भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में बड़ा कदम बढ़ाते हुए अपनी पहली फ्रंट-एंड चिप फैब्रिकेशन यूनिट की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति हासिल की है। Tata Electronics और नीदरलैंड की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी ASML के बीच गुजरात के धोलेरा में बनने वाली देश की पहली फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन सुविधा को लेकर अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और नीदरलैंड के नेता Rob Jetten भी मौजूद रहे।
यह समझौता भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र स्थापित करेगी। वहीं ASML इस परियोजना के लिए हाई-प्रिसिजन लिथोग्राफी मशीनें उपलब्ध कराएगी। ये मशीनें सिलिकॉन वेफर पर सर्किट “प्रिंट” करने का काम करती हैं और आधुनिक चिप निर्माण की सबसे अहम तकनीकों में गिनी जाती हैं। वैश्विक स्तर पर इस तकनीक में ASML का लगभग एकाधिकार माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह साझेदारी भारत को केवल चिप डिजाइनिंग तक सीमित रहने के बजाय वास्तविक चिप निर्माण क्षमता देने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अब तक भारत दुनिया के लिए सेमीकंडक्टर डिजाइन करने वाले प्रमुख देशों में रहा है, लेकिन देश में फ्रंट-एंड फैब्रिकation क्षमता नहीं होने के कारण चिप निर्माण के लिए विदेशों पर निर्भरता बनी हुई थी।
साल 2021-22 के वैश्विक चिप संकट के दौरान भारत के ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उस समय वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के उत्पादन पर असर पड़ा था। इसी संकट के बाद केंद्र सरकार ने 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया था, जिसके तहत अरबों डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की गई थी ताकि वैश्विक कंपनियों को भारत में चिप निर्माण के लिए आकर्षित किया जा सके।
टाटा की धोलेरा परियोजना और ASML के साथ यह नई साझेदारी अब तक उस नीति का सबसे बड़ा और प्रभावशाली परिणाम मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने भी इस समझौते को भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में अहम कदम बताया है। सरकार का मानना है कि इससे देश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा।
नीदरलैंड भारत के लिए यूरोप के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक भी है, जिसका कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 55.6 अरब डॉलर से अधिक बताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धोलेरा परियोजना सफल होती है, तो भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकता है। इससे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी।
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