मुंबई. देश के आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले मुंबई की पत्रकारिता और विशेष रूप से रेलवे सहित परिवहन व इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की रिपोर्टिंग में एक गहरा शून्य पैदा करते हुए फ्री प्रेस जर्नल, मुंबई के एडिटर (ट्रांसपोर्ट एंड इंफ्रा) और टाइम्स ग्रुप के मुंबई मिरर के पूर्व वरिष्ठ संवाददाता कमल मिश्रा का बुधवार सुबह 56 वर्ष की आयु में निधन हो गया. पत्रकारिता जगत में अपनी बेबाक रिपोर्टिंग और ज़मीनी सच्चाई को सामने लाने के लिए पहचाने जाने वाले कमल मिश्रा पिछले कुछ महीनों से एक गंभीर सड़क हादसे के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. नासिक से कल्याण लौटते समय हुए उस भीषण हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं जिससे वे पूरी तरह उबर नहीं पाए. उनके निधन की खबर फैलते ही मुंबई के मीडिया जगत और रेलवे व परिवहन विभागों में शोक की लहर दौड़ गई है.
कमल मिश्रा केवल एक रिपोर्टर नहीं थे बल्कि वे मुंबई की परिवहन व्यवस्था की रग-रग से वाकिफ थे. फ्री प्रेस जर्नल में एडिटर (ट्रांसपोर्ट एंड इंफ्रा) के रूप में अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने रेलवे, बेस्ट बस सेवा और टैक्सियों पर अपनी जो पकड़ बनाई, उसकी मिसाल दी जाती है. इससे पहले मुंबई मिरर (टाइम्स ग्रुप) में अपने कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी कई बड़ी खबरें ब्रेक की थीं. उनकी रिपोर्टिंग की सबसे खास बात उनका फील्ड पर मौजूद रहना था. चाहे रेल पटरी से उतरी हो या कोई बस दुर्घटना हुई हो, कमल मिश्रा सबसे पहले घटना स्थल पर पहुँचने वाले पत्रकारों में शामिल रहते थे. उनकी कार्यशैली का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसी भी रेल दुर्घटना के समय वे खुद पटरियों पर मील तक चलकर यह देखते थे कि तकनीकी खामी कहाँ रह गई. रेलवे बोर्ड के सदस्यों से लेकर ग्राउंड स्टाफ तक उनकी ज़बरदस्त नेटवर्किंग थी.
फ्री प्रेस जर्नल के लिए उनके द्वारा चलाए गए अभियान आज भी मिसाल के तौर पर याद किए जाते हैं. टैक्सी चालकों द्वारा यात्रियों को ले जाने से मना करने के खिलाफ उन्होंने एक साहसिक अभियान चलाया था. इस दौरान वे खुद एक आम यात्री बनकर टैक्सी रुकवाते थे और उनके साथ एक कैमरामैन गुप्त रूप से मौजूद रहता था. यदि टैक्सी चालक मना करता तो वे वाहन नंबर और समय के साथ पूरी रिपोर्ट प्रकाशित करते थे. उनके इस प्रयास का इतना बड़ा असर हुआ कि आरटीओ विभाग को हरकत में आना पड़ा और बड़ी संख्या में नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर जुर्माना लगाया गया. उनके संपादकीय नेतृत्व में इंफ्रास्ट्रक्चर की कई जटिल परियोजनाओं को आम जनता के लिए सरल भाषा में समझाया गया.
उनके सहयोगियों और वरिष्ठ संपादकों ने उन्हें एक अत्यंत दयालु, उदार और कर्मठ इंसान के रूप में याद किया है. एस बालकृष्णन सहित कई वरिष्ठ पत्रकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कमल न केवल एक बेहतरीन पत्रकार थे बल्कि एक ऐसे व्यक्ति थे जो हमेशा अच्छी और जनहित की कहानियाँ करने के लिए उत्सुक रहते थे. उनका जाना मुंबई की पत्रकारिता के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है. उनका जीवन नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक प्रेरणा है कि किस तरह ज़मीन पर उतरकर और लोगों की समस्याओं से सीधे जुड़कर रिपोर्टिंग की जाती है. इस दुखद घड़ी में पूरा पत्रकारिता जगत उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कर रहा है. परिवहन रिपोर्टिंग का वह चेहरा जो हमेशा पटरियों और बस डिपो के आसपास जनता की आवाज़ बनता था, अब हमेशा के लिए शांत हो गया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

