तमिलनाडु में बहुमत से चूके विजय अब सरकार बनाने की जंग में, सियासी गणित तेज दो बड़े विकल्पों पर टिकी नजरें

तमिलनाडु में बहुमत से चूके विजय अब सरकार बनाने की जंग में, सियासी गणित तेज दो बड़े विकल्पों पर टिकी नजरें

प्रेषित समय :22:08:38 PM / Tue, May 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

डिजिटल डेस्क। Vijay की अगुवाई वाली Tamilaga Vettri Kazhagam ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें दूर रह जाने के कारण सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। अब विजय राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar से मुलाकात करने वाले हैं, जहां उनके सामने सरकार बनाने को लेकर दो अहम विकल्प रखे जा सकते हैं।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, टीवीके ने कुल 108 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि राज्य में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का बहुमत जरूरी है। ऐसे में विजय बहुमत से 10 सीटें पीछे हैं। दूसरी ओर Dravida Munnetra Kazhagam, जिसकी अगुवाई M K Stalin कर रहे हैं, 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही है। AIADMK को 47 सीटें मिली हैं, जबकि Indian National Congress ने 5 सीटों पर जीत हासिल की है।

राज्यपाल से प्रस्तावित मुलाकात के दौरान पहला विकल्प यह हो सकता है कि विजय को समर्थन जुटाने के लिए समय दिया जाए और वे आवश्यक बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करें। सूत्रों के मुताबिक, टीवीके पहले ही कांग्रेस के साथ बातचीत कर रही है, लेकिन कांग्रेस के 5 विधायक जोड़ने के बाद भी पार्टी को बहुमत के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों की भूमिका निर्णायक बन सकती है।

हालांकि, राजनीतिक समीकरण इतने सरल नहीं हैं। चुनावी नियमों के अनुसार विजय ने दो सीटों—पेरम्बूर (चेन्नई) और तिरुचिरापल्ली ईस्ट—से जीत हासिल की है, लेकिन उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इसके बाद टीवीके की सीट संख्या घटकर 107 रह जाएगी। इसके अलावा विधानसभा स्पीकर का पद भी पार्टी के खाते से ही जाएगा, जो विश्वास मत के दौरान वोट नहीं कर सकता, जिससे प्रभावी संख्या और घटकर 106 रह जाएगी। इस स्थिति में बहुमत के लिए विजय को कम से कम 12 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

दूसरा विकल्प यह है कि विजय अल्पमत सरकार बनाने का दावा पेश करें। इस स्थिति में राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें सदन में विश्वास मत हासिल करना होगा, जो बिना ठोस समर्थन के काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अल्पमत सरकार बनने पर हर विधेयक और निर्णय के लिए बाहरी समर्थन पर निर्भरता बनी रहेगी, जिससे सरकार की स्थिरता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

यदि विजय बहुमत साबित करने में असफल रहते हैं, तो राज्यपाल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी डीएमके को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में डीएमके अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की कोशिश करेगी। इससे तमिलनाडु की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ आ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां एक नए दल ने पारंपरिक पार्टियों को कड़ी चुनौती दी है। हालांकि, अंतिम तस्वीर अब सरकार गठन की प्रक्रिया और गठबंधन की दिशा पर निर्भर करेगी।

फिलहाल सभी की नजरें विजय और राज्यपाल की मुलाकात पर टिकी हैं, जहां से तमिलनाडु की अगली सरकार का रास्ता साफ हो सकता है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या विजय अपनी ऐतिहासिक जीत को सत्ता में बदल पाएंगे या फिर राज्य में कोई नया राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आएगा।, 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-