जयपुर. राजस्थान में आरएएस अधिकारी और एसडीएम काजल मीणा को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. यह कार्रवाई एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा 16 अप्रैल को की गई, जिसमें उनके साथ दो अन्य लोगों को भी पकड़ा गया. इस मामले ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक होनहार अधिकारी की छवि को भी झटका दिया है.
काजल मीणा राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) 2024 बैच की अधिकारी हैं और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग में टॉपर रही हैं. वे एक प्रतिभाशाली छात्रा रही हैं और उन्होंने आईआईटी मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में कदम रखा और प्रशिक्षण के दौरान टोंक में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में कार्य किया. बाद में उन्हें प्रतापगढ़ जिले के सुहागपुरा में उपखंड अधिकारी (SDO) के पद पर नियुक्त किया गया और हाल ही में करौली जिले में एसडीएम के रूप में पदस्थ थीं.
एसीबी के अनुसार, काजल मीणा पर एक व्यक्ति से भूमि विवाद से जुड़े अंतिम डिक्री जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि अधिकारी उनके रीडर के माध्यम से उसे लगातार परेशान कर रही थीं और रिश्वत की मांग कर रही थीं. शुरुआत में एक लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में घटाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया.
शिकायत की पुष्टि के बाद एसीबी की सवाई माधोपुर टीम ने जाल बिछाया और काजल मीणा को उनके रीडर दिनेश कुमार सैनी और वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़ के साथ 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया. बताया गया कि इसमें 50 हजार रुपये स्वयं अधिकारी के लिए और 10 हजार रुपये रीडर के लिए थे.
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को काजल मीणा के पास से करीब 4 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए हैं, जिसे संदिग्ध मानते हुए जांच के दायरे में लिया गया है. इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है.
गिरफ्तारी के बाद कार्मिक विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए काजल मीणा को निलंबित कर दिया है. यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि काजल मीणा ने अपने करियर की शुरुआत एक मेधावी छात्रा और टॉपर के रूप में की थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि प्रशासनिक सेवा में आने का उनका उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है, लेकिन अब उन्हीं पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं.
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पूरी प्रक्रिया का सत्यापन किया गया और उसके बाद ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि इसमें और भी लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि प्रशासनिक सेवाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही कितनी जरूरी है.