अंक ज्योतिष में जन्मतिथि के अंकों का योग केवल भविष्य ही नहीं बताता, बल्कि यह भी तय करता है कि जीवन के किस समय में हमें किस दिशा से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी. जब हम इन अंकों को वर्षों के क्रम में जोड़ते हैं, तो एक 'महादशा चक्र' बनता है. यह चक्र हमें बताता है कि वर्तमान समय में हमारे घर की कौन सी दिशा सबसे अधिक प्रभावशाली है और उसका हमारे जीवन पर क्या असर पड़ रहा है.
गणना का सही तरीका
1. गणना का सही तरीका आपकी जन्मतिथि: 15-02-1992
मूलांक (Psychic Number): 1 + 5 = 6 (शुक्र - SE दिशा)
भाग्यांक (Destiny Number): 1+5+0+2+1+9+9+2 = 29
2+9=11
1+1 = 2 (चंद्रमा - NW दिशा)
महादशा चक्र (उदाहरण के अनुसार):
आप जिस भी वर्ष में खड़े हैं, उसमें अपने मूलांक या अगले अंकों को जोड़कर समय का निर्धारण करते हैं.
1992 + 6 (मूलांक) = 1998 तक (शुक्र का प्रभाव - दक्षिण-पूर्व)
1998 + 7 = 2005 तक (केतु का प्रभाव - उत्तर-पूर्व)
2005 + 8 = 2013 तक (शनि का प्रभाव - पश्चिम)
2013 + 9 = 2022 तक (मंगल का प्रभाव - दक्षिण)
2022+1=2023
2023+2=2025
2025+3=2028
ऐसे ही अंको के समय के अनुसार
अपने घर की दिशा देखे ..
इसे नंबरों की महादशा कहते है ..
हर दिशा सिर्फ एक दिशा नहीं होती —
वह जीवन की किसी न किसी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है.
वास्तु की 8 प्रमुख दिशाएँ व उनके प्रभाव
1- पूर्व (E) – आत्मबल, स्वास्थ्य, नई शुरुआत
2- उत्तर-पश्चिम (NW / वायव्य) – गति, परिवर्तन, संपर्क
3- उत्तर-पूर्व (NE / ईशान) – ब्रह्म ऊर्जा, ज्ञान, पूजा
4- दक्षिण-पश्चिम (SW / नैऋत्य) – संग्रह, रिश्ते, स्थायित्व
5- उत्तर (N) – करियर, धन प्रवाह
6- दक्षिण-पूर्व (SE / अग्नि) – अग्नि तत्व, रसोई, ऊर्जा
7- उत्तर-पूर्व (NE / ईशान) और center
8- पश्चिम (W) – लाभ, सफलता, परिणाम
9- दक्षिण (S) – मानसिक स्थिति, स्थिर

