरूरत में प्रॉपर्टी बेचते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे एनआरआई से जुड़ी प्रॉपर्टी डील्स में तेजी आ सकती है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही, यह निर्णय सरकार के उस प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाया जा रहा है।

    1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला यह नया नियम प्रॉपर्टी बाजार में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल खरीदारों के लिए प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में लेन-देन की गति भी बढ़ेगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस बदलाव का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और क्या इससे वास्तव में निवेश को बढ़ावा मिलता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-