गुरु के गोचर ने बढ़ाई हलचल, फिर सस्ते हो सकते हैं तेल के दाम

गुरु के गोचर ने बढ़ाई हलचल, फिर सस्ते हो सकते हैं तेल के दाम

प्रेषित समय :19:21:37 PM / Fri, May 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, सोना-चांदी की तेजी और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच अब ज्योतिषीय गणनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. ज्योतिषाचार्यों और आर्थिक मामलों पर नजर रखने वाले कई विशेषज्ञों के बीच इस समय एक रोचक संयोग चर्चा का विषय बना हुआ है. दावा किया जा रहा है कि जब-जब देवगुरु बृहस्पति ग्रह मिथुन राशि में गोचर करते हैं, तब वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और ऊर्जा समेत कई प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है. वहीं जब गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करता है तो बाजार में राहत, स्थिरता और कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो जाता है. वर्ष 2013-14 और वर्तमान 2025-26 के घटनाक्रमों की तुलना करते हुए इस ज्योतिषीय संयोग को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.

ज्योतिषीय विश्लेषणों के अनुसार जुलाई 2013 से जुलाई 2014 तक गुरु मिथुन राशि में स्थित था. इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर पहुंच गई थीं. उस समय ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक दर्ज की गई थीं. वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों का असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिला था. भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार दबाव बना रहा, महंगाई बढ़ी और आम लोगों की जेब पर असर पड़ा. आर्थिक जानकारों के अनुसार उस दौर में रुपये की कमजोरी और तेल आयात बिल बढ़ने से सरकार पर भी भारी दबाव बना था.

इसी कालखंड में देश ने कई बड़े घटनाक्रम भी देखे. वर्ष 2013 में उत्तराखंड में आई भीषण प्राकृतिक त्रासदी और 2013 केदारनाथ आपदा ने पूरे देश को झकझोर दिया था. आर्थिक मोर्चे पर अस्थिरता, राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल भी बना रहा. उस समय विशेषज्ञों ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को वैश्विक आर्थिक संकट का बड़ा कारण बताया था. अब ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जा रहा है कि यह पूरा दौर गुरु के मिथुन राशि में रहने के समय से मेल खाता है.

इसके बाद जुलाई 2014 में गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर गया. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि कर्क राशि में गुरु को अत्यंत शुभ और संतुलनकारी माना जाता है. संयोगवश इसी अवधि के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. वर्ष 2014 के मध्य तक 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा कच्चा तेल 2015 आते-आते लगभग 50 से 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. वैश्विक बाजार में यह गिरावट कई देशों के लिए राहत लेकर आई थी. भारत को भी इसका बड़ा फायदा मिला, क्योंकि उस समय देश में नई भारत सरकार के नेतृत्व में Narendra Modi की सरकार सत्ता में आई थी.

विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ते कच्चे तेल की वजह से भारत सरकार को आर्थिक मोर्चे पर राहत मिली. पेट्रोलियम आयात बिल कम हुआ, महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिली और आर्थिक सुधारों को गति मिली. कई आर्थिक विश्लेषकों ने उस समय यह भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की गिरती कीमतों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अब जब एक बार फिर गुरु मिथुन राशि में आया है तो पुराने घटनाक्रमों की तुलना करते हुए नए अनुमान लगाए जा रहे हैं.

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अप्रैल 2025 से मई 2026 तक गुरु पुनः मिथुन राशि में गोचर कर रहा है. इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना, चांदी और ऊर्जा क्षेत्र में तेजी देखने को मिल रही है. बीते कुछ महीनों में सोने की कीमतों ने रिकॉर्ड स्तर छुआ है, जबकि कच्चे तेल में भी लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है. वैश्विक स्तर पर युद्ध, व्यापारिक तनाव, डॉलर की स्थिति और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. ज्योतिषाचार्यों का दावा है कि गुरु का मिथुन राशि में होना व्यापारिक अनिश्चितता, सट्टा गतिविधियों और कीमतों में अचानक उछाल को बढ़ाने वाला माना जाता है.

हालांकि कई आर्थिक विशेषज्ञ इसे केवल संयोग मानते हैं और कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पूरी तरह मांग, आपूर्ति, भू-राजनीतिक हालात और केंद्रीय बैंकों की नीतियों से प्रभावित होता है. इसके बावजूद ज्योतिष और बाजार के इस संबंध को लेकर लोगों में उत्सुकता लगातार बढ़ रही है. सोशल मीडिया और ज्योतिषीय मंचों पर भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है. कई लोग वर्ष 2013-14 और वर्तमान समय के घटनाक्रमों में समानता खोज रहे हैं.

अब सबसे ज्यादा चर्चा जून 2026 से जून 2027 के संभावित घटनाक्रमों को लेकर हो रही है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में गुरु पुनः अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेगा. ज्योतिषाचार्यों का दावा है कि यह समय वैश्विक बाजारों के लिए राहत देने वाला हो सकता है. उनका कहना है कि यदि पुराने चक्र की पुनरावृत्ति हुई तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को राहत मिल सकती है और महंगाई पर नियंत्रण आने की संभावना बढ़ सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा कीमतों में गिरावट आती है तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. पेट्रोल-डीजल सस्ते हो सकते हैं, परिवहन लागत कम हो सकती है और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी राहत देखने को मिल सकती है. आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ-साथ उद्योगों और व्यापार को भी मजबूती मिल सकती है.

हालांकि आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि केवल ज्योतिषीय संकेतों के आधार पर बाजार का अनुमान लगाना पूरी तरह व्यावहारिक नहीं माना जा सकता, लेकिन पिछले वर्षों के घटनाक्रमों ने इस संयोग को चर्चा का विषय जरूर बना दिया है. फिलहाल वैश्विक निवेशक, कारोबारी और आम लोग आने वाले समय पर नजर बनाए हुए हैं. अब देखना यह होगा कि गुरु के अगले गोचर के साथ क्या वास्तव में वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत और आर्थिक संतुलन का नया दौर शुरू होता है या नहीं.

पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु 

9893280184

मां कामाख्या साधक जन्म कुंडली विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-