महामृत्युंजय माला मंत्र के प्रभाव से टल जाएगा अकाल मृत्यु का संकट

महामृत्युंजय माला मंत्र के प्रभाव से टल जाएगा अकाल मृत्यु का संकट

प्रेषित समय :21:23:23 PM / Wed, May 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

देवों के देव महादेव की अनंत महिमा और मृत्यु के भय को जड़ से समाप्त करने वाले महामृत्युंजय माला मंत्र को लेकर आज आध्यात्मिक जगत में एक नई लहर देखी जा रही है। पुरातन शास्त्रों और वैदिक गणनाओं के अनुसार इस मंत्र को मात्र एक ध्वनि नहीं बल्कि ब्रह्मांड की सबसे बड़ी ऊर्जा प्रणाली माना गया है जो मनुष्य के भीतर छिपी प्राण शक्ति को पुनर्जीवित करने में सक्षम है। आज हम उस विशेष ध्यान मंत्र और उसकी फलश्रुति की बात कर रहे हैं जो न केवल साधक को रोगमुक्त करती है बल्कि काल के ग्रास से भी सुरक्षित निकाल ले आती है। इस मंत्र की महिमा का वर्णन करते हुए विद्वानों का स्पष्ट मत है कि जब साम्ब सदाशिव जो नीलकंठ और चतुर्भुज हैं उनका ध्यान किया जाता है तो वह साधक के जीवन के समस्त अंधकार को हर लेते हैं।

भगवान शिव का स्वरूप जो चंद्रकोटि के समान प्रकाशमान है और जिनका मुख पूर्ण चंद्रमा की आभा लिए हुए है उनके इस ध्यान मात्र से ही चित्त की चंचलता समाप्त हो जाती है। विशेष रूप से यह मंत्र उन परिस्थितियों में संजीवनी का कार्य करता है जब चिकित्सा विज्ञान और मानवीय प्रयास विफल होने लगते हैं। बिम्बाफल जैसे लाल अधरों वाले विशाल नेत्रों वाले और मस्तक पर चंद्रमा को धारण करने वाले महादेव जब अक्षमाला और अंबर धारण कर भक्त के सम्मुख वरद और अभय मुद्रा में खड़े होते हैं तो मृत्यु का भय भी नतमस्तक हो जाता है। आध्यात्मिक शोधकर्ताओं का दावा है कि महामृत्युंजय माला मंत्र का नियमित श्रवण और पाठ शरीर की कोशिकाओं में एक विशेष प्रकार का कंपन उत्पन्न करता है जो नकारात्मक ऊर्जा को पूरी तरह नष्ट कर देता है।

आज के इस भागदौड़ भरे युग में जहां मानसिक तनाव और असाध्य बीमारियां मनुष्य को घेरे हुए हैं वहां इस मंत्र का महत्व और भी बढ़ गया है। ध्यान के श्लोकों में भगवान शिव को 'साम्ब' कहा गया है जिसका अर्थ है शक्ति के साथ भगवान। यह पुरुष और प्रकृति के मिलन का प्रतीक है जो सृष्टि के सृजन और संहार दोनों का नियंत्रण करते हैं। जब हम चतुर्भुज रूप का ध्यान करते हैं तो वह चार पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। नीलकंठ का स्वरूप हमें सिखाता है कि कैसे संसार के विष को पीकर भी लोक कल्याण के लिए अमृत का वितरण किया जाता है। भगवान शिव का यह स्वरूप न केवल शांत है बल्कि अत्यंत करुणामय भी है जो भक्त के एक आह्वान पर उसे यमराज के पाश से मुक्त कराने की सामर्थ्य रखता है।

धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष पूजा विधानों में इस माला मंत्र को 'कवच' की संज्ञा दी गई है। जानकार बताते हैं कि जो व्यक्ति इस मंत्र के ध्यान में स्वयं को लीन कर देता है उसके चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा चक्र निर्मित हो जाता है। इस सुरक्षा चक्र को भेदना किसी भी बाधा या व्याधि के लिए असंभव होता है। विशेष रूप से अकाल मृत्यु के दोष को दूर करने के लिए इस मंत्र से बढ़कर संसार में कोई दूसरी औषधि नहीं बताई गई है। प्राचीन ऋषियों ने इसे 'मृत्युंजय' यानी मौत को जीतने वाला इसीलिए कहा क्योंकि यह आत्मा को उसके अविनाशी स्वरूप का बोध कराता है। जब साधक यह जान लेता है कि वह शरीर नहीं बल्कि शुद्ध चेतना है तो मृत्यु का भय स्वतः ही समाप्त हो जाता है।

।। महामृत्युञ्जयमालामन्त्रः ।।

ध्यानम् -

ध्यायेन्मृत्युञ्जयं साम्बं नीलकण्ठं चतुर्भुजम् ।

चन्द्रकोटिप्रतीकाशं पूर्णचन्द्रनिभाननम् ॥ १॥

बिम्बाधरं विशालाक्षं चन्द्रालङ्कृतमस्तकम् ।

अक्षमालाम्बरधरं वरदं चाभयप्रदम् ॥ २॥

महार्हकुण्डलाभूषं हारालङ्कृतवक्षसम् ।

भस्मोद्धूलितसर्वाङ्गं भालनेत्रविराजितम् ॥ ३॥

व्याघ्रचर्मपरीधानं व्यालयज्ञोपवीतिनम् ।

पार्वत्या सहितं देवं सर्वाभीष्टवरप्रदम् ॥ ४॥

१. ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः हौं हैं हाम् ।

ॐ मृत्युञ्जयाय नमश्शिवाय हुं फट् स्वाहा ॥

२. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय चन्द्रशेखराय

जटामकुटधारणाय, अमृतकलशहस्ताय,

अमृतेश्वराय सर्वात्मरक्षकाय ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हां ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय,

महामृत्युञ्जयाय सर्वरोगारिष्टं निवारय

निवारय, आयुरभिवृद्धिं कुरु कुरु आत्मानं रक्ष रक्ष,

महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

३. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जथेश्वराय पार्वतीमनोहराय

अमृतस्वरूपाय कालान्तकाय करुणाकराय गङ्गाधराय । ॐ हां

हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् । ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः

जुं सः जुं पालय पालय । महामृत्युञ्जयाय सर्वरोगारिष्टं

निवारय निवारय सर्वदुष्टग्रहोपद्रवं निवारय निवारय, आत्मानं

रक्ष रक्ष, आयुरभिवृद्धिं

कुरु कुरु महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

४। ॐ नमो भगवते महामृत्युजयेश्वराय जटामकुटधारणाय

चन्द्रशेखराय श्रीमहाविष्णुवल्लभाय, पार्वतीमनोहराय,

पञ्चाक्षर परिपूर्णाय, परमेश्वराय, भक्तात्मपरिपालनाय,

परमानन्दाय परब्रह्मपरापराय । ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं

हौं हाम् । ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय ।

महामृत्युञ्जयाय लं लं लौं इन्द्रद्वारं बन्धय बन्धय ।

आत्मानं रक्ष रक्ष, सर्वग्रहान् बन्धय बन्धय स्तम्भय

स्तम्भय सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय, दीर्घायुष्यं कुरु

कुरु । ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

५. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय,

कालकालसंहाररुद्राय,व्याघ्रचर्माम्बरधराय,

कृष्णसर्पयज्ञोपवीताय, अनेककोटिब्रह्मकपालालङ्कृताय ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् । ॐ श्लीं पं शुं

हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय । महामृत्युञ्जयाय रं

रं रौं अग्निद्वारं बन्धय बन्धय, आत्मानं रक्ष रक्ष ।

सर्वग्रहान्बन्धय बन्धय । स्तम्भय स्तम्भय, सर्वरोगारिष्टं

निवारय निवारय । अरोगदृढगात्र दीर्घायुष्यं कुरु कुरु ।

ॐ नमो भगवते मृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

६. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय त्रिनेत्राय

कालकालान्तकाय आत्मरक्षाकराय लोकेश्वराय अमृतस्वरूपाय ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् । ॐ श्लीं पं शुं हुं

