16 मई 2026 को देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ शनि जयंती मनाई जाएगी. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान शनि देव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार शनि जयंती को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही है, उनके लिए कई विशेष उपाय और दान बताए गए हैं. ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यदि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ, दान और उपाय किए जाएं तो जीवन में आ रही परेशानियों से राहत मिल सकती है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव को न्याय और कर्म का देवता कहा जाता है. व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देने वाले शनि देव की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है, जबकि उनके अशुभ प्रभाव से आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याएं बढ़ सकती हैं. यही कारण है कि शनि जयंती के दिन लोग विशेष रूप से पूजा-अर्चना कर शनि दोषों को शांत करने का प्रयास करते हैं. मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है. कई स्थानों पर विशेष पूजन, हवन और भंडारे के आयोजन भी किए जाएंगे.
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस समय मेष, मीन और कुंभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है. मेष राशि वालों के लिए यह साढ़ेसाती का प्रथम चरण माना जा रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन जातकों को शनि जयंती के दिन काले वस्त्र में साबुत उड़द, नारियल और सरसों का तेल रखकर जल प्रवाह करना चाहिए. ऐसा करने से शनि दोष शांत होने और मानसिक तनाव कम होने की मान्यता है. वहीं मीन राशि के जातकों के लिए साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है. इनके लिए मिट्टी की छोटी मटकी में साबुत उड़द और सरसों का तेल भरकर उसे काले कपड़े से ढककर जल में प्रवाहित करना शुभ माना गया है. कहा जा रहा है कि यह उपाय आर्थिक परेशानियों और पारिवारिक तनाव को कम करने में सहायक माना जाता है.
कुंभ राशि के जातकों के लिए साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है. ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस राशि के लोगों को काले वस्त्र में उड़द, काली मिर्च, लोहे की कील और चंदन रखकर शनि मंदिर में दान करना चाहिए. मान्यता है कि इससे लंबे समय से अटके कार्यों में गति आती है और नौकरी तथा व्यापार में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति को धैर्य और अनुशासन बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यही समय व्यक्ति की परीक्षा का माना जाता है.
इसी तरह धनु और सिंह राशि के जातकों पर शनि की ढैया का प्रभाव बताया गया है. धनु राशि वालों के लिए गाय का कच्चा दूध किसी पुराने कुएं में डालना शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह उपाय मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में राहत देने वाला माना जाता है. वहीं सिंह राशि वालों को साबुत उड़द पर सरसों का तेल लगाकर जल प्रवाह करने की सलाह दी गई है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इससे शनि दोष का प्रभाव कम हो सकता है और कार्यों में आने वाली रुकावटें दूर हो सकती हैं.
शनि जयंती के दिन विशेष पूजा और दान का भी महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है. कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं. गरीबों, मजदूरों और असहाय लोगों को दान देने को विशेष पुण्यकारी माना गया है. काले तिल, साबुत उड़द और लोहे का दान भी शनि दोष शांत करने के लिए लाभकारी बताया गया है.
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि शनि देव केवल पूजा और उपायों से ही प्रसन्न नहीं होते, बल्कि व्यक्ति के कर्मों का भी विशेष महत्व होता है. इसलिए शनि जयंती के दिन और उसके बाद भी लोगों को झूठ, अन्याय और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है. पशु-पक्षियों को कष्ट देना, क्रोध और अहंकार करना भी शनि देव को अप्रसन्न करने वाला माना गया है. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यदि व्यक्ति ईमानदारी, अनुशासन और सत्य के मार्ग पर चलता है तो शनि देव की कृपा स्वतः प्राप्त होती है.
इस बीच शनि जयंती को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं. श्रद्धालुओं में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है. कई लोग पहले से ही पूजा सामग्री और दान की वस्तुएं एकत्र कर रहे हैं. धार्मिक मान्यता है कि शनि जयंती के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए उपाय जीवन की कठिनाइयों को कम कर सकते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं.
मां कामाख्या साधक, जन्म कुंडली विशेषज्ञ और वास्तु शास्त्री पंडित चंद्रशेखर नेमा “हिमांशु” ने बताया कि शनि देव कर्म और न्याय के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि इस दिन केवल उपाय ही नहीं बल्कि अच्छे कर्म, संयम और जरूरतमंदों की सहायता करना सबसे बड़ा उपाय माना गया है. उन्होंने लोगों से शांति, सेवा और सदाचार का पालन करने की अपील भी की है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

