भारतीय शेयर बाजार के नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने निवेशकों और ब्रोकरों के लिए शुरू किए गए बैकअप ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म IRRA को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फैसला लिया है। SEBI ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में ट्रेडिंग सिस्टम, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे में बड़े सुधार होने के कारण अब इस प्लेटफॉर्म की आवश्यकता नहीं रह गई है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब भारतीय शेयर बाजार का तकनीकी ढांचा पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और सुरक्षित माना जा रहा है।
SEBI ने गुरुवार को जारी अपने सर्कुलर में बताया कि स्टॉक एक्सचेंजों ने नियामक को सूचित किया था कि अक्टूबर 2023 में IRRA प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद से किसी भी ब्रोकर ने इसका इस्तेमाल नहीं किया। इसी आधार पर एक्सचेंजों ने सर्वसम्मति से इस प्लेटफॉर्म को बंद करने की सिफारिश की थी, जिसे अब SEBI ने मंजूरी दे दी है।
IRRA यानी Investor Risk Reduction Access प्लेटफॉर्म को दिसंबर 2022 में एक बैकअप सुविधा के तौर पर लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य यह था कि यदि किसी ब्रोकर के सिस्टम में तकनीकी खराबी या सर्वर फेल होने जैसी समस्या आती है तो निवेशक वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए ट्रेडिंग जारी रख सकें। उस समय इसे बाजार की सुरक्षा और ट्रेडिंग में निरंतरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना गया था।
हालांकि SEBI का कहना है कि पिछले दो वर्षों में भारतीय ट्रेडिंग इकोसिस्टम में तकनीकी और नियामकीय स्तर पर बड़े बदलाव हुए हैं। ब्रोकर अब पहले की तुलना में अधिक मजबूत बिजनेस कंटीन्यूटी और डिजास्टर रिकवरी सिस्टम यानी BCP-DR मैकेनिज्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते किसी तकनीकी बाधा की स्थिति में वे आसानी से अपने बैकअप सिस्टम पर स्विच कर सकते हैं और ट्रेडिंग सेवाएं बिना रुकावट जारी रख सकते हैं।
नियामक ने यह भी कहा कि साइबर सुरक्षा मानकों और रेजिलिएंस फ्रेमवर्क में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। Market Security Operations Centre यानी M-SoC की स्थापना ने भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की सुरक्षा और संचालन क्षमता को काफी मजबूत बनाया है। SEBI के अनुसार अब बाजार में ऐसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से आपात स्थिति या तकनीकी समस्या आने पर भी कारोबार प्रभावित नहीं होता।
SEBI ने बताया कि कई ब्रोकर अब स्वतंत्र “कोल्ड साइट्स” का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ऐसी वैकल्पिक तकनीकी लोकेशन होती हैं, जहां मुख्य सिस्टम में खराबी आने की स्थिति में तुरंत ऑपरेशन शुरू किया जा सकता है। इससे निवेशकों और बाजार पर किसी तकनीकी रुकावट का असर कम से कम पड़ता है।
हालांकि IRRA प्लेटफॉर्म को बंद कर दिया गया है, लेकिन SEBI ने स्टॉक एक्सचेंजों को निर्देश दिया है कि वे Contingency Pool Trading सुविधा को और मजबूत बनाएं। यह व्यवस्था अभी भी तकनीकी बाधाओं के दौरान वैकल्पिक सहायता तंत्र के रूप में काम करेगी और जरूरत पड़ने पर निवेशकों तथा ब्रोकरों को सपोर्ट प्रदान करेगी।
इसी बीच SEBI ने वित्तीय बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कुछ नए नियम भी लागू किए हैं। हाल ही में नियामक ने “सिग्निफिकेंट इंडाइसेज” प्रदान करने वाली संस्थाओं को छह महीने के भीतर SEBI के साथ पंजीकरण कराने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य बाजार सूचकांकों के संचालन में पारदर्शिता और बेहतर गवर्नेंस सुनिश्चित करना है।
हालांकि जिन इंडेक्स प्रदाताओं के बेंचमार्क पहले से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा “सिग्निफिकेंट” या “ऑथराइज्ड बेंचमार्क” घोषित किए जा चुके हैं, उन्हें इस नई व्यवस्था से छूट दी गई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI का यह फैसला भारतीय शेयर बाजार के तकनीकी विकास और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को दर्शाता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि अब भारतीय ट्रेडिंग सिस्टम पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, सक्षम और आधुनिक हो चुका है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

