चेन्नई. तमिलनाडु में लोकतंत्र का महापर्व गुरुवार को अत्यंत उत्साह और अभूतपूर्व भागीदारी के साथ संपन्न हुआ। राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 84.51 प्रतिशत की ऐतिहासिक भागीदारी दर्ज की है। सुबह सात बजे शुरू हुई मतदान प्रक्रिया, जो शाम छह बजे तक अनवरत जारी रही, के दौरान राज्य के 5.73 करोड़ पात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर सूबे की भावी राजनीति की दिशा तय कर दी है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, यह आंकड़े शाम पांच बजे तक के हैं और अंतिम डेटा समेकन के बाद प्रतिशत में थोड़ा और सुधार हो सकता है, लेकिन स्पष्ट है कि तमिलनाडु के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा मतदान रहा है। राज्य भर के 33,133 स्थानों पर बनाए गए 75,064 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे, जिसके चलते कहीं से भी कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और मतदान पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा।
इस बार के चुनावी मुकाबले में राज्य के राजनीतिक समीकरण बेहद दिलचस्प और उलझे हुए नजर आए। मुख्य मुकाबला एक तरफ सत्तारूढ़ कांग्रेस और डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाले 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' तथा दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी और एआईएडीएमके (AIADMK) के गठबंधन के बीच देखा गया। हालांकि, इस बार के चुनाव ने तब नया मोड़ ले लिया जब अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) ने चुनावी अखाड़े में कदम रखा। विजय की एंट्री ने पारंपरिक दो-ध्रुवीय मुकाबले को एक बहुकोणीय संघर्ष में बदल दिया है, जिससे चुनावी पंडितों के लिए भी हार-जीत का सटीक आकलन करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। कुल 4,023 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं और उनकी मेहनत का परिणाम 4 मई को मतगणना के बाद सामने आएगा, जो राज्य की आगामी सरकार की तस्वीर साफ कर देगा।
मतदान के दौरान सुबह से ही बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। शहरी और ग्रामीण इलाकों में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। चेन्नई हो या करूर, मदुरै हो या कोयंबटूर, हर जगह एक अलग ही चुनावी जोश देखने को मिला। करूर जिले में सबसे ज्यादा 91.86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि चेन्नई में 83.03 प्रतिशत और कोयंबटूर में 84.35 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान के दिन राज्य की राजनीति के दिग्गजों और फिल्मी सितारों ने भी अपनी भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चेन्नई में उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के साथ पहुंचकर अपना वोट डाला। वहीं, एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सलेम में अपना मताधिकार का प्रयोग किया। इसके अलावा, अभिनेता रजनीकांत, कमल हासन, विजय और अजीत कुमार जैसे प्रभावशाली नामों को भी सुबह जल्दी मतदान केंद्रों के बाहर देखा गया, जिससे युवाओं में भी मतदान के प्रति उत्साह का संचार हुआ।
चुनाव के दौरान कुछ शुरुआती रुझानों में क्षेत्रीय भिन्नता भी नजर आई, जहां तिरुप्पुर जैसे जिलों में मतदान की रफ्तार काफी तेज रही। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन चुनाव आयोग की सतर्कता और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने इसे प्रभावी तरीके से संभाला। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन जो कोलाथुर सीट से अपनी साख बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं उदयनिधि स्टालिन चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी से चुनावी भाग्य आजमा रहे हैं। दूसरी ओर, एडप्पादी के. पलानीस्वामी का मुकाबला सलेम जिले की अपनी पारंपरिक सीट एडप्पादी से है, जहां से वे पुनः अपनी पकड़ साबित करने की कोशिश में हैं। अभिनेता विजय की दो सीटों, पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व से उम्मीदवारी ने इस चुनाव को और भी अधिक चर्चा का विषय बना दिया है, क्योंकि वे पहली बार इस तरह से राजनीतिक मंच पर अपनी पार्टी की ताकत आजमा रहे हैं।
यह चुनाव केवल सीटों का गणित नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु के भविष्य के लिए एक वैचारिक संघर्ष भी है। डीएमके-कांग्रेस गठबंधन जहां अपनी उपलब्धियों और सेक्युलर मूल्यों के दम पर वापसी की उम्मीद कर रहा है, वहीं भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन केंद्र सरकार की नीतियों और राज्य के विकास के एजेंडे को लेकर जनता के बीच गया है। दूसरी ओर, विजय की TVK ने जिस तरह से युवाओं और नए मतदाताओं को आकर्षित किया है, वह उन पारंपरिक दलों के लिए एक नई चुनौती बन गया है जो अब तक अपनी जीत को निश्चित मानकर चल रहे थे। तमिलनाडु की राजनीति में यह चुनाव एक नए दौर की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
अब जबकि सभी 4,023 उम्मीदवारों का भाग्य ईवीएम मशीनों में सुरक्षित बंद हो चुका है, राज्य की जनता अब 4 मई का इंतजार कर रही है। मतदान का इतना उच्च प्रतिशत यह संदेश देने के लिए पर्याप्त है कि तमिलनाडु के मतदाता अब निष्क्रिय रहने के बजाय व्यवस्था परिवर्तन या निरंतरता के लिए पूरी तरह से सक्रिय हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि 84.51 फीसदी मतदान का आंकड़ा किसी भी पार्टी के लिए 'सुनामी' जैसा परिणाम ला सकता है। प्रशासन ने अब सभी ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित पहुँचा दिया है और त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा सुनिश्चित किया गया है। अब राज्य की जनता की नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट हो पाएगा कि तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाएगी और क्या अभिनेता विजय का राजनीति में प्रवेश राज्य की राजनीति का चेहरा पूरी तरह बदल पाएगा। यह चुनाव लोकतंत्र के उस जज्बे को भी सलाम करता है, जहां भीषण गर्मी और अन्य तमाम बाधाओं को दरकिनार करते हुए आम आदमी ने अपने देश और राज्य के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

