कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान संपन्न होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं. राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को भवानीपुर क्षेत्र में एक पदयात्रा निकालकर चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया. यह पदयात्रा भवानिपुर के कांसरीपाड़ा शीतला मंदिर से शुरू होकर पाटुआ पारा क्रॉसिंग तक निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी समर्थक और स्थानीय लोग शामिल हुए. ममता बनर्जी की इस सक्रियता को चुनाव के अगले चरणों के लिए रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है.
पदयात्रा के दौरान ममता बनर्जी ने लोगों से मुलाकात की, उनका अभिवादन स्वीकार किया और क्षेत्र के विभिन्न धार्मिक स्थलों का भी दौरा किया. उन्होंने जैन मंदिर में भी जाकर दर्शन किए, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उनकी राजनीति सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की है. इस पूरे कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो उनके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए, जो तेजी से वायरल हो रहे हैं और समर्थकों के बीच उत्साह बढ़ा रहे हैं.
इसी बीच, पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान गुरुवार शाम 6 बजे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. मतदान के दौरान सभी मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके. खड़गपुर के सेर्सा स्टेडियम स्थित मतदान केंद्र पर मतदान समाप्ति के समय तक सभी मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर चुके थे और शाम होते-होते वहां मतदान पूरी तरह थम गया. इसके बाद मतदान केंद्र के मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया, जो दिनभर चली चुनावी प्रक्रिया के समापन का संकेत था.
मतदान खत्म होने के बाद अब सभी उम्मीदवारों की किस्मत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में बंद हो चुकी है. चुनाव आयोग द्वारा इन ईवीएम को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जा रहा है. पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा रही है ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे. राजनीतिक दलों की नजरें अब मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि जनता ने किसे अपना समर्थन दिया है.
इस बार पहले चरण में मतदान का प्रतिशत बेहद प्रभावशाली रहा है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शाम 5 बजे तक राज्य में 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि राज्य के मतदाताओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर गहरी जागरूकता और उत्साह है. विभिन्न जिलों में मतदान का प्रतिशत भी उल्लेखनीय रहा, जहां दक्षिण दिनाजपुर ने 93.12 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक मतदान दर्ज किया. इसके बाद कूचबिहार में 92.07 प्रतिशत, बीरभूम में 91.55 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में 91.36 प्रतिशत और जलपाईगुड़ी में 91.20 प्रतिशत मतदान हुआ.
इसके अलावा झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे जिलों में भी 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य में चुनावी भागीदारी के उच्च स्तर को दर्शाता है. बांकुड़ा और मालदा में भी मतदान प्रतिशत 89 के आसपास रहा, जबकि दार्जिलिंग में अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद 86.49 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो अपने आप में एक मजबूत आंकड़ा है. यदि पिछले विधानसभा चुनाव 2021 से तुलना करें, तो उस समय राज्य में कुल 85.2 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार पहले चरण में ही यह आंकड़ा उससे अधिक पहुंच गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदान होना राजनीतिक दलों के लिए संकेत है कि जनता इस बार बदलाव या स्थिरता को लेकर स्पष्ट राय बना चुकी है. यही कारण है कि सभी पार्टियां अब अगले चरणों के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं. ममता बनर्जी की पदयात्रा को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां वह सीधे जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित कर रही हैं और अपने समर्थन आधार को मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं.
अब राज्य में चुनाव का अगला चरण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि शेष 142 सीटों पर 29 मई को मतदान होना है. यह चरण चुनावी परिणामों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है. वहीं, पहले चरण की मतगणना 4 मई को की जाएगी, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि शुरुआती दौर में किस पार्टी को बढ़त मिली है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ता मतदान प्रतिशत और नेताओं की सक्रियता इस चुनाव को बेहद रोचक और प्रतिस्पर्धात्मक बना रही है. आने वाले दिनों में चुनावी रैलियों, जनसभाओं और रोड शो की संख्या और बढ़ने की संभावना है, जिससे राज्य का राजनीतिक तापमान और चढ़ सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

