छत्तीसगढ़ में कचरा प्रबंधन पर सख्ती: बड़े संस्थानों के लिए ऑन-साइट निपटान अनिवार्य

छत्तीसगढ़ में कचरा प्रबंधन पर सख्ती: बड़े संस्थानों के लिए ऑन-साइट निपटान अनिवार्य

प्रेषित समय :15:59:40 PM / Tue, Apr 21st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए अब बड़े कचरा उत्पादकों पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं. होटलों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और बड़ी आवासीय कॉलोनियों को अपने परिसर में ही गीले कचरे के निपटान की व्यवस्था करना अनिवार्य कर दिया गया है.

नए प्रावधानों के तहत ऐसे संस्थानों को कंपोस्टिंग या बायोगैस प्लांट जैसी सुविधाएं विकसित करनी होंगी. ऐसा न करने की स्थिति में उन्हें संबंधित नगरीय निकाय से विशेष अनुमति लेनी होगी और अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना देना पड़ सकता है. यह नियम एक अप्रैल से प्रभावी हो चुका है और इसके पालन को लेकर निगरानी भी तेज कर दी गई है.

नियमों के सख्त पालन के निर्देश

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और नगरपालिका अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं. पहली बार जिला कलेक्टरों को भी इस व्यवस्था की निगरानी में शामिल किया गया है, जिससे जवाबदेही और बढ़ेगी.

कलेक्टर करेंगे ऑडिट, मुख्य सचिव को रिपोर्ट

राज्य के सभी शहरी निकायों में कचरा प्रबंधन से जुड़ी अधोसंरचना का ऑडिट अब जिला कलेक्टरों द्वारा किया जाएगा. इसकी विस्तृत रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी जाएगी. सरकार का मानना है कि जो संस्थान अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें उसके वैज्ञानिक निपटान की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए.

चार स्तर पर कचरे का पृथक्करण अनिवार्य

नए नियमों के तहत कचरे को स्रोत स्तर पर ही चार श्रेणियों- गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष अपशिष्ट—में अलग करना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सकेगी.

लापरवाही पर अधिकारी भी होंगे जवाबदेह

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के पालन में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे. शुरुआती चरण में नियम लागू न करने पर जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि लगातार उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.

एमआरएफ और नई सुविधाओं पर जोर

नगरीय निकायों को मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) स्थापित करने, चार-कक्षीय कचरा संग्रहण वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने और पुराने डंपसाइट्स के निपटान के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. एमआरएफ केंद्रों में सूखे कचरे की छंटाई और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की रिकवरी की जाती है.

सरकार का मानना है कि इन कदमों से न केवल शहरों में कचरे का बोझ कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-