जुं सः जुं सः जुं पालय पालय महामृत्युञ्जयाय हं हं हौं

यमद्वारं बन्धय बन्धय आत्मानं रक्ष रक्ष, सर्वग्रहान्

बन्धय बन्धय स्तम्भय स्तम्भय सर्वरोगारिष्टं निवारय

निवारय महामृत्युभयं निवारय निवारय अरोगदृढगात्र

दीर्घायुष्यं कुरु कुरु । ॐ नमो भगवते मृत्युञ्जयेश्वराय

हुं फट् स्वाहा ॥

७. ॐ नमो भगवते मृत्युञ्जयेश्वराय त्रिशूल डमरुकपाल

मालिकाव्याघ्रचर्माम्बरधराय, परशुहस्ताय, श्रीनीलकण्ठाय

निरञ्जनाय, कालकालान्तकाय, भक्तात्मपरिपालकाय,

अमृतेश्वराय । ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् । ॐ

श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय महामृत्युञ्जयाय

षं षं षौं निरृतिद्वारं बन्धय बन्धय । आत्मानं रक्ष

रक्ष । सर्वग्रहान्बन्धय बन्धय । स्तम्भय स्तम्भय ।

महामृत्युजयेश्वराय अरोगदृढ गात्रदीर्घायुष्यं कुरु कुरु ।

ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

८. ॐ नमो भगवते महामृत्युजयेश्वराय महारुद्राय

सर्वलोकरक्षाकराय चन्द्रशेखराय कालकण्ठाय आनन्दभुवनाय

अमृतेश्वराय कालकालान्तकाय करुणाकराय कल्याणगुणाय

भक्तात्मपरिपालकाय ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुम् ।

पालय पालय महामृत्युजयेश्वराय पं पं पौं

वरुणद्वारं बन्धय बन्धय । आत्मानं रक्ष रक्ष ।

सर्वग्रहान् स्तम्भय स्तम्भय । महामृत्युञ्जयमूर्तये रक्ष रक्ष ।

सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय ।

महामृत्युभयं निवारय निवारय । महामृत्युञ्जयेश्वराय ।

अरोगदृढगात्रदीर्घायुष्यं कुरु करु ।

ॐ नमो भगवते मृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

९. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय गङ्गाधराय

परशुहस्ताय पार्वतीमनोहराय भक्तपरिपालनाय परमेश्वराय

परमानन्दाय । ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् । ॐ श्लीं

पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय,

महामृत्युञ्जयाय यं यं यौं वायुद्वारं बन्धय बन्धय,

आत्मानं रक्ष रक्ष । सर्वग्रहान् बन्धय बन्धय,

स्तम्भय स्तम्भय, महामृत्युञ्जयमूर्तये रक्ष रक्ष

सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय, महामृत्युजयेश्वराय

अरोगदृढगात्र दीर्घायुष्यं कुरु कुरु ।

ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

१०. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय चन्द्रशेखराय

उरगमणिभूषिताय शार्दूलचर्माम्बरधराय, सर्वमृत्युहराय

पापध्वंसनाय आत्मरक्षकाय ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं

हौं हाम् । ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय ।

महामृत्युञ्जयाय सं सं सौं कुबेरद्वारं बन्धय बन्धय ।

आत्मानं रक्षं रक्ष । सर्वग्रहान् बन्धय बन्धय । स्तम्भय

स्तम्भय । महामृत्युञ्जयमूर्तये रक्ष रक्ष । सर्वरोगारिष्टं

निवारय निवारय । महामृत्युञ्जयेश्वराय अरोगदृढगात्र

दीर्घायुष्यं कुरु कुरु । ॐ नमो भगवते महामृत्युजयेश्वराय

हुं फट् स्वाहा ॥

११. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय सर्वात्मरक्षाकराय

