सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पड़ी भारी, जबलपुर से फोन पर गाली देने का आरोप, लोकेशन झारखंड में मिलने पर बढ़ी कानूनी पेचीदगी

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पड़ी भारी, जबलपुर से फोन पर गाली देने का आरोप, लोकेशन झारखंड में मिलने पर बढ़ी कानूनी पेचीदगी

प्रेषित समय :17:53:53 PM / Fri, May 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराना एक व्यक्ति को उस समय भारी पड़ गया, जब शिकायत के निराकरण की जगह उसे कथित रूप से फोन पर गाली-गलौज और धमकियों का सामना करना पड़ा. मामला अब केवल अभद्र भाषा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराज्यीय कानूनी जांच का विषय बन गया है. शिकायतकर्ता जबलपुर का रहने वाला है, लेकिन जिस समय उसे कथित तौर पर अपशब्द कहे गए, उस समय उसकी लोकेशन झारखंड के हजारीबाग जिले में थी. इसी वजह से अब मामले की जांच झारखंड पुलिस करेगी. गोरखपुर थाना पुलिस ने शून्य पर एफआईआर दर्ज कर केस डायरी झारखंड भेज दी है.

मामला आदर्श नगर निवासी अजित सिंह से जुड़ा हुआ है. जानकारी के अनुसार अजित सिंह ने नगर निगम से संबंधित एक समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के बाद उन्हें उम्मीद थी कि संबंधित विभाग समस्या का समाधान करेगा, लेकिन कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर नगर निगम के नाम से आवंटित एक नंबर से कॉल आया. उस समय अजित सिंह झारखंड के हजारीबाग जिले में मौजूद थे.

फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पंकज विश्वकर्मा बताया और शिकायतकर्ता से उसके घर का पता तथा शिकायत से जुड़ी जानकारी पूछने लगा. शिकायतकर्ता ने जवाब दिया कि यदि शिकायत निराकरण के लिए संबंधित विभाग के पास पहुंच चुकी है तो उन्हें उसकी पूरी जानकारी पहले से होनी चाहिए. आरोप है कि इसी बात पर फोन करने वाला व्यक्ति नाराज हो गया और उसने अभद्र भाषा का प्रयोग करना शुरू कर दिया.

शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर निगम कर्मचारी ने फोन पर गाली-गलौज करते हुए अपमानजनक बातें कहीं. पूरी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी शिकायतकर्ता ने सुरक्षित रख ली. इसके बाद अजित सिंह ने जबलपुर के गोरखपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई और संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी. शिकायत में कहा गया कि एक सरकारी विभाग से जुड़े व्यक्ति द्वारा शिकायतकर्ता के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अमर्यादित है बल्कि यह आम नागरिकों को डराने और शिकायत करने से रोकने जैसा प्रयास भी है.

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिस मोबाइल नंबर से कॉल किया गया था, वह नगर निगम से संबद्ध था और वह नंबर अजय विश्वकर्मा नाम के व्यक्ति के नाम पर आवंटित बताया गया. हालांकि फोन पर खुद को पंकज विश्वकर्मा बताने वाले व्यक्ति की वास्तविक पहचान को लेकर अब जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कॉल किस परिस्थिति में किया गया और क्या वास्तव में संबंधित व्यक्ति नगर निगम कर्मचारी है या किसी अन्य ने उस नंबर का उपयोग किया.

कानूनी दृष्टि से मामला उस समय और जटिल हो गया जब पुलिस को पता चला कि कथित अपराध के दौरान शिकायतकर्ता की लोकेशन झारखंड में थी. भारतीय कानून के अनुसार जिस स्थान पर पीड़ित ने कथित अपराध को अनुभव किया हो, वहां की पुलिस को भी मामले की जांच का अधिकार होता है. इसी आधार पर गोरखपुर थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 के तहत शून्य पर एफआईआर दर्ज की. इसके बाद पूरा प्रकरण जांच के लिए झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाने को स्थानांतरित कर दिया गया.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शून्य एफआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पीड़ित की शिकायत क्षेत्राधिकार के कारण लंबित न रहे. इसलिए जबलपुर में शिकायत दर्ज करने के बाद केस डायरी संबंधित क्षेत्र की पुलिस को भेज दी गई. अब झारखंड पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई करेगी.

इस घटना के सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाई गई है, लेकिन यदि शिकायत करने वालों को ही प्रताड़ित किया जाएगा तो इससे जनता का भरोसा कमजोर होगा. सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है और कई लोग सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रिकॉर्डिंग में गाली-गलौज और धमकी की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है. मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और ऑडियो फोरेंसिक रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है. पुलिस यह भी पता लगाएगी कि शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने या शिकायत वापस लेने के लिए तो फोन नहीं किया गया था.

उधर शिकायतकर्ता अजित सिंह का कहना है कि उन्होंने केवल अपनी समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लिया था, लेकिन इसके बाद जिस तरह से उनके साथ व्यवहार किया गया, उससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं. उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी कर्मचारी शिकायतकर्ताओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार करने की हिम्मत न कर सके.

अब यह मामला जबलपुर से निकलकर झारखंड तक पहुंच चुका है और दोनों राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय के साथ जांच आगे बढ़ाई जा रही है. आने वाले दिनों में कॉल रिकॉर्डिंग और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले में नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-