नई दिल्ली. आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में जहां अत्याधुनिक मशीनें, अनुभवी डॉक्टर और उन्नत इलाज को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है, वहीं अब अस्पतालों और क्लिनिकों की संरचना तथा वातावरण को लेकर भी लोगों की रुचि तेजी से बढ़ रही है. पिछले कुछ वर्षों में अस्पताल वास्तु यानी मेडिकल वास्तु को लेकर डॉक्टरों, क्लिनिक संचालकों और मरीजों के बीच नई चर्चा शुरू हुई है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल या क्लिनिक का वातावरण यदि व्यवस्थित, शांत और संतुलित हो तो उसका सकारात्मक प्रभाव मरीजों और चिकित्सा कर्मियों दोनों पर पड़ता है.
इसी क्रम में अब विभिन्न प्रकार के विशेषज्ञ क्लिनिकों—जैसे गायनाकोलॉजिस्ट, स्किन स्पेशलिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, ऑर्थोपेडिक सर्जन और मनोवैज्ञानिक क्लिनिक—के लिए अलग-अलग वास्तु संबंधी सुझावों पर चर्चा तेज हो गई है. चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई लोग अब केवल इलाज की सुविधाओं पर ही नहीं बल्कि क्लिनिक के आंतरिक वातावरण, रोशनी, दिशा और मरीजों की सहजता पर भी विशेष ध्यान देने लगे हैं.
गायनाकोलॉजिस्ट / स्त्री-रोग विशेषज्ञ:-
स्त्री-रोग विशेषज्ञ के क्लीनिक में गोपनीयता, शांति और सम्मानजनक वातावरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है!
*परामर्श कक्ष:* को इस तरह रखें कि रोगी बिना असहजता के बैठ सके, और डॉक्टर का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो तो ध्यान और संवाद में स्थिरता मानी जाती है
जांच कक्ष अल्ट्रासाउंड/प्रोसीजर क्षेत्र:
इन्हें प्रतीक्षा क्षेत्र से अलग-अलग रखना चाहिए, ताकि निजीपन बना रहे.
*रिसेप्शन उत्तर-पूर्व, उत्तर या पूर्व में रखा जाए और प्रतीक्षा क्षेत्र हल्का, साफ़ तथा कम भीड़-भाड़ वाला हो.
त्वचा रोग विशेषज्ञ
त्वचा रोग विशेषज्ञ के क्लीनिक में प्रकाश, स्वच्छता, सौंदर्य और स्पष्ट दृश्य-व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण होती है.
डॉक्टर की सीट ऐसी हो कि रोगी की जांच आराम से की जा सके; डॉक्टर का मुख उत्तर या पूर्व की ओर रखना उपयुक्त माना जाता है.
-क्रीम, लोशन, लेज़र उपकरण, डर्मेटोस्कोप और अन्य छोटे उपकरणों को साफ़, ढकी हुई और व्यवस्थित अलमारियों में यथा संभव NW में रखें.
-रंग हल्के और शांत हों, क्योंकि त्वचा-चिकित्सा में मरीज अपने रूप-रंग को लेकर अधिक संवेदनशील हो सकते हैं
प्रतीक्षा क्षेत्र: में प्राकृतिक प्रकाश और कम-तनाव वाला वातावरण रखना रोगी-अनुभव के लिए अच्छा माना जाता है.
न्यूरोलॉजिस्ट / Neuro क्लीनिक
में एकाग्रता, शांति, ध्वनि-नियंत्रण और व्यवस्थित जांच-प्रणाली सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है.
डॉक्टर का कक्ष दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में और बैठते समय मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना बेहतर माना जाता है.
*ईईजी, परीक्षण-उपकरण* रिपोर्ट, फाइलें और मॉनिटर को ऐसी जगह रखें जहां कार्य करते समय बार-बार मुड़ना न पड़े.
न्यूरो रोगियों के लिए वातावरण कम शोर वाला, कम चमक वाला और अत्यधिक भीड़ से मुक्त होना चाहिए.