करुणामृतसागराय पार्वतीमनोहराय अघोरवीरभद्राट्टहासाय

कालरक्षाकराय अचञ्चलस्वरूपाय प्रलयकालाग्निरुद्राय

आत्मानन्दाय सर्वपापहराय भक्तपरिपालनाय पञ्चाक्षरस्वरूपाय

भक्तवत्सलाय परमानन्दाय । ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं

हौं हाम् । ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय

महामृत्युञ्जयाय । शं शं शौं ईशानद्वारं बन्धय बन्धय,

स्तम्भय स्तम्भय, शं शं शौं ईशानमृत्युञ्जय मूर्तये

आत्मानं रक्ष रक्ष, सर्वग्रहान् बन्धय बन्धय स्तम्भय

स्तम्भय । शं शं शौ ईशानमृत्युञ्जय मूर्तये रक्ष

रक्ष सर्वरोगारिष्टं निवारय, निवारय, महामृत्युभयं निवारय

निवारय । महामृत्युञ्जयेश्वराय अरोगदृढगात्रदीर्घायुष्यं

कुरु करु । ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट्

स्वाहा ॥

१२. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय

आकाशतत्वभुवनेश्वराय अमृतोद्भवाय नन्दिवाहनाय

आकाशगमनप्रियाय गजचर्मधारणाय कालकालाय भूतात्मकाय

महादेवाय भूतगणसेविताय (आकाशतत्त्वभुवनेश्वराय)

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं

पालय पालय महामृत्युञ्जयाय टं टं टौं

आकाशद्वारं बन्धय बन्धय आत्मानं रक्ष रक्ष

सर्वग्रहान्बन्धय बन्धय । स्तम्भय स्तम्भय ।

टं टं टौं परमाकाशमूर्तये महामृत्युञ्जयेश्वराय रक्ष रक्ष ।

सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय, महामृत्युभयं निवारय निवारय ।

महामृत्युञ्जयेश्वराय अरोगदृढगात्र दीर्घायुष्यं कुरु कुरु ।

ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

१३. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय महारुद्राय कालाग्नि

रुद्रभुवनाय महाप्रलयताण्डवेश्वराय अपमृत्युविनाशनाय

कालकालेश्वराय कालमृत्यु संहारणाय अनेककोटिभूतप्रेतपिशाच

ब्रह्मराक्षसयक्षराक्षसगणध्वंसनाय आत्मरक्षाकराय

सर्वात्मपापहराय ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय

महामृत्युञ्जयाय क्षं क्षं क्षौं अन्तरिक्षद्वारं

बन्धय बन्धय आत्मानं रक्ष रक्ष, सर्वग्रहान् बन्धय, बन्धय,

स्तम्भय स्तम्भय ।

क्षं क्षं क्षौं चिदाकाशमूर्तये महामृत्युञ्जयेश्वराय रक्ष रक्ष ।

सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय ।

महामृत्युभयं निवारय निवारय ।

महामृत्युञ्जयेश्वराय अरोगदृढगात्र दीर्घायुष्यं कुरु कुरु ।

ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

१४. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय सदाशिवाय

पार्वतीपरमेश्वराय महादेवाय सकलतत्वात्मरूपाय

शशाङ्कशेखराय तेजोमयाय सर्वसाक्षिभूताय

पञ्चाक्षराय पश्चभूतेश्वराय परमानन्दाय परमाय

परापराय परञ्ज्योतिःस्वरूपाय ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय,

महामृत्युञ्जयाय हं हां हिं हीं हैं हौं

अष्टमूर्तये महामृत्युञ्जय मूर्तये आत्मानं रक्ष रक्ष

सर्वग्रहान्बन्धय बन्धय स्तम्भय स्तम्भय

महामृत्युञ्जयमूर्तये रक्ष रक्ष सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय

