तराई की खुशबू से भरपूर लखीमपुर खीरी के कच्चे केले के कोफ्ते

तराई की खुशबू से भरपूर लखीमपुर खीरी के कच्चे केले के कोफ्ते

प्रेषित समय :22:11:24 PM / Sat, May 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला लखीमपुर खीरी सिर्फ अपनी हरियाली, तराई और गन्ने की खेती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक स्वादों के लिए भी खास पहचान रखता है. नेपाल सीमा से सटे इस इलाके की रसोई में मिट्टी की सोंधी खुशबू, देसी मसालों का संतुलन और घर जैसा स्वाद हर व्यंजन में महसूस होता है. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में “कच्चे केले के कोफ्ते” ऐसी शाही डिश मानी जाती है, जो आज भी यहां के घरों, दावतों और त्योहारों की शान बनी हुई है.लखीमपुर खीरी में कच्चे केले का इस्तेमाल सिर्फ साधारण सब्जी के रूप में नहीं, बल्कि बेहद खास अंदाज में किया जाता है. यहां बनने वाले केले के कोफ्ते इतने मुलायम और रेशमी होते हैं कि मुंह में जाते ही घुल जाते हैं. इस डिश की सबसे बड़ी खासियत इसका संतुलित स्वाद है, जिसमें मसाले केले के प्राकृतिक स्वाद को दबाते नहीं बल्कि उसे और निखार देते हैं.

रेसिपी कार्ड
तैयारी का समय: 20 मिनट

पकाने का समय: 40 मिनट

सर्विंग्स: 3 से 4 लोग

कोफ्ते बनाने के लिए सामग्री
4 से 5 कच्चे केले

3 बड़े चम्मच भुना बेसन

2 बारीक कटी हरी मिर्च

1 छोटा चम्मच कद्दूकस किया अदरक

1 चुटकी हींग

1 छोटा चम्मच अजवाइन

स्वादानुसार नमक

आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

तलने के लिए सरसों का तेल

रसेदार ग्रेवी के लिए सामग्री
2 बड़े प्याज का पेस्ट

2 टमाटर की प्यूरी

1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट

आधा कप फेंटा हुआ दही

1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

आधा छोटा चम्मच हल्दी

आधा छोटा चम्मच गरम मसाला

1 तेजपत्ता

1 छोटा चम्मच जीरा

स्वादानुसार नमक

2 बड़े चम्मच सरसों का तेल

जरूरत अनुसार पानी

ऐसे तैयार करें लखीमपुर खीरी वाले कच्चे केले के कोफ्ते
सबसे पहले कच्चे केलों को हल्का उबाल लें. ध्यान रखें कि केले पूरी तरह गलें नहीं, बस इतने नरम हो जाएं कि आसानी से मैश किए जा सकें. अब केले का छिलका हटाकर उन्हें अच्छे से मैश करें. इसमें भुना बेसन, हरी मिर्च, अदरक, अजवाइन, हींग, नमक और लाल मिर्च डालकर मिश्रण तैयार करें.

अब हाथों में हल्का तेल लगाकर छोटे-छोटे गोल कोफ्ते बना लें. कढ़ाही में सरसों का तेल गर्म करें और कोफ्तों को धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तल लें. सरसों के तेल की खुशबू ही इस डिश को असली तराई वाला स्वाद देती है.

ऐसे बनती है तराई वाली खास ग्रेवी
अब एक कढ़ाही में तेल गर्म करें और उसमें जीरा व तेजपत्ता डालें. इसके बाद प्याज का पेस्ट डालकर धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक मसाले से तेल अलग न होने लगे. अब इसमें अदरक-लहसुन पेस्ट और टमाटर की प्यूरी डालें.

जब मसाला अच्छी तरह पक जाए, तब हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक मिलाएं. अब इसमें फेंटा हुआ दही डालकर लगातार चलाते रहें ताकि दही फटे नहीं. मसाला गाढ़ा और खुशबूदार हो जाए तो जरूरत अनुसार पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें.

अंत में तले हुए कोफ्ते ग्रेवी में डालें और 5 से 7 मिनट धीमी आंच पर पकने दें ताकि मसालों का स्वाद कोफ्तों में अच्छी तरह उतर जाए.

ऐसे परोसें और बढ़ाएं स्वाद
लखीमपुर खीरी में इस डिश को गर्मागर्म अजवाइन वाली पूड़ी, तंदूरी पराठे या बासमती चावल के साथ परोसा जाता है. साथ में गन्ने के सिरके वाला प्याज और पुदीने की चटनी इसका स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं.

स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना
कच्चा केला स्वादिष्ट होने के साथ-साथ बेहद पौष्टिक भी माना जाता है. इसमें फाइबर, पोटैशियम और जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं. यही वजह है कि यह पारंपरिक डिश स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन मेल मानी जाती है.

आज भले ही फास्ट फूड का दौर हो, लेकिन लखीमपुर खीरी के गांवों और कस्बों में चूल्हे पर बनने वाले कच्चे केले के कोफ्तों की खुशबू आज भी लोगों को अपनी परंपरा और मिट्टी से जोड़े हुए है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-