नई दिल्ली/बेंगलुरु.देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया का दिल्ली से बेंगलुरु जा रहा एक यात्री विमान गुरुवार को लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार होते-होते बच गया. विमान रनवे पर उतरते समय अचानक संतुलन बिगड़ने से उसका पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया. इस घटना को विमानन भाषा में “टेल स्ट्राइक” कहा जाता है. घटना के बाद विमान को सुरक्षित रूप से उतार लिया गया और उसमें सवार सभी 179 यात्रियों तथा चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. हालांकि इस गंभीर घटना ने एक बार फिर देश में विमान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई-2651 गुरुवार को दिल्ली से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई थी. विमान जब बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने की प्रक्रिया में था, तभी तेज हवा और असामान्य वायु दबाव के कारण विमान का पिछला हिस्सा रनवे से रगड़ खा गया. विमान में मौजूद यात्रियों को अचानक तेज झटका महसूस हुआ, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई. हालांकि पायलट ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए विमान को दोबारा हवा में उठाया और कुछ देर बाद सुरक्षित लैंडिंग कराई.
घटना के बाद एयर इंडिया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. एयर इंडिया ने विमान को तत्काल प्रभाव से ग्राउंडेड कर दिया है, ताकि उसकी विस्तृत तकनीकी जांच की जा सके. डीजीसीए के अधिकारियों ने भी पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है और विमान उड़ाने वाले दोनों पायलटों को फिलहाल ड्यूटी रोस्टर से हटा दिया गया है. जांच पूरी होने तक उन्हें उड़ान संचालन से दूर रखा जाएगा.
एयर इंडिया की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि “दिल्ली से बेंगलुरु जा रही उड़ान एआई-2651 लैंडिंग के दौरान टेल स्ट्राइक की घटना का शिकार हुई. विमान सुरक्षित रूप से उतरा और सभी यात्रियों तथा चालक दल के सदस्य सामान्य रूप से बाहर निकल गए. विमान को विस्तृत निरीक्षण के लिए सेवा से हटाया गया है और घटना की जांच नियमानुसार संबंधित नियामक एजेंसियों के साथ मिलकर की जाएगी.”
सूत्रों के अनुसार यह घटना “वेक टर्बुलेंस” यानी वायु अशांति के कारण हुई. बताया जा रहा है कि एयर इंडिया का एयरबस ए-321 विमान जिस समय रनवे पर उतरने की कोशिश कर रहा था, उससे ठीक पहले एक बड़ा मालवाहक बोइंग 747 विमान उड़ान भर चुका था. बड़े विमानों के उड़ान भरने के बाद हवा में बनने वाला दबाव और अशांत वायु प्रवाह पीछे आने वाले विमानों को प्रभावित कर सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक इसी वेक टर्बुलेंस की वजह से एयर इंडिया का विमान असंतुलित हुआ और उसका पिछला हिस्सा रनवे से टकरा गया.
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि टेल स्ट्राइक की घटनाएं बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं, क्योंकि इससे विमान के ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. यदि नुकसान अधिक हो तो भविष्य में उड़ान के दौरान तकनीकी खतरा पैदा हो सकता है. यही कारण है कि ऐसी किसी भी घटना के बाद विमान को तुरंत जांच के लिए रोक दिया जाता है.
घटना के बाद बेंगलुरु से दिल्ली लौटने वाली एयर इंडिया की वापसी उड़ान एआई-2652 को रद्द कर दिया गया. इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. एयर इंडिया ने कहा कि प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और ग्राउंड स्टाफ यात्रियों की हर संभव मदद कर रहा है. एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद भी जताया.
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी यात्रियों और लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कई लोगों ने सवाल उठाया कि लगातार बढ़ते हवाई यातायात और व्यस्त एयरपोर्ट संचालन के बीच सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है. वहीं कुछ यात्रियों ने पायलट की सतर्कता और अनुभव की सराहना की, जिसकी वजह से बड़ा हादसा टल गया.
डीजीसीए अब विमान के ब्लैक बॉक्स डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग और मौसम संबंधी रिपोर्ट की जांच करेगा. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि लैंडिंग के समय पायलटों ने सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया था या नहीं. प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा.
हाल के वर्षों में भारत में विमान यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसके साथ ही विमानों की आवाजाही भी बढ़ी है, जिसके कारण एयर ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर चुनौतियां सामने आ रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि व्यस्त एयरपोर्ट्स पर वेक टर्बुलेंस जैसी स्थितियों से बचने के लिए विमानों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है.
फिलहाल राहत की बात यह रही कि एयर इंडिया की इस उड़ान में कोई जनहानि नहीं हुई और सभी यात्री सुरक्षित हैं. लेकिन यह घटना विमानन सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है. डीजीसीए की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह केवल मौसम और वायु दबाव का असर था या फिर संचालन स्तर पर भी कहीं कोई चूक हुई.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