प्रतीक्षा कक्ष में शांत रंग और सरल व्यवस्था से रोगी की घबराहट कम हो सकती है.
ऑर्थोपेडिक सर्जन(हड्डी रोग विशेषज्ञ):
ऑर्थोपेडिक क्लीनिक में मजबूती, स्पष्ट व्यवस्था और उपकरणों की सहज उपलब्धता आवश्यक है!
डॉक्टर का कक्ष दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में रखना और डॉक्टर का मुख उत्तर/पूर्व की ओर रखना उपयुक्त माना जाता है.
एक्स-रे रिपोर्ट, प्लास्टर सामग्री, जाँच-उपकरण, ब्रेस, सपोर्ट और रिकॉर्ड को अलग-अलग वर्गीकृत करके रखना चाहिए.
-यदि क्लीनिक में प्रोसिजर रूम है, तो उसे कार्य-प्रवाह के अनुसार अलग और व्यवस्थित रखें.
मरीजों के बैठने और चलने की जगह खुली, सुरक्षित और बिना रुकावट वाली होनी चाहिए, क्योंकि ऑर्थोपेडिक रोगियों को चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है. इस क्लीनिक में प्रवेश व्हील चेयर से ही संकेत रैम आ सहाय बनवाएं
मनोवैज्ञानिक :
मनोवैज्ञानिक के क्लीनिक में गोपनीयता, मानसिक शांति, मुलायम वातावरण और भरोसे का भाव सबसे अधिक आवश्यक होता है
परामर्श कक्ष: में डॉक्टर की सीट उत्तर या पूर्व मुखी हो सकती है, ताकि संवाद अधिक स्थिर और ध्यान पूर्ण लगे!
कक्ष में तेज़ रंग, तीव्र रोशनी और अनावश्यक सजावट से बचना चाहिए, क्योंकि मनोवैज्ञानिक परामर्श में शांत वातावरण अधिक उपयोगी होता है!
*रोगी के लिए बैठने की व्यवस्था* आरामदायक हो, लेकिन बहुत औपचारिक या भय पैदा करने वाली न हो !
यदि कई परामर्श कक्ष हों, तो उन्हें अलग-अलग और ध्वनि-नियंत्रित रखना बेहतर रहता है!(यथा संभव साउंड प्रूफ).
*सभी विशेषज्ञ क्लीनिकों के लिए सामान्य सूत्र:*
प्रवेश उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व में रखना सामान्यतः अधिक शुभ और स्वागत पूर्ण माना जाता है.
डॉक्टर का मुख उत्तर या पूर्व की ओर हो और पीछे ठोस सहारा हो, तो कार्य में स्थिरता आती है.
रिसेप्शन और प्रतीक्षा क्षेत्र को हल्का, साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए!
भारी फाइलें, स्टोरेज, कम उपयोग वाली वस्तुएं और मशीनें दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम में रखना अधिक व्यावहारिक माना जाता है.
X-ray viewing screen का स्थान
जिन क्लीनिकों में X-ray रिपोर्ट देखने की आवश्यकता होती है, जैसे ऑर्थोपेडिक, डेंटल, ENT, फिजिशियन, न्यूरो और कुछ स्त्री-रोग या अन्य विशेषज्ञ क्लीनिक, वहाँ X-ray viewing screen को डॉक्टर की कार्य-सीट के पास रखना चाहिए.
सामान्यतः इसे उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना अधिक उचित माना जाता है, ताकि परीक्षण और रिपोर्ट-रीडिंग में सुविधा बनी रहे.
X-ray screen ऐसी जगह हो जहां डॉक्टर को बार-बार उठना या मुड़ना न पड़े, और रोगी के साथ रिपोर्ट समझाने में सहजता रहे.
यदि वास्तु-सुधार सीमित हों, तो प्रकाश, वेंटिलेशन, रंग, सफाई और वास्तु यंत्रों से अव्यवस्था-नियंत्रण से काफी सुधार किया जा सकता है.

