Donald Trump की चीन यात्रा ने वैश्विक राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां बीजिंग पहुंचने पर अमेरिकी राष्ट्रपति के स्वागत को लेकर विवाद और कथित अपमान की चर्चा होती रही, वहीं यात्रा के अंतिम दिन Xi Jinping ने ट्रंप को ऐसा विशेष सम्मान दिया जिसने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। चीन के राष्ट्रपति ने ट्रंप को अपने बेहद गोपनीय सरकारी-आवासीय परिसर झोंगनानहाई का दौरा कराया, जिसे चीन का “व्हाइट हाउस” माना जाता है। यह परिसर आमतौर पर विदेशी नेताओं के लिए पूरी तरह बंद रहता है और वहां किसी बाहरी नेता को ले जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है।
शुक्रवार को चीन यात्रा समाप्त कर लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने इस मुलाकात को “अद्भुत” और “दुर्लभ” बताया। उन्होंने कहा कि वह उस जगह गए जहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग रहते हैं और काम करते हैं। ट्रंप ने कहा कि ऐसा बहुत कम होता है और लोगों ने पहले कभी इस तरह का दृश्य नहीं देखा। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया में झोंगनानहाई दौरे को लेकर चर्चा तेज हो गई।
जानकारी के अनुसार लगभग 1500 एकड़ में फैला झोंगनानहाई परिसर चीन की सत्ता का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और केंद्रीय सरकार के शीर्ष नेता रहते और काम करते हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वयं ट्रंप को परिसर का दौरा कराया और बताया कि यह वही स्थान है जहां चीन का शीर्ष नेतृत्व कार्य करता है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों को नरम करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि ट्रंप की यह यात्रा शुरुआत से ही विवादों में घिरी रही। बीजिंग पहुंचने के पहले दिन ही कई राजनीतिक विश्लेषकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति को प्रोटोकॉल के स्तर पर वह सम्मान नहीं दिया जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। ट्रंप के स्वागत के लिए रेड कार्पेट, सैन्य गार्ड ऑफ ऑनर और छात्रों की मौजूदगी जरूर थी, लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद एयरपोर्ट पर स्वागत करने नहीं पहुंचे। उनकी जगह चीन के उपराष्ट्रपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप का स्वागत किया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
राजनीतिक टिप्पणीकार Brian Allen ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि यह ट्रंप के लिए “बड़ा अपमान” है। उन्होंने कहा कि चीन ने अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह किसी तीसरी दुनिया के देश के नेता हों। उन्होंने यह भी दावा किया कि व्हाइट हाउस इसे रेड कार्पेट ट्रीटमेंट बता रहा है, जबकि वास्तविकता अलग है। इसके बाद सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो भी वायरल होने लगे, जिनमें वर्ष 2018 में शी जिनपिंग उत्तर कोरियाई नेता Kim Jong Un का एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत करते दिखाई दे रहे थे।
ट्रंप की यात्रा के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी काफी चर्चा में रहा। उनके साथ अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio, रक्षा मंत्री Pete Hegseth, उद्योगपति Elon Musk और Tim Cook जैसे बड़े नाम मौजूद थे। इसके बावजूद यात्रा के दौरान अमेरिकी पत्रकारों और अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की खबरें भी सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी हुई। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक इन रिपोर्टों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यात्रा के अंतिम दिन का दृश्य हालांकि पूरी तरह अलग नजर आया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ट्रंप को अपने निजी और सरकारी परिसर के भीतर लेकर गए, जहां उन्होंने बगीचों और ऐतिहासिक हिस्सों का निरीक्षण किया। बताया गया कि ट्रंप वहां मौजूद विशाल और खूबसूरत गुलाबों को देखकर काफी प्रभावित हुए। यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने इतने सुंदर गुलाब पहले कभी नहीं देखे। ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में शी जिनपिंग से पूछा कि क्या इन गुलाबों को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन के लिए भेजा जा सकता है।
इस पर शी जिनपिंग ने ट्रंप को चीनी गुलाब यानी “Rosa chinensis” के बीज भेजने पर सहमति जताई। यात्रा के दौरान मौजूद अनुवादक ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति अमेरिकी राष्ट्रपति को विशेष रूप से चीनी गुलाब के बीज उपलब्ध कराएंगे ताकि उन्हें व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में लगाया जा सके। इस पर ट्रंप ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें यह विचार बहुत पसंद आया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतीकात्मक उपहार केवल बागवानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे चीन की ओर से एक कूटनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। एक ओर यात्रा के शुरुआती दिनों में प्रोटोकॉल और सम्मान को लेकर सवाल उठे, वहीं दूसरी ओर अंत में दिया गया विशेष सम्मान और निजी परिसर का दौरा रिश्तों में नरमी का संकेत माना जा रहा है।
चीन और अमेरिका के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। ऐसे में ट्रंप और शी जिनपिंग की यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी अहम मानी जा रही है। हालांकि यात्रा के दौरान उठे विवादों ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के रिश्तों में प्रतिस्पर्धा और कूटनीतिक शक्ति प्रदर्शन अब भी जारी है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि इस यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के संबंधों में आगे क्या नया मोड़ आता है।
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