चंबल में फिल्मी स्टाइल में 67 भैंसों की बड़ी लूट, बंदूक की नोक पर चरवाहों को बंधक बनाकर 60 लाख का माल पार

चंबल में फिल्मी स्टाइल में 67 भैंसों की बड़ी लूट, बंदूक की नोक पर चरवाहों को बंधक बनाकर 60 लाख का माल पार

प्रेषित समय :21:43:49 PM / Fri, May 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुरैना.  चंबल अंचल से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पूरे इलाके में पुराने दौर के डकैतों और मवेशी लुटेरों के खौफ को एक बार फिर जिंदा कर दिया है। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात करीब एक दर्जन नकाबपोश हथियारबंद बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में धावा बोलते हुए चरवाहों को बंधक बनाया और उनकी 67 भैंसें लूटकर फरार हो गए। लूटी गई इन भैंसों की कुल कीमत करीब 60 लाख रुपए बताई जा रही है। घटना मुरैना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत जतावर-सिकरौदा गांव की पुलिया के पास स्थित नगर के पुरा इलाके की है जहाँ पहाड़गढ़ से आए किसान अपने मवेशियों के साथ डेरा डाले हुए थे। चंबल क्षेत्र में मवेशी चोरी और लूट की घटनाएं पिछले कुछ सालों से लगभग पूरी तरह शांत हो चुकी थीं लेकिन इस दुस्साहसिक वारदात ने पुलिस प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पूरी घटना का विवरण देते हुए पीड़ित चरवाहों ने बताया कि वे पहाड़गढ़ निवासी किसान रामाधार गुर्जर की करीब 120 भैंसों को लेकर चंबल किनारे चराने के लिए आए थे क्योंकि गर्मियों के मौसम में उनके मूल क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत हो जाती है। हर साल की तरह इस बार भी वे नहर किनारे खेतों पर अपना अस्थाई डेरा जमाए हुए थे। रात के अंधेरे में अचानक एक दर्जन से अधिक हथियारबंद बदमाश वहां आ धमके और उन्होंने सभी चरवाहों के सिर पर बंदूकें तान दीं। बदमाशों ने न केवल चरवाहों को बंधक बनाया बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी देकर शोर मचाने से भी मना कर दिया। चरवाहों को असहाय स्थिति में छोड़कर लुटेरे बड़ी ही आसानी से 67 चुनिंदा भैंसों को अपने साथ हांक ले गए। जाते-जाते बदमाश चरवाहों के मोबाइल फोन, पैसे और बटुए भी छीन ले गए ताकि वे तत्काल किसी को सूचना न दे सकें और पुलिस का पीछा करने का रास्ता बंद हो जाए।

वारदात को अंजाम देने के बाद जब बदमाश आंखों से ओझल हो गए तब जाकर चरवाहों ने हिम्मत जुटाई और शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण खेतों की ओर दौड़े और स्थिति को भांपते हुए तत्काल डायल 112 के माध्यम से पुलिस को सूचना दी गई। रात के अंधेरे में ही पुलिस की टीमें सक्रिय हो गईं लेकिन बदमाशों के पास पर्याप्त समय था जिससे वे बीहड़ के रास्तों का फायदा उठाकर दूर निकल गए। सुबह होते ही जब पुलिस के आला अधिकारियों को घटना की गंभीरता का पता चला तो महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस अधीक्षक समीर सौरभ ने तत्काल निर्देश जारी किए जिसके बाद थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव के नेतृत्व में करीब 70 जवानों की भारी-भरकम टीम का गठन किया गया और बदमाशों के पदचिन्हों का पीछा करना शुरू किया गया।

पुलिस की शुरुआती जांच और पदचिन्हों के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि बदमाश राजस्थान की सीमा की ओर भागे हैं। पुलिस टीमें पीछा करते हुए राजस्थान के नगर गांव तक जा पहुंची हैं जहाँ बदमाशों के छिपे होने की प्रबल संभावना है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केवल एक गांव नहीं बल्कि चंबल अंचल और राजस्थान सीमा से सटे करीब 30 गांवों की घेराबंदी कर दी है। बदमाशों को पकड़ने के लिए अब आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है जहाँ चंबल के दुर्गम बीहड़ों और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में ड्रोन कैमरों से सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों को लेकर बदमाश बहुत दूर नहीं जा सकते और उन्हें कहीं न कहीं नगर गांव के आसपास के जंगलों या बीहड़ों में ही छिपाया गया है।

चंबल अंचल के मवेशी पालकों में इस घटना के बाद से जबरदस्त आक्रोश और डर का माहौल है। किसानों का कहना है कि वे साल भर मेहनत करके इन मवेशियों को पालते हैं और ये उनकी जीविका का मुख्य साधन हैं। 60 लाख रुपए की मवेशी लूटने का मतलब एक किसान परिवार का पूरी तरह से बर्बाद हो जाना है। पीड़ित किसान रामाधार गुर्जर ने बताया कि वह अपनी 120 भैंसों के साथ सुरक्षित स्थान की तलाश में यहाँ आया था लेकिन उसे क्या पता था कि यहाँ उसकी पूरी जमा-पूंजी पर लुटेरों की नजर है। बदमाशों ने जिस तरह से रेकी करके इस वारदात को अंजाम दिया है उससे साफ जाहिर होता है कि वे पेशेवर मवेशी लुटेरे हैं और उन्हें इलाके के रास्तों की पूरी जानकारी थी।

सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव के अनुसार फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान मवेशियों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी पर केंद्रित है। पुलिस राजस्थान पुलिस के साथ भी समन्वय स्थापित कर रही है ताकि सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी को और सख्त किया जा सके। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस मामले में आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की है क्योंकि उनकी पहली प्राथमिकता मवेशियों को जीवित बरामद करना है। पुलिस का तर्क है कि मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है लेकिन टीमें मैदान में काम कर रही हैं। चंबल की इस धरती पर जहाँ डकैत युग की समाप्ति के बाद शांति बहाल हुई थी वहाँ इस तरह की फिल्मी लूट ने एक बार फिर पुराने काले दिनों की यादें ताजा कर दी हैं। अब यह देखना होगा कि आधुनिक संसाधनों से लैस पुलिस की टीम इन नकाबपोश बदमाशों तक कब तक पहुँच पाती है और 60 लाख की भैंसों को वापस ला पाती है या नहीं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-