कान्स. दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल Cannes Film Festival के उद्घाटन दिन इस बार सिनेमा से ज्यादा राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गाजा युद्ध पर बहस ने सुर्खियां बटोरीं. मुख्य प्रतियोगिता जूरी के सदस्य और प्रसिद्ध पटकथा लेखक Paul Laverty ने हॉलीवुड पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि गाजा युद्ध का विरोध करने वाले कलाकारों को व्यवस्थित तरीके से उद्योग से बाहर किया जा रहा है. उनके बयान ने समारोह के पहले ही दिन वैश्विक फिल्म जगत में नई बहस छेड़ दी है.
जूरी संवाददाता सम्मेलन के अंत में पॉल लैवर्टी ने कहा कि हॉलीवुड को उन कलाकारों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर शर्म आनी चाहिए, जिन्होंने गाजा में महिलाओं और बच्चों की मौतों के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने विशेष रूप से Susan Sarandon, Javier Bardem और Mark Ruffalo का नाम लेते हुए कहा कि इन कलाकारों को उनके विचारों के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकारों के प्रति उनका पूरा सम्मान और एकजुटता है क्योंकि वही लोग मानवता की आवाज उठाने का साहस दिखा रहे हैं.
लैवर्टी का बयान इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि इस वर्ष कान्स फिल्म समारोह के आधिकारिक पोस्टर में सुसान सारंडन की तस्वीर प्रमुखता से शामिल है. यह तस्वीर उनकी चर्चित फिल्म Thelma & Louise से ली गई है, जिसे हॉलीवुड सिनेमा की प्रतिष्ठित फिल्मों में गिना जाता है. ऐसे में एक ओर समारोह में उनकी छवि का इस्तेमाल और दूसरी ओर उनके कथित बहिष्कार को लेकर उठे सवालों ने फिल्म उद्योग की दोहरी मानसिकता पर बहस तेज कर दी है.
पॉल लैवर्टी ने अपने बयान में व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कान्स में यह पोस्टर लगाने के कारण कहीं समारोह पर हमला न हो जाए. इसके बाद उन्होंने फिल्मकारों से अपील की कि वे राजनीति और सामाजिक मुद्दों से दूरी न बनाएं. उन्होंने कहा कि जब “पागल लोग अंधों का नेतृत्व कर रहे हों” तब कलाकारों और फिल्मकारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. उन्होंने अपने वक्तव्य में King Lear का उल्लेख करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नैतिक साहस पर जोर दिया.
दरअसल पिछले कुछ महीनों से हॉलीवुड और वैश्विक मनोरंजन उद्योग में गाजा युद्ध को लेकर गहरी वैचारिक विभाजन की स्थिति बनी हुई है. कई कलाकारों ने युद्धविराम की मांग करते हुए सार्वजनिक बयान दिए थे, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया से लेकर पेशेवर स्तर तक विरोध का सामना करना पड़ा. सुसान सारंडन पहले ही दावा कर चुकी हैं कि गाजा के समर्थन में मार्च निकालने और युद्धविराम की मांग करने के कारण उनकी एजेंसी ने उन्हें काम से निकाल दिया. उन्होंने कुछ महीने पहले स्पेन में अंतरराष्ट्रीय गोया सम्मान ग्रहण करते समय कहा था कि उन्हें केवल इसलिए पेशेवर नुकसान झेलना पड़ा क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से गाजा में हिंसा का विरोध किया.
विश्लेषकों का मानना है कि कान्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे का उठना केवल एक फिल्म समारोह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मनोरंजन उद्योग में बढ़ती वैचारिक असहिष्णुता की ओर संकेत करता है. पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर कलाकारों की राय को लेकर उद्योग के भीतर दबाव और ध्रुवीकरण लगातार बढ़ा है. कई कलाकारों का मानना है कि बड़े स्टूडियो और एजेंसियां अब केवल व्यावसायिक हितों के आधार पर निर्णय नहीं ले रहीं, बल्कि राजनीतिक विवादों से बचने के लिए कलाकारों पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण भी बढ़ा रही हैं.
इस वर्ष कान्स फिल्म समारोह १२ मई से २३ मई तक आयोजित किया जा रहा है. दक्षिण कोरिया के चर्चित फिल्मकार Park Chan-wook मुख्य प्रतियोगिता जूरी के अध्यक्ष हैं. वे अपनी प्रसिद्ध फिल्म Oldboy के लिए विश्वभर में पहचाने जाते हैं. समारोह के दौरान दुनिया भर की फिल्मों, कलाकारों और फिल्मकारों की मौजूदगी के बीच इस बार राजनीतिक विमर्श भी प्रमुखता से उभरता दिखाई दे रहा है.
भारतीय सिनेमा की बात करें तो इस बार मुख्य प्रतियोगिता में किसी भारतीय फिल्म को स्थान नहीं मिला है. हालांकि मलयालम सिनेमा की चर्चित फिल्म Amma Ariyan को कान्स क्लासिक्स खंड में प्रदर्शित किया जाएगा. फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन इसकी चार के पुनर्स्थापित प्रति को समारोह में प्रस्तुत करेगा. वहीं भारतीय सितारों में Alia Bhatt, Aishwarya Rai Bachchan और Tara Sutaria रेड कार्पेट पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे.
कान्स में पॉल लैवर्टी के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज का वैश्विक सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है. युद्ध, राजनीति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैचारिक संघर्ष अब फिल्म उद्योग के भीतर भी खुलकर दिखाई देने लगे हैं. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हॉलीवुड और वैश्विक फिल्म उद्योग इस बहस को किस दिशा में ले जाते हैं और क्या कलाकारों की राजनीतिक अभिव्यक्ति को लेकर बदलता माहौल भविष्य में और बड़े विवादों को जन्म देगा.
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