जबलपुर. पनागर के मटामर ग्राम पंचायत में गौ-सेवा और संरक्षण के नाम पर एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जिसने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2021-22 में करीब 35.22 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर एक आधुनिक गौशाला का निर्माण किया गया था, जिसका उद्देश्य बेसहारा गौवंश को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना था। लेकिन आज, निर्माण के कुछ वर्षों बाद ही इस गौशाला की स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि इसके मुख्य द्वार पर ताला लटक रहा है और भीतर सन्नाटा पसरा है। यह इमारत अब गौवंश के काम आने के बजाय भ्रष्टाचार की मूक गवाह बन गई है।
गौशाला के बाहर का दृश्य बेहद हृदय विदारक है। जहां एक ओर सरकारी कागजों में लाखों रुपये खर्च कर गौवंश को छत देने का दावा किया गया था, वहीं हकीकत यह है कि आज भी दर्जनों बेसहारा मवेशी सड़क किनारे या पेड़ों की छांव में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी और बेमौसम बारिश के थपेड़े झेल रहे इन बेजुबान जानवरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस दिन से यह गौशाला बनकर तैयार हुई है, तभी से इसके द्वार पर ताला पड़ा रहता है। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि निर्माण कार्य में निम्न स्तरीय सामग्री का उपयोग किया गया और भारी राशि का बंदरबांट कर लिया गया, जिसके कारण आज यह इमारत उपयोग करने योग्य भी नहीं बची है।
इस पूरे मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें गौशाला की बदहाली और गौवंश की दुर्दशा को साफ तौर पर देखा जा सकता है। वीडियो में दिख रहा है कि इमारत के भीतर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसके चलते मवेशियों को अंदर रखना जोखिम भरा हो सकता है। पनागर क्षेत्र में गौशालाओं की इस दुर्दशा ने शासन के 'गौ-संरक्षण' के दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों से इस संबंध में गुहार लगाई है, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं मिला। गौशाला के रखरखाव और चारे-पानी के लिए आने वाली राशि का क्या हो रहा है, इसका जवाब देने के लिए आज कोई भी जिम्मेदार अधिकारी तैयार नहीं है।
यह महज एक गौशाला के बंद होने का मामला नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और बेजुबान पशुओं के साथ हो रहे अन्याय का एक गंभीर उदाहरण है। लाखों रुपये के इस खेल में जवाबदेही तय होना अत्यंत आवश्यक है। क्या इस गौशाला का निर्माण केवल ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था? प्रशासन की चुप्पी और पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस पूरे मामले में बड़ी मिलीभगत है। अब देखना यह है कि क्या इस सच्चाई के सामने आने के बाद प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर पनागर की यह गौशाला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर खंडहर में तब्दील हो जाएगी। स्थानीय नागरिक अब उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं ताकि इस लाखों के खेल में शामिल दोषियों को बेनकाब किया जा सके।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

