छत्तीसगढ़ की बेटी का इसरो में कमाल: कक्षा 9वीं की छात्रा हिमांशी का 'युविका' प्रोग्राम के लिए चयन, देश भर के चुनिंदा बच्चों में बनाई जगह

छत्तीसगढ़ की बेटी का इसरो में कमाल: कक्षा 9वीं की छात्रा हिमांशी का

प्रेषित समय :16:25:15 PM / Tue, Apr 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बालोद. छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव सिवनी की रहने वाली हिमांशी साहू ने अपनी मेधा और जुनून से अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक बड़ी छलांग लगाई है. स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल (SEGES), कन्नेवाडा में कक्षा 9वीं की छात्रा हिमांशी का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रतिष्ठित 'युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम' (YUVIKA) के लिए हुआ है.

हिमांशी ने इस चयन प्रक्रिया में पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है.

देशभर से चुने गए मात्र 456 छात्र
इसरो के इस विशेष कार्यक्रम के लिए चयन प्रक्रिया बेहद कठिन और ऑनलाइन आधारित थी. इसमें देशभर से लाखों छात्रों ने हिस्सा लिया, जिनमें से केवल 456 विद्यार्थियों का चयन किया गया है. बालोद जिले से हिमांशी इकलौती छात्रा हैं जिन्होंने इस सूची में अपनी जगह सुनिश्चित की है. इस प्रोग्राम के तहत हिमांशी को इसरो के वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology) को करीब से समझने का मौका मिलेगा.

कलेक्टर ने किया सम्मानित, सराही प्रतिभा
हिमांशी की इस असाधारण उपलब्धि पर बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने उन्हें संयुक्त जिला कार्यालय में आमंत्रित कर सम्मानित किया. कलेक्टर ने हिमांशी को प्रशस्ति पत्र, शॉल और श्रीफल भेंट करते हुए कहा कि यह सफलता जिले के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी. इस अवसर पर हिमांशी के माता-पिता का भी सम्मान किया गया.

बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं हिमांशी
हिमांशी शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं. उनकी शैक्षणिक यात्रा उनकी मेहनत की गवाही देती है:

कक्षा 5वीं: 90 प्रतिशत अंक.

कक्षा 8वीं: 96 प्रतिशत अंक.

खेल और अन्य गतिविधियाँ: हिमांशी ताइक्वांडो में राज्य स्तर पर चयनित हो चुकी हैं और गाइड एवं रेड क्रॉस की सक्रिय सदस्य भी हैं.

"प्रयास कभी बेकार नहीं जाते"
अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए हिमांशी ने कहा:

"मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरा चयन इसरो के लिए हुआ है, मैं बहुत खुश हूँ. मेरा मानना है कि हमें लगातार प्रयास करते रहना चाहिए, क्योंकि प्रयास से ही सफलता का रास्ता खुलता है."

उनकी क्लास टीचर रितु विश्वकर्मा और स्कूल की प्राचार्या ने हिमांशी को स्कूल का गौरव बताया. शिक्षकों के अनुसार, हिमांशी न केवल पढ़ाई और अनुशासन में आगे हैं, बल्कि विज्ञान के विषयों में उनकी रुचि बचपन से ही असाधारण रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-