सर्वमृत्युभयं निवारय निवारय,

महामृत्युञ्जयेश्वराय अरोगदृढगात्रदीर्घायुष्यं कुरु कुरु ।

ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

१५. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय लोकेश्वराय

सर्वरक्षाकराय चन्द्रशेखराय गङ्गाधराय नन्दिवाहनाय

अमृतस्वरूपाय अनेककोटिभूतगणसेविताय कालभैरव कपालभैरव

कल्पान्तभैरव महाभैरवादि अष्टत्रिंशत्कोटिभैरवमूर्तये

कपालमालाधर खट्वाङ्गचर्मखड्गधर परशुपाशाङ्कुशडमरुक

त्रिशूल चाप बाण गदा शक्ति भिण्डि मुद्गरप्रास परिघा शतघ्नी

चक्रायुधभीषणाकार सहस्रमुख दंष्ट्राकरालवदन विकटाट्टहास

विस्फाटित ब्रह्माण्डमण्डल नागेन्द्रकुण्डल नागेन्द्रवलय नागेन्द्रहार

नागेन्द्र कङ्कणालङ्कृत महारुद्राय मृत्युञ्जय त्र्यम्बक

त्रिपुरान्तक विरूपाक्ष विश्वेश्वर वृषभवाहन विश्वरूप

विश्वतोमुख सर्वतोमुख महामृत्युञ्जयमूर्तये आत्मानं रक्ष रक्ष,

महामृत्युभयं निवारय निवारय, रोगभयं उत्सादय उत्सादय,

विषादिसर्पभयं शमय शमय, चोरान् मारय मारय,

सर्वभूतप्रेतपिशाच ब्रह्मराक्षसादि सर्वारिष्टग्रहगणान्

उच्चाटय उच्चाटय ।

मम अभयं कुरु कुरु । मां सञ्जीवय सञ्जीवय ।

मृत्युभयात् मां उद्धारय उद्धारय । शिवकवचेन मां रक्ष रक्ष ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुम् ।

पालय पालय महामृत्युञ्जयमूर्तये आत्मानं रक्ष रक्ष ।

सर्वग्रहान् निवारय निवारय । महामृत्युभयं निवारय निवारय ।

सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय ।

महामृत्युञ्जयेश्वराय अरोगदृढगात्र दीर्घायुष्यं कुरु कुरु ।

ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा ॥

१६. ॐ नमो भगवते महामृत्युञ्जयेश्वराय अमृतेश्वराय

अखिललोकपालकाय आत्मनाथाय सर्वसङ्कट

निवारणाय पार्वतीपरमेश्वराय ।

ॐ हां हौं नं मं शिं वं यं हौं हाम् ।

ॐ श्लीं पं शुं हुं जुं सः जुं सः जुं पालय पालय ।

महामृत्युञ्जयेश्वराय हं हां हौं जुं सः जुं सः जुं

मृत्युञ्जयमूर्तये आत्मानं रक्ष रक्ष सर्वग्रहान् निवारय निवारय ।

महामृत्युञ्जयमूर्तये सर्वसङ्कटं निवारय निवारय

सर्वरोगारिष्टं निवारय निवारय । महामृत्युभयं निवारय निवारय ।

महामृत्युञ्जयमूर्तये सर्वसङ्कटं निवारय निवारय

सकलदुष्टग्रहगणोपद्रवं निवारय निवारय ।

अष्ट महारोगं निवारय निवारय । सर्वरोगोपद्रवं निवारय निवारय ।

हैं हां हं जुं सः जुं सः जुं महामृत्युञ्जय मूर्तये

अरोगदृढगात्र दीर्घायुष्यं कुरु कुरु । दारापुत्रपौत्र

सबान्धव जनान् रक्ष रक्ष, धन धान्य कनक भूषण

वस्तु वाहन कृषिं गृह ग्रामरामादीन् रक्ष रक्ष ।

सर्वत्र क्रियानुकूलजयकरं कुरु कुरु आयुरभिवृद्धिं कुरु कुरु ।

जुं सः जु सः जुं सः महामृत्युञ्जयेश्वराय हुं फट् स्वाहा । ॐ ॥

ॐ मृत्युञ्जयाय विद्महे भीमरुद्राय धीमहि ।

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ।

इति महामृत्युञ्जयमालामन्त्रः सम्पूर्णः ।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-