लखनऊ. योगी मंत्रिमंडल का रविवार को विस्तार हुआ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने जनभवन के गांधी सभागार में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई. मंत्रिमंडल के नए सदस्य के रूप में भूपेंद्र सिंह चौधरी, मनोज कुमार पांडेय ने कैबिनेट मंत्री तथा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश सिंह राजपूत ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
योगी सरकार में राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल व सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन हुआ. दोनों राज्यमंत्रियों ने अब राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शपथ ली. नवनियुक्त मंत्रियों ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पुष्पगुच्छ देकर उनका अभिनंदन किया. शपथ ग्रहण के उपरांत जनभवन का गांधी सभागार भारत माता की जय व जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा.
इन्होंने ली मंत्री पद की शपथ
गौरतलब है कि भूपेंद्र सिंह चौधरी विधान परिषद सदस्य हैं. वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि मनोज कुमार पांडे ऊंचाहार सीट से विधायक हैं. वहीं राज्यमंत्री की शपथ लेने वालीं कृष्णा पासवान खागा से, सुरेंद्र दिलेर खैर से और कैलाश सिंह राजपूत तिर्वा से विधायक हैं. हंसराज विश्वकर्मा विधान परिषद सदस्य हैं.
योगी कैबिनेट में अब बढ़कर इतने हुए मंत्री
योगी सरकार 2.0 में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों समेत अब कुल 54 मंत्री हो गए हैं. इनमें 21 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 18 राज्य मंत्री शामिल हैं. संवैधानिक प्रावधान के अनुसार प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं. खास बात यह रही कि किसी मंत्री को हटाए बिना आठ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया.
मार्च 2024 में हुआ था इससे पहले विस्तार
इससे पहले योगी सरकार का पहला विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले पांच मार्च 2024 को हुआ था. उस समय सामाजिक समीकरण साधने के तहत ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, अनिल कुमार और सुनील कुमार शर्मा को मंत्रिमंडल में जगह दी गई थी.
ऐसा है जातीय समीकरण
भाजपा के मौजूदा जातीय समीकरण पर नजर डालें तो पार्टी के पास विधानसभा में 258 विधायक हैं. इनमें 84 ओबीसी, 59 एससी, 45 राजपूत, 42 ब्राह्मण और 28 अन्य सवर्ण वर्ग से हैं. वहीं विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं, जिनमें 26 ओबीसी, 23 राजपूत, 14 ब्राह्मण, 12 अन्य सवर्ण, दो मुस्लिम और दो एससी वर्ग के सदस्य शामिल हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार में इन्हीं सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर नए चेहरों को शामिल किया गया है.

