तिरुवनंतपुरम। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz पर बढ़ते संकट के बीच वैश्विक शिपिंग और सप्लाई चेन पर असर साफ दिखाई दे रहा है। इसी अनिश्चितता के माहौल में भारत का Vizhinjam Port एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है। केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में स्थित यह पोर्ट अब अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
Vizhinjam Port भारत का पहला गहरे पानी वाला कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है, जिसकी परिकल्पना 1991 में की गई थी। लगभग ₹8,900 करोड़ की लागत से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत बने इस पोर्ट का संचालन Adani Group द्वारा किया जा रहा है, जबकि इसमें बहुमत हिस्सेदारी केरल सरकार की है।
हॉर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। Iran द्वारा लगाए गए प्रतिबंध और United States की नौसैनिक गतिविधियों के चलते जहाजों की आवाजाही में बाधाएं आई हैं। ऐसे में भारत का यह पोर्ट वैकल्पिक मार्ग और ट्रांसशिपमेंट सुविधा देकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आंशिक राहत प्रदान कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रांसशिपमेंट पोर्ट वह होता है जहां कंटेनरों को एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया जाता है, जिससे वे अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंच सकें। इस प्रक्रिया से बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय कार्गो का प्रबंधन संभव होता है और समय तथा लागत दोनों में बचत होती है। Vizhinjam Port इसी क्षेत्र में अपनी क्षमता के कारण तेजी से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
इस पोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी रणनीतिक लोकेशन मानी जा रही है। यह यूरोप, पर्शियन गल्फ और पूर्वी एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से मात्र 10 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय जहाज यहां रुकना पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां एक समय में करीब 100 जहाजों की लाइन लगने की स्थिति बन चुकी है।
पोर्ट की तकनीकी क्षमता भी इसे खास बनाती है। यहां 18 मीटर तक की गहराई (डीप ड्राफ्ट) उपलब्ध है, जिससे यह अल्ट्रा-लार्ज कंटेनर शिप्स को भी संभाल सकता है। भविष्य में इसे और विस्तार देने की योजना भी है, जिससे 18,000 से अधिक टीईयू क्षमता वाले जहाजों को भी आसानी से संभाला जा सकेगा। इसकी सालाना क्षमता करीब 5 मिलियन टीईयू बताई जाती है।
इस पोर्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मई 2025 में किया था। तब से लेकर अब तक यह तेजी से विकास की राह पर है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है। हाल ही में कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने भी इसकी सराहना करते हुए इसे “भारत का ट्रांसशिपमेंट समाधान” बताया। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले महीने इस पोर्ट ने 61 जहाजों को संभाला और 1 मिलियन टीईयू का आंकड़ा रिकॉर्ड समय में पार किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक संकट के बीच Vizhinjam Port न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बन सकता है। यह देश की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका को भी नई ऊंचाई दे सकता है।
हॉर्मुज संकट के चलते जहां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है, वहीं केरल का यह पोर्ट एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। आने वाले समय में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर तब जब दुनिया वैकल्पिक और सुरक्षित व्यापार मार्गों की तलाश में है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

