इंदौर. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडबलू) ने 13 लाख 75 हजार रुपये कीमत के प्लाट को 1 करोड़ 25 लाख रुपये कीमत दर्शाकर केनरा बैंक में गिरवी रखने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लाभार्थियों व तत्कालीन बैंक प्रबंधक पर एफआईआर दर्ज की है.
ईओडबलू के मुताबिक आरोपी विमलेश चतुर्वेदी (प्रोपराइटर, मेसर्स ए.वी. ग्राफिक्स) ने मनीष बाग इन्दौर स्थित एक विवादित भूखण्ड के फर्जी दस्तावेज तैयार कर और उसकी कीमत अत्यधिक बढ़ाकर केनरा बैंक में बंधक रखी और 1.95 करोड़ का लोन आवेदन किया. बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, मंडल प्रबंधक, सेक्शन हेड और प्रोसेसिंग अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखकर, बिना वास्तविक भौतिक सत्यापन और बिना वैध मूल्यांकन के ही लोन की फाइलों पर संतोषजनक रिपोर्ट दर्ज कर लोन स्वीकृत कराया. आरोपियों ने आपस में सांठगांठ कर बैंक नियमों का उल्लंघन करते हुए कुल 1.70 करोड़ की राशि की हानि पहुँचाई और आरोपी को लाभ पहुँचाया.
इन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर
1. श्री विमलेश चतुर्वेदी पिता श्री रामप्रसाद चतुर्वेदी वर्ष निवासी 365-सी.एस. 1 स्कीम नं. 78 विजय नगर इन्दौर प्रोपराइटर मेसर्स ए.वी. ग्राफिक्स एंड ट्रेडिंग
2. श्री तरुण भार्गव पिता श्री सुभाष चन्द्र भार्गव निवासी 2-डी 11, जय नारायण व्यास कॉलोनी बीकानेर राजस्थान तत्कालीन शाखा प्रबंधक केनरा बैंक शाखा कनाडिय़ा रोड़ इन्दौर.
3. श्री कौशिक कुमार प्रबुद्ध पिता अशोक सिंह, उम्र 70 वर्ष, निवासी निघवां पुलिस स्टेशन कुर्था जिला अरवल बिहार तत्कालीन सेक्श्न हेड केनरा बैंक सुलभ कार्यालय भमोरी इन्दौर
4. श्रीमती खुशबू सिलावट पति श्री कपिल सिलावट बी-11 बालाजी नगर वडोदरा (गुजरात) तत्कालीन प्रोसेसिंग अधिकारी केनरा बैंक, सुलभ कार्यालय भमोरी इन्दौर
5. श्रीमती शर्मिष्ठा सिंह पति श्री हरीष शर्मा निवासी गाँव ऊपरी नायली पोस्ट ऑफिस तहसील बंगाना जिला ऊना हिमांचल प्रदेश मंडल प्रबंधक केनरा बैंक सुलभ कार्यालय भमोरी इन्दौर
मेसर्स ए.वी. ग्राफिक्स के प्रोपराइटर विमलेश चतुर्वेदी द्वारा आवासीय कॉलोनी मनीष बाग, इन्दौर स्थित भूखण्ड क्रमांक 2-बी (क्षेत्रफल 1000 वर्गफीट) को 1,25,00,000/- में क्रय करना दर्शाया.
इसके भुगतान हेतु एच.डी.एफ.सी. बैंक के चेक का उल्लेख कर एक कूटरचित पंजीकरण) तैयार कराया गया, जबकि वास्तव में केवल 13,75,000 रुपये का ही भुगतान किया गया था. दिनांक 21 दिसंबर 2023 को अरोपी द्वारा कलर प्रिंटिंग मशीनें खरीदने के लिए ?1.75 करोड़ का टर्म लोन और 20 लाख रुपये की सी.सी. लिमिट लेने हेतु केनरा बैंक कनाडिय़ा रोड़ के शाखा प्रबंधक तरुण भार्गव को आवेदन दिया गया. शाखा प्रबंधक तरूण भार्गव द्वारा बैंक के लेप्स नामक ऐप पर अपनी व्यक्तिगत आई.डी. से इस लोन आवेदन की विस्तृत जानकारी अपलोड की गई.
तरुण भार्गव द्वारा बैंक सर्कुलर (जिसके अनुसार 1 करोड़ से अधिक के बिजनेस लोन हेतु शाखा प्रबंधक और एम.एस.एम.ई. सुलभ कार्यालय के अधिकारी द्वारा संयुक्त निरीक्षण अनिवार्य है) का उल्लंघन करते हुए अकेले ही संपत्ति व यूनिट स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई. दिनांक 29 दिसंबर 2023 को प्रोसेसिंग अधिकारी खुशबू सिलावट ने भी बिना किसी वास्तविक निरीक्षण या फाइल में रिपोर्ट संलग्न किए, ऑफिस नोट में यूनिट सत्यापन की गलत टीप अंकित की.
ऋण प्रकरण की अनुशंसा और त्वरित स्वीकृति दिनांक 30 दिसम्बर 2023 को प्रदान की गई. नियमों के विरुद्ध जाते हुए एम एस एम ई सुलभ कार्यालय के बजाय सीधे शाखा से ही उसी दिन 1.50 करोड़ रुपये के टर्म लोन का भुगतान कर दिया गया और मशीनें स्थापित होने से पूर्व ही 20 लाख रुपये की सी.सी. लिमिट भी जारी कर दी गई.
संपत्ति के बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दिया लोन
जांच में पाया गया कि 12 अक्टूबर 2023 को जिस संपत्ति का बाजार मूल्य मात्र 23 लाख रुपये था, उसे लोन के उद्देश्य से 1.25 करोड़ रुपये की फर्जी रजिस्ट्री के तहत दर्शाया गया था. इस पर बैंक अधिकारियों ने कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की, स्थल निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन नहीं किया एवं ड्यू डिलिजेंस की अनदेखी अपने आर्थिक हितों को साधने के लिए की गई एवं पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया एवं स्वयं अवैध लाभ अर्जित किया. अरोपियों के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 1,30-बी भा.द.वी. एवं धारा 7-(सी) भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-
