Deloitte की ताजा ग्लोबल जेनरेशन सर्वे रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि भारत के जेन जेड और मिलेनियल प्रोफेशनल्स कार्यस्थल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को अपनाने में दुनिया के अन्य देशों के युवाओं से आगे निकल चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 90 प्रतिशत युवा कर्मचारी नियमित रूप से एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और बड़ी संख्या में युवा अपने काम में एआई के उपयोग को लेकर आत्मविश्वास भी महसूस कर रहे हैं। हालांकि दूसरी ओर आर्थिक दबाव और बढ़ती वित्तीय असुरक्षा के कारण युवा पीढ़ी अपने जीवन के बड़े फैसलों को टालने पर मजबूर हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में 85 प्रतिशत जेन जेड और 91 प्रतिशत मिलेनियल्स ने कहा कि वे अपने कार्यक्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करने को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वासी हैं। सर्वे में देशभर के 806 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें 506 जेन जेड और 300 मिलेनियल्स शामिल थे। रिपोर्ट बताती है कि भारतीय युवाओं के बीच एआई अब केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह उनके करियर, कामकाज और सीखने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन चुका है।
सर्वे में सामने आया कि 90 प्रतिशत से अधिक युवा प्रोफेशनल्स एआई का उपयोग लर्निंग एंड डेवलपमेंट, करियर गाइडेंस और कार्यस्थल के तनाव को संभालने के लिए कर रहे हैं। डेलॉइट के मुताबिक भारत में एआई तेजी से एक सपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित हो रहा है। युवा कर्मचारी अब इसे केवल उत्पादकता बढ़ाने वाले टूल के रूप में नहीं बल्कि पेशेवर विकास और निर्णय लेने में मददगार तकनीक के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि एआई अपनाने की इस तेज रफ्तार के बीच रिपोर्ट ने युवाओं पर बढ़ते आर्थिक दबाव की तस्वीर भी सामने रखी है। सर्वे में शामिल 54 प्रतिशत जेन जेड और 44 प्रतिशत मिलेनियल्स ने स्वीकार किया कि आर्थिक समस्याओं के कारण उन्हें अपने जीवन के महत्वपूर्ण फैसले टालने पड़े हैं। इनमें घर खरीदना, शादी करना और करियर से जुड़े बड़े निर्णय शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक तनाव का असर जेन जेड पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। करीब 37 प्रतिशत जेन जेड युवाओं ने कहा कि वे घर खरीदने में सक्षम नहीं हैं, जबकि मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 20 प्रतिशत रहा। वहीं 29 प्रतिशत जेन जेड ने खुद को आर्थिक रूप से असुरक्षित बताया, जबकि मिलेनियल्स में यह संख्या 18 प्रतिशत दर्ज की गई।
डेलॉइट इंडिया की चीफ पीपल एंड एक्सपीरियंस ऑफिसर Deepti Sagar ने कहा कि एआई और जनरेटिव एआई अब हर बिजनेस सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों के पास अब यह बड़ा अवसर है कि वे कर्मचारियों के लिए भूमिका आधारित और व्यापक एआई अपस्किलिंग प्रोग्राम तैयार करें ताकि युवा बदलती तकनीक के साथ आगे बढ़ सकें।
सर्वे में यह भी सामने आया कि भारत में बड़ी संख्या में युवा पहले ही एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरे कर चुके हैं। करीब 32 प्रतिशत जेन जेड और 35 प्रतिशत मिलेनियल्स ने बताया कि वे एआई प्रशिक्षण ले चुके हैं। वहीं 54 प्रतिशत जेन जेड और 60 प्रतिशत मिलेनियल्स ने आगे और एआई स्किल सीखने में रुचि दिखाई है।
रिपोर्ट ने कार्यस्थल को लेकर युवाओं की बदलती सोच को भी उजागर किया है। लगभग आधे जेन जेड और 41 प्रतिशत मिलेनियल्स ने कहा कि यदि किसी कंपनी के मूल्य उनके व्यक्तिगत विचारों से मेल नहीं खाते तो वे वहां काम करना पसंद नहीं करेंगे। वहीं 99 प्रतिशत जेन जेड और 98 प्रतिशत मिलेनियल्स ने माना कि काम में उद्देश्य और संतुष्टि का सीधा संबंध है।
करियर लक्ष्यों को लेकर भी भारतीय युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है। हालांकि 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने नेतृत्व या मैनेजमेंट रोल में रुचि दिखाई, लेकिन बहुत कम युवाओं ने इसे अपना मुख्य लक्ष्य बताया। ज्यादातर युवाओं ने वर्क-लाइफ बैलेंस और आर्थिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी।
रिपोर्ट के मुताबिक जहां दुनिया के कई देशों में युवा धीरे-धीरे करियर ग्रोथ को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं भारतीय युवा दो हिस्सों में बंटे दिखाई दे रहे हैं। कुछ युवा तेज रफ्तार करियर ग्रोथ चाहते हैं, जबकि कई स्थिर और संतुलित प्रगति को बेहतर मानते हैं। डेलॉइट का कहना है कि यह भारत के युवाओं की महत्वाकांक्षाओं और बदलती पेशेवर सोच की विविधता को दर्शाता है।
एआई के बढ़ते प्रभाव और आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में भारतीय युवा नई तकनीक को तेजी से अपनाकर खुद को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। हालांकि बढ़ती महंगाई, वित्तीय असुरक्षा और जीवनशैली के दबाव ने उनके व्यक्तिगत और पेशेवर फैसलों